
Election 2019 : विधानसभा चुनाव हारने के बाद जीत का रिकॉर्ड बनाती गई सुमित्रा महाजन
इंदौर. लोकसभा स्पीकर और आठ बार की सांसद सुमित्रा महाजन ने इस बार चुनाव लडऩे से इंकार कर दिया है। एक पत्र जारी कर उन्होंने इसकी घोषणा की है। सुमित्रा महाजन की गिनती भाजपा के वरिष्ठ नेताओं में होती है। सुमित्रा महाजन हालांकि एक बार विधानसभा चुनाव हार गई थी, लेकिन उसके बाद उन्होंने जीत के रिकॉर्ड बना दिए।
12 अप्रैल 1943 को महाराष्ट्र के चिपलुन में जन्मी सुमित्रा महाजन के पिता संघ के प्रचारक थे। 22 साल की उम्र में इंदौर में एडवोकेट रहे स्व. जयंत महाजन से उनका विवाह हुआ। सुमित्रा महाजन भी खुद एडवोकेट हैं। उनका राजनीतिक जीवन 1980 के दशक में शुरू हुआ। इस दौरान वे इंदौर की उपमहापौर बनीं। इसके बाद भाजपा ने उन्हें इंदौर-3 से विधानसभा का टिकट दिया, लेकिन कांग्रेस के महेश जोशी के सामने उन्हें हार का सामना करना पड़ा। राजनीतिक जीवन में ये उनकी एकमात्र हार थी। 1989 में उन्होंने पूर्व मंत्री प्रकाशचंद्र सेठी के खिलाफ लोकसभा चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। इसके बाद जीत का सिलसिला शुरू हो गया। ताई के नाम से मशहूर सुमित्रा महाजन अपने शिष्ट और सौम्य व्यवहार के जिलए जानी जाती हैं। वे देश की एकमात्र महिला सांसद है जो एक ही लोकसभा क्षेत्र से, एक ही पार्टी से लगातार आठ लोकसभा चुनाव जीत चुकी है।
पार्टी को निर्णय लेने में हो आसानी
चुनाव न लडऩे की घोषणा के बाद मीडिया से चर्चा में ताई ने कहा कि पार्टी को निर्णय लेने में आसानी हो इसलिए मैंने इंकार कर दिया। पार्टी को टिकट की घोषणा करने में देरी हो रही थी और मुझे लगा कि यह अच्छा नहीं है। जितनी देर होगी उतना कम समय प्रचार के लिए मिलेगा। इसलिए मैंने खुद ही मना कर दिया। अब पार्टी स्वतंत है वो जिसे चाहे उम्मीदवार बनाए। अगर पार्टी अब भी टिकिट देगी तो उस वक्त सोचूंगी। शहर की चाबी अब किसे सौंपेंगी इस सवाल पर महाजन ने कहा कि जो भी भाजपा का प्रत्याशी होगा उसे चाबी मिलेगी, अब प्रत्याशी कौन होगा इसका निर्णय चुनाव समिति को लेना है।
Published on:
05 Apr 2019 05:48 pm
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