
वसंत सिखाता है नेचुरल मैनेजमेंट, पढ़ते ही हो जाएंगे स्ट्रेस फ्री
इंदौर. माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी यानी वसंत पंचमी। ऋतुओं के राजा वसंत का आगमन। वसंत में प्रकृति अपनी कला के कई आयाम दिखाती है, जिनमें कई संदेश भी छिपे रहते हैं। जैसे नई कोपल आने से सृजन का संदेश, सूखे पत्ते के झडऩे से नया करते रहने की सीख, गुनगुनी धूप के साथ हल्की सी ठंड से सामंजस्य बैठाने का संदेश और भी जाने कितनी चीजें सिखाती है प्रकृति। वसंत पंचमी के अवसर पर मैनेजमेंट गुरू डॉ. निशिकांत वायकर ने बताया कि कैसे वसंत का नेचर हमें मैनेजमेंट भी सिखाता है।
झूमे-झूमे म्हारो मालवो
छाई बसंती बयार झूमे-झूमे म्हारो मालवो
म्हारा मालवा को कई केणों, यो तो है दुनिया को गेणों
इका रग-रग में बसयो है दुलार, झूमे-झूमे म्हारो मालवो।
छाई बसंती बयार ......
मालव माटी गेर गंभीर, डग-डग रोटी पग पग नीर
यां की धरती करे नित नवो सिंगार, झूमे-झूमे म्हारो मालवो
छाई बसंती बयार ......
यां की नारी रंग रंगीली, यां की बोली भोत रसीली
इका कण-कण में घुलयो सत्कार, झूमे-झूमे म्हारो मालवो
छाई बसंती बयार ......
नर्बदा मैया भोत रसीली, सिप्रा मैया लगे छबीली
चंबल रानी करे रे किलोल, झूमे-झूमे म्हारो मालवो
छाई बसंती बयार ......
मालवा को रंग सबके भावे, जो आवे यां को हुई जावे
पुण्यारी धरती करे रे पुकार, झूमे-झूमे म्हारो मालवो
छाई बसंती बयार ......
मिली-जुली ने तेवर मनावे, जो आवे उखे गले लगावे
यां तो अन्न धन का अखूट भंडार, झूमे-झूमे म्हारो मालवो
छाई बसंती बयार ......
- सुषमा दुबे, इंदौर
हेल्थ एंड साइंस : हेल्थ के लिए वसंत का मौसम सबसे अच्छा है। इसमें फल, सब्जियां और खाने-पीने की अधिकतर चीजें अनुकूल ही मिलती हैं, जो हमारी सेहत बनाए रखने के अनुरूप होती हैं। ये प्रकृति के हेल्थ मैनेजमेंट का बढिय़ा उदाहरण है। पहले जो चीजें इलेक्ट्रिसिटी से चलती थीं, आज वे ही सोलर एनर्जी से चलती हैं। इनमें फूड प्रोसेसिंग इक्विपमेंट्स, कार, मोबाइल आदि चीजें हैं जो नेचर पॉवर के उपयोग से चल रही हैं।
हेल्थ एंड साइंस : हेल्थ के लिए वसंत का मौसम सबसे अच्छा है। इसमें फल, सब्जियां और खाने-पीने की अधिकतर चीजें अनुकूल ही मिलती हैं, जो हमारी सेहत बनाए रखने के अनुरूप होती हैं। ये प्रकृति के हेल्थ मैनेजमेंट का बढिय़ा उदाहरण है। पहले जो चीजें इलेक्ट्रिसिटी से चलती थीं, आज वे ही सोलर एनर्जी से चलती हैं। इनमें फूड प्रोसेसिंग इक्विपमेंट्स, कार, मोबाइल आदि चीजें हैं जो नेचर पॉवर के उपयोग से चल रही हैं।
डिसिप्लिन एंड टाइमिंग : सक्सेस के लिए डिसिप्लिन जरूरी है। डिसिप्लिन के लिए प्रकृति सबसे अच्छी टीचर है। रोज सूरज निकलता और डूबता है। हर मौसम अपने समय पर चलता है। इसी तरह टाइम की कीमत भी प्रकृति से समझी जा सकती है। इनमें जब अपवाद होता है, वह नेचर की ही सीख का एक हिस्सा रहता है।
कला और उमंग : आर्ट मैनेजमेंट के लिए भी प्रकृति ही बेस्ट टीचर है। वह हर चीज में अद्भुत रंगों का संयोजन करती है। इंद्रधनुष में एक साथ सात रंग मिलते हैं, तो फूलों के रंग भी सुकून भरे होते हैं। प्रकृति कई बार ऐसे दृश्य रचती है, जो तनाव दूर करते हैं। तारों को देखना, सुबह के समय नदी या समुद्र का किनारा स्ट्रेस रिलीज करता है।
आज बसंती रंग हुआ है
आज बसंती रंग हुआ है
मेरा, मेरे अरमानों का
मलय पवन में आज गंध है
मेरी उत्पीड़ा सांसों की
ध्वंस करेगी एक आस लौ
शत-शत होली उपहासों की
आज कोष संचित है,
लुटने मेरा मेरी मुस्कानों का
आज बसंती रंग हुआ है
मेरा, मेरे अरमानों का
ओ नदियां की चंचल लहरों
दूर नहीं साजन का घर है
बढ़ जाने क्यों अनजाने में
मेरे व्याकुल आज डगर है
राही ढहता खंडहर देखो
मंजिल के कुछ उलहानों का
आज बसंती रंग हुआ है
मेरा, मेरे अरमानों का
आज एक अरमान यही है
धरती के श्मशान बुझा दें
पगडंडी पर भटकी राधा
श्याम सलोना उसे मिला दें
लांछित है जीवन ये सारा
बाग लगा दंू वरादानों का
आज बसंती रंग हुआ है
मेरा, मेरे अरमानों का।
-नरहरि पटेल
गुनगुनी सी धूप है, कुनमुनी सी ठंड है
गुनगुनी सी धूप है, कुनमुनी सी ठंड है,
चारों ओर पीत रंग, आई ऋतु बसंत है।
जौ-गेहूं की बाली और सरसों के फूल,
अमवा की बौर और कोयल की कूक।
बेलों में फूल नए, हरियाली से सघन वन,
नील स्वच्छ है गगन, बह रही है पवन मंद।
धरती पर स्वर्ग, रति काम उत्सव आरंभ है,
पतझड़ का हुआ अंत, आई ऋतु बसंत है।
टेसू फूले लाल रंग, महुआ की भीनी सुगंध,
तितली और भंवरे कर रहे चहुंओर गुनगुन।
धवल धूप छिटक रही, मौसम का है यौवन,
उल्लासित है मन, नई उमंग नई तरंग।
प्रीत लागी अंग-अंग, पांव थिरके सजन संग,
उड़ रहा गुलाल रंग, आई ऋतु बसंत है।
सरस्वती पूजन से समग्र जीवन हो पावन,
फूलों से मंदिर सजे मथुरा और वृंदावन।
लहलहाती फसल देख हंस उठा किसान,
पुलकित प्रसन्न मन, है शीत का अवसान।
सूरज जाए राशि कुंभ, विहंग उड़ रहे स्वच्छंद है,
मौसम सुखमय अत्यंत, फिर आई ऋतु
बसंत है।
गुनगुनी सी धूप है, कुनमुनी सी ठंड है।
- अंजली तिवारी (काव्यांजलि) बसंत
Published on:
10 Feb 2019 02:15 pm
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