
इंदौर. एमएस होटल और बावड़ी जैसे हादसों में कई लोगों की मौत देख चुके शहर में अब भी कई इमारतें जर्जर होकर खड़ी है, लेकिन ऐसा लगता है कि हादसे का इंतजार किया जा रहा है। 40 साल पुराने शास्त्री मार्केट की हालात भी जर्जर हो रही है। डर के बीच व्यापारी काम कर रहे हैं। पिलर दरक रहे हैं तो सरिए को हाथ लगाने पर चूरा बाहर आ जाता है।
शहर के गांधी हॉल के सामने नगर निगम का 40 साल पुराना शास्त्री मार्केट है। यह जर्जर होने लगा है। मुख्य मार्ग की ओर वाली गैलरी के सभी पिलर के अलावा अन्य स्ट्रक्चर कमजोर हो गए हैं। सड़ चुके सरिए बाहर दिखाई देते हैं। चूरा हाथ में आने लगता है। दीवारों में बड़ी दरारें साफ दिखाई देती है। व्यापारियों ने निजी इंजीनियर को बुलाकर मौके पर निरीक्षण कराया तो उन्होंने भी हादसे की आशंका जताई है। शहर में जर्जर मकानों की निगरानी और तोडऩे वाला निगम अपनी मार्केट की सुध नहीं ले रहा है।
डर के बीच व्यापारी, 2 हजार की जान दांव पर
व्यापारियों का कहना है कि नगर निगम ने बिल्डिंग बनाई है। सभी व्यापारी किरायेदार है। हर माह नगर निगम को बराबर किराया भी दिया जाता है। दो बार हम शिकायत भी कर चुके हैं, लेकिन उसके बाद भी निगम के अफसर ध्यान नहीं दे रहे हैं। बिल्डिंग की हालात से खतरे का अंदाजा लगाया जा सकता है। समय रहते सुध नहीं ली तो बड़ा हादसा हो सकता है। 300 से अधिक दुकानों पर 2 हजार लोग काम करते हैं। नगर निगम की अनदेखी के चलते करीब सभी की जान दांव पर लगी है।
फैक्ट फाइल
40 साल पुराना मार्केट
300 दुकानों चल रहीं
02 हजार से ज्यादा लोगों की आवाजाही
मैंने शास्त्री मार्केट का दौरा किया था। गैलरी के पिलर जर्जर हो गए है। रिपेरिंग की बहुत आवश्यकता है। अगर पिलर्स पर धक्का लगा तो आगे का हिस्सा नीचे गिर सकता है। इमारत की सुध समय रहते लेना होगी नहीं तो कभी भी हादसा हो सकता है।
मुकेश अग्रवाल, स्ट्रक्चर इंजीनियर
Published on:
02 Jul 2023 07:23 pm
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