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इंदौर. इंदौर और देवास के क्रिश्चियन समाज के लिए खुशी का मौका है। इन दोनों शहरों में समाजसेवा से जुड़ी सिस्टर रानी मारिया को 4 नवंबर को धन्य घोषित किया जाएगा। वेटिकन सिटी में आयोजित यह कार्यक्रम अतंरराष्ट्रीय स्तर पर सिस्टर रानी मारिया को संत की उपाधि देगा। सिस्टर मारिया की इंदौर से उदयनगर (जिला देवास) जाते समय एक बस में चाकू से 54 वार कर हत्या कर दी गई थी। गरीबों की मदद करना, गरीब बच्चों की पढ़ाई के लिए गांव-गांव घूमना और गरीबों को अपने हक की शिक्षा देना, ताकि उनका शोषण न हो सकें। ऐसे कई काम सिस्ट मारिया ने किए थे। उनकी हत्या में शामिल समुंदर सिंह को पोप ने वेटिकन सिटी में मिलने का न्योता भी दिया था।
29 जनवरी १९५४ को रानी मरिया का जन्म एक कृषक परिवार में हुआ था और उनका नाम मरियम रखा। मारिया से प्रभावित होकर उनकी बहन सेलिन ने सेल्मी पॉल नाम से समाज सेवा की। उनकी दादी ने उन्हें रोजाना प्रार्थना करने के महत्व की जानकारी दी। इससे वे नियमित रुपए से भक्ति में लीन रहती थी।
उन्हें प्राप्त धर्म की शिक्षा अपने व्यवहार में लाने की कोशिश करती थी।
पिता-दादी ने कहा-ईश्वर के सेवा कार्यों के लिए बनी है मारिया
वे बचपन से ही मानव सेवा कार्य करना चाहती थी। वे फ्रांसिस्कन क्लारिस्ट धर्मसभा में प्रवेश करना चाहती थी। समाज सेवा के कार्यों को करने के लिए अब अपने परिवार को अवगत कराना था। लेकिन कई दिनों तक वे हिम्मत नहीं कर पाई, लेकिन एक दिन उन्होंने अपने पिता से समाज सेवा की बात कही। जैसे ही परिवार में इसकी जानकारी मिली। सभी पांचों भाई बहनों ने उनकी बात का विरोध किया, लेकिन पिता और दादी ने उन्हें समाज सेवा से जुडऩे के लिए हामी भरी। और इस तरह समाज सेवा कार्यों से एक संत बनने का मार्ग प्रशस्त हुआ। प्रारंभिक शिक्षा के लिए स्कूल में उनका नाम पीवी मेरी रखा गया।
होस्टल में रहने के कारण उन्हें धर्मलाभ मिलता रहा। रानी मारिया मूलत: केरल की रहने वाली थी, उनका जन्म के रल के पुल्लुवजि नामक गांव में हुआ था। उनकी समाज सेवा के कारण ग्रामीणों ने गांव में इनके नाम पर एक संग्रहालय बनाया है।
ऐसे हुई थी हत्या
25 फरवरी १९९५ को सिस्टर रानी मरिया इन्दौर आना था। यहां से भोपाल होकर केरल जाने की प्लानिंग थी। उनके साथ दो सिस्टर और थी, लेकिन बस स्टैंड पर पता चला कि बस रद्द हो गई है। अब उन्हें पता चला किए एक बस कॉन्वेंट स्कू ल के सामने मिलेगी। इस बस में 50 यात्री सवार थे और तीन लोग अलग-अलग स्थानों पर सिस्टर मारिया की हत्या के इरादे से बैठे हुए थे। सिस्टर मारिया के पास समुन्दर सिंह बैठा था और समुंदर सिंह का साथी जीवन सिंह सिस्टर को आदिवासियों का धर्मांतरण करने के नाम पर अपमानित करने लगा। बस जंगल में पहुंच चुकी थी, तभी समुंदर सिंह ने बस रुकवाई और एक नारियल फोड़ कर प्रसाद यात्रियों में बांटा। इसी दौरान सिस्टर मारिया को उसने चाकू मारना शुरू कर दिया। सिस्टर को छोटे-बड़े 54 घाव लगे थे। दो गांवों के लोगों के विवाद में जीवन सिंह घायल हुआ था। इस विवाद में पुलिस ने कई बेगुनाह लोगों को गिरफ्तार किया था। इससे जीवन सिंह गुस्से मे था और सिस्टर से बदला लेना चाहता था।
समुंदर सिंह की जुबानी
समुंदर ने बताया कि ऐसी बात फै ल रही थी कि जीवन और सिस्टर के बीच कुछ चल रहा है। इसके बाद जीवन पर हमला किया और घायल हो गया। जीवन को लगा कि सिस्टर ने हमला करवाया था, बस इसी बात को लेकर धर्मेंद्र और जीवन के साथ मैंने उन्हें मार दिया। जेल में रहने के दौरान सिस्टर की बहन मिलने
आई थी और उन्होंने राखी बांधी।
यह भी जाने
धनी लोग आदिवासियों को कर्ज के जाल में फंसा लेते थे, आदिवासियों को जागरुक किया।
गरीबों को विकास की योजनाओं से लाभ दिलाया।
समाज सेवा विभाग की सलाहकार थी
सामाजिक कार्यों को करने के लिए समाजशास्त्र की पढ़ाई की।
29 जनवरी १९५४ को रानी मरिया का जन्म एक कृषक परिवार में हुआ था और उनका नाम मरियम रखा। मारिया से प्रभावित होकर उनकी बहन सेलिन ने सेल्मी पॉल नाम से समाज सेवा की। उनकी दादी ने उन्हें रोजाना प्रार्थना करने के महत्व की जानकारी दी। इससे वे नियमित रुपए से भक्ति में लीन रहती थी।
उन्हें प्राप्त धर्म की शिक्षा अपने व्यवहार में लाने की कोशिश करती थी।
पिता-दादी ने कहा-ईश्वर के सेवा कार्यों के लिए बनी है मारिया
वे बचपन से ही मानव सेवा कार्य करना चाहती थी। वे फ्रांसिस्कन क्लारिस्ट धर्मसभा में प्रवेश करना चाहती थी। समाज सेवा के कार्यों को करने के लिए अब अपने परिवार को अवगत कराना था। लेकिन कई दिनों तक वे हिम्मत नहीं कर पाई, लेकिन एक दिन उन्होंने अपने पिता से समाज सेवा की बात कही। जैसे ही परिवार में इसकी जानकारी मिली। सभी पांचों भाई बहनों ने उनकी बात का विरोध किया, लेकिन पिता और दादी ने उन्हें समाज सेवा से जुडऩे के लिए हामी भरी। और इस तरह समाज सेवा कार्यों से एक संत बनने का मार्ग प्रशस्त हुआ। प्रारंभिक शिक्षा के लिए स्कूल में उनका नाम पीवी मेरी रखा गया।
होस्टल में रहने के कारण उन्हें धर्मलाभ मिलता रहा। रानी मारिया मूलत: केरल की रहने वाली थी, उनका जन्म के रल के पुल्लुवजि नामक गांव में हुआ था। उनकी समाज सेवा के कारण ग्रामीणों ने गांव में इनके नाम पर एक संग्रहालय बनाया है।
Updated on:
05 Sept 2017 07:08 pm
Published on:
05 Sept 2017 05:03 pm
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