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टंट्या मामा स्मारक : पातालपानी की वन भूमि बाले-बाले हो गई निजी

जनशक्ति आदिवासी युवा संगठन ने की शिकायत

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टंट्या मामा के स्मारक स्थल पातालपानी की वन भूमि बाले-बाले हो गई निजी

टंट्या मामा के स्मारक स्थल पातालपानी की वन भूमि बाले-बाले हो गई निजी

इंदौर। अंग्रेजों को छक्के छुड़वाने वाले टंट्या मामा के समाधि (गाता) स्थल को सरकार पर्यटन का केंद्र बनाने जा रही है। इसको लेकर काम शुरू भी हो गया है। इस बीच जनशक्ति आदिवासी युवा संगठन की ओर से एक गंभीर शिकायत की गई है। जिसमें कहा गया है कि समाधि स्थल के आसपास की करीब १०० एकड़ वन भूमि निजी व्यक्ति के नाम पर कर दी गई है जिसकी अब जांच की जा रही है।

महू और कालाकुंड के बीच में प्राकृतिक सौंदर्य से लबरेज पातालपानी वॉटर फॉल है जिसके बाद बने रेलवे स्टेशन के किनारे आजादी की लड़ाई में अंग्रेजों से लोहा लेने वाले आदीवासी नायक टंट्या मामा का समाधि स्थल बना हुआ है। आदिवासी समाज उसे गाता स्थल कहता है जिस पर मंदिर बना हुआ है। टंट्या मामा स्थल को आस्था और पर्यटन का केंद्र बनाने की मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने घोषणा की थी जिसके बाद प्रतिमा भी लगाई गई। उसके आसपास अब विकास भी किया जाने वाला है।

दो माह पहले एक बड़ा आयोजन भी हुआ था। तेजी से जगह का महत्व बढ़ता जा रहा है। इसके चलते जनशक्ति आदिवासी युवा संगठन ने मुख्यमंत्री हेल्प लाइन में जनजातीय कार्य विभाग व वनाधिकार अधिनियम आदिम जाति विभाग को एक गंभीर शिकायत की है। कहना है कि पातालपानी गाता स्थल पर एक बिल्डर को १०० एकड़ वन
भूमि हस्तांतरित की गई है। जहां पर एक आलीशान हवेली बना दी गई है।

पूरे क्षेत्र में टंट्या भील के वंशजों को एक इंच जमीन भी नसीब नहीं है। साथ में कहा गया है कि महू में आदिवासियों की हजारों एकड़ जमीन गैर आदिवासियों को स्थानांतरित कर दी गई है। इसकी जांच की जाना चाहिए और सारी जमीन आदिवासियों के नाम पर की जानी चाहिए। गौरतलब है कि गंभीर शिकायत के बाद में संगठन पूरे मामले में सरकारी तंत्र को घेरने के मूड में है।

जांच के लिए कलेक्टर को पत्र

गंभीर शिकायत के बाद में संचालनालय आदिम जाति क्षेत्रीय विकास योजनाएं विभाग के अपर संचालक ने कलेक्टर को एक पत्र लिखा है। उसमें शिकायत का हवाला देकर मामले की जांच कर निराकरण
करने का आग्रह किया है। जांच जल्द से जल्द की जाए ताकि प्रकरण समाप्त किया जा सके।

शिकायत की है
हां, हमने शिकायत की है। वन विभाग ने 100 एकड़ जमीन एक बिल्डर को हस्तांतरित की है। हमारा कहना है कि मामले की जांच की जाए। हमारी शिकायत जनजाति व वन विभाग के बीच में झूल रही है। दोनों कोई जवाब नहीं
दे रहे हैं।

रवि राज, प्रधान महासचिव मध्यप्रदेश
जनशक्ति आदिवासी युवा संगठन