
Shri Lakshmi Venkatesh Devasthan Temple news
इंदौर। कपट ही वो कपाट है जो परमात्मा से मिलने नहीं देता है। ठाकुरजी को प्राप्त करने का सबसे सरल साधन भक्ति है। कपटता नहीं सीधी भक्ति कीजिए। माया अपना प्रभाव करती रहेगी। यदि आपके पास भजन की शक्ति है तो न तो भगवान का और गुरु का आशीर्वाद कम होगा। ठाकुरजी सिर्फ आपके भाव देखते है। दृष्टिकोड ही भजन है, जिस दृष्टि से देखा वही सही है।
गुरुवार को छत्रीबाग स्थित श्री लक्ष्मी वेंकटेश देवस्थान में श्रीमद भागवत कथा ज्ञान यज्ञ पर व्यास पीठ पर विराजित वैष्णवचार्य गोस्वामी श्रीपुण्डरीक महाराज ने उक्त बातें कहीं। उन्होंने कहा कि धर्म लोक हितकारी व वाला हो न की दिखावे वाला हो। चमत्कार से धर्म का कोई महत्व नहीं है। धर्म समझदार बनाने के लिए है। धर्म ऐसा हो जिसमें परोपकार छिपा हो। धर्म का मतलब ही सहिष्णुता है। जो वृक्ष के समान हो और पत्थर मारो तो भी मीठा फल देता है। उसी प्रकार संत भी है जो पत्थर खाकर भी आपको आशीर्वाद ही देगा। भागवत का मूल कपट रहित भक्ति से है। राम और रावण दोनों हमारे भीतर ही है। बस इतना होना चाहिए की भीतर का रावण राम से जीत नहीं सकें। उपासक तो रावण भी था लेकिन जरूरी यह नहीं है कि हर उपासक धार्मिक हो। कथा तो आयुर्वेद की तरह है। इसमें सभी अनुभव होते है। जिसके खाते ही असर करती है। मानव जीवन में भगवान को छोडक़र कोई दूसरी कामना नहीं करनी चाहिए। यदि हम भगवान और गुरु को छोडक़र कोई दूसरी कामना करते है तो रावण रूपी अहंकार हमारे अंदर समाज जाता है। नागोरिया पीठाधिपति स्वामी विष्णुप्रपंनाचार्य महाराज के साथ उज्जैन अवंतिका पीठ के श्रीरंगनाथाचार्य महाराज व स्वामी त्रिविक्रमाचार्य के साथ डागा परिवार ने व्यासपीठ का पूजन किया। विठला माझा माझा माझा माझा विठला आजा विठला माझा भजन पर भक्तो ने जमकर नृत्य किया। पंकज तोतला ने बताया कि कथा के समापन पर आरती हुई और उसके बाद गोष्ठी प्रसाद का वितरण किया। इस अवसर पर दिनेश डागा, दिलीप परवाल, दीपेश डागा, मनीष काबरा, लव सोनी, राजेश सोमानी आदि मौजूद थे। शुक्रवार को कथा दोपहर ३ बजे से होगी जिसमें ध्रूव चरित्र, सती चरित्र आदि विषयों पर प्रवचन देंगे। संचालन मुरली मानधन्या ने किया।
Published on:
24 May 2019 08:08 am
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