
aayam fest 2018
इंदौर. जंगी मैदान... ब्लू और ग्रीन आर्मी ड्रेस में गोलियां बरसाते स्टूडेंट्स। हाथों में झंडा था और भारत माता की जय-जयकार के नारे। इन सब की एक ही मंशा थी दुश्मनों के एरिया को कब्जे में लेना। हाथों में झंडा लिए टीम का लीडर आगे बढ़ता गया तो पीछे टीम मेंबर्स कवर फायर दे रहे थे। मौका था एसजीएसआईटीएस कॉलेज में हुए आयाम फेस्ट के सबसे रोमांचक कॉम्पीटिशन ‘रणभूमि’ का। शहर के २० कॉलेज ने इसमें पार्टिसिपेट किया। हर कॉलेज की टीम के हेड के पास झंडा था, जिसे उसे दूसरे के एरिया में जाकर लहराना था। गोलियों के बदले रायफल्स में पेंट बॉल्स थी। इन्हें भी ऑर्गनिक कलर्स से ही भरा गया था।
जर्मनी की एयर रायफल्स व पिस्टल
वीर रायफल्स शूटिंग सोसाइटी की ओर से अलग-अलग तरह की आठ रायफल्स व पिस्टल शूटिंग कॉम्पीटिशन के लिए लाई गई थी। इसमें टेन मीटर एयर रायफल्स और पिस्टल थी, जो ओपन साइड थी। इसकी कीमत २ से २.५० लाख रुपए थी। वॉलसर, एनॉटोमिक, एनफ्यूज, फिंगर बो खास थी।
17 कॉम्पीटिशन मेंं शामिल हुए हजारों स्टूडेंट्स
एसजीएसआईटीएस के ग्राउंड में चल रहे ‘आयाम २०१८’ में शहरभर के स्टूडेंट्स का मंगलवार को जमावड़ा लगा। हर तरफ स्टूडेंट्स के लिए कॉम्पीटिशंस की भरमार थी। शूटिंग, काव्यांजलि, वाद-विवाद, लाइव पेंटिंग, स्टोरी टेलिंग, नुक्कड़ नाटक सहित १७ कॉम्पीटिशंस हुई। देर शाम कल्चरल नाइट का आयोजन भी किया गया, जिसमें दो हजार से ज्यादा स्टूडेंट्स शामिल हुए।
चंद मिनट में तैयार कर देते हैं स्कैच
कॉम्पीटिशन में कुछ हुनरमंद अलहदा दर्जे के युवक भी मौजूद थे। लाइव पेंङ्क्षटग आर्टिस्ट बालाघाट निवासी सूर्यभान मेहरवि चंद मिनट में लाइव स्कैच बनाकर तैयार कर देते हैं। इन दो दिनों में ७० से ज्यादा लाइव स्कैच बनाए गए।
स्टोरी टेलिंग
- उत्कर्ष शर्मा ने गांव के बच्चों पर कहानी सुनाई। उन्होंने कहा कि एक गांव में दो बच्चे थे। सोनू (६) और मोनू (१०)। दोनों एक दिन खेलते-खेलते जंगल में चले गए। जहां बिना मेढ़ वाले कुए में मोनू गिर गया। सोनू घबरा कर चिल्लाने लगा। कोई नहीं आया तो खुद ही ने बाल्टी में रस्सी बांधकर कुएं में गिराई और मोनू को निकाल लिया। छोटा-बड़ा होने से कुछ नहीं होता। मन में निश्चय हो तो मौत को भी हरा सकते हो।
- सतीश बैरागी ने कहानी सुनाई कि एक व्यक्ति हाथी को रस्सी से बांध ले जा रहा था। दूसरा व्यक्ति इसे देख रहा था। उसे बड़ा आश्चर्य हुआ कि इतना बड़ा जानवर इस हल्की सी रस्सी से बंधा जा रहा है। हाथी के मालिक से पूछा कि यह कैसे संभव है? हाथी के मालिक ने कहा कि जब ये हाथी छोटे होते हैं तो इनके गले में रस्सी बांध दी जाती है। उसे तोडऩे का हरसंभव प्रयास छोटी उम्र में ही कर लेते हैं, लेकिन रस्सी नहीं टूटती। बस हाथी सोच लेते हैं कि गले में बंधी रस्सी कभी नहीं टूट सकती। इसी प्रकार हम इंसान भी हमारी नकारात्मक सोच से बंधे हैं।
Published on:
28 Feb 2018 04:41 pm
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