
इंदौर. साईं बाबा के समाधिस्थ होने का यह शताब्दी वर्ष है। बाबा ने 1918 में शिर्डी में समाधि ली थी। शिर्डी साईं बाबा संस्थान बाबा के प्रति भक्तों की आस्था को देखते हुए उनकी पादुका दर्शन यात्रा निकाल रहा है। बाबा की पादुका रथ के साथ देशभर में ले जाई जा रही है। यात्रा ५-६ मई को इंदौर में रहेगी। हालांकि शहर में अलग-अलग संगठनों द्वारा एक नहीं दो पादुकाएं लाई जा रही हैं।
शिर्डी के प्रतीकात्मक मंदिर में रखेंगे मूलचरण पादुका
शहर में साईं भक्तों के कई समूह हैं। लंबे समय से ये समूह केंद्रीय साईं सेवा समिति के रूप में काम करते रहे हैं। कुछ समय से दो समानांतर संगठन हो गए हैं। बताते हैं, साईं पादुका यात्रा की जब योजना बनी थी तब इंदौर के लिए १६ मई की तिथि तय की गई थी। शहर में साईं भक्त समिति और देवी अहिल्या साईं सोशल भक्त समिति दोनों ही यात्रा को इंदौर लाना चाहती थी। इसी बीच देवी अहिल्या समिति ने ५-६ मई को चरण पादुका दर्शन का कार्यक्रम पीपल्यापाला रीजनल पार्क में तय कर लिया। समिति अध्यक्ष भोलासिंह ठाकुर, प्रदीप अग्रवाल ने बताया, पहली बार साईं बाबा की मूलचरण पादुका शिर्डी संस्थान से दर्शनार्थ एवं पूजन के लिए लाई जा रही है। हरि अग्रवाल कहते हैं, ये पादुकाएं संग्रहालय में रखी रहती है। इन्हें बाबा स्वयं पहनते थे।
दो दिवसीय दर्शन महोत्सव में पादुका की भव्य शोभायात्रा आज
इंदौर शहर साईं भक्त समिति बाबा के जन्म स्थल पाथरी में रखी पादुकाएं लेकर आ रही है। उनके जन्म स्थान का उल्लेख साईं चरित्र में मिलता है। महाराष्ट्र के परभण्ी जिले में स्थित यह स्थान बाबा के जन्म स्थल के रूप में पहचाना जाता है। इस यहां पर बाबा की मूर्ति है। ये पादुकाएं पद चिन्ह की तरह हैं। साईं भक्तसेवा समिति अध्यक्ष छोटू शुक्ला, गोविंद वर्मा ने बताया, कालानी नगर हनुमान मंदिर हुजुरगंज से शोभायात्रा शुक्रवार सुबह 7 बजे निकाली जाएगी। पादुका रथ में रहेगी। शोभायात्रा विभिन्न मार्गों से होते हुए छोटा बांगड़दा स्थित बाबाश्री रिसोटर््स पहुंचेगी। रिसोट्र्स में सुबह 10 बजे पंडि़तों के मंत्रोच्चार के बीच चरण पादुका स्थापित होगी। रात 8 बजे बाबा के जीवन पर आधारित नाटक का मंचन किया जाएगा। 5 मई को सुबह 8 बजे महाआरती की जाएगी।
शिर्डी संस्थान बताएगा
बाबा के जन्म स्थान के बारे में तो किसी को भी पता नहीं। हम किसी भी चरण पादुका को असली-नकली नहीं कह सकते। शिर्डी संस्थान से लेटर आया था। सुरक्षा के बीच पादुका लाई जा रही है। हमने रीजनल पार्क में सुरक्षा व्यवस्था की है। शिर्डी संस्थान के लोग आ रहे हैं, वे ही पादुका के बारे में सही बता पाएंगे।
- भोलासिंह ठाकुर, देवी अहिल्या साईं सोशल भक्त समिति
सभी प्रतीकात्मक
बाबा की चरण पादुका असली तो कहीं की भी नहीं है। प्रतिकात्मक चरण पादुका के रूप में दर्शन के लिए लाई जाती है। असली पादुका तो शिर्डी संस्थान से कभी बाहर निकली ही नहीं। अगर कोई मूल पादुका की बात करता है तो वह भक्तों को गुमराह कर रहा है। साईं चरित्र में तो बाबा के नंगे पैर चलने का उल्लेख है।
- प्रकाश तोमर, श्री इंदौर शहर साईं भक्त सेवा समिति
Published on:
04 May 2018 11:21 am
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