
लोकसभा चुनाव : बदल गए सरकार चलाने के तौर तरीके, अब ऐसा हो हमारा उम्मीदवार
इंदौर. लोकसभा चुनावों की घोषणा के साथ ही शहर के लोगों में चुनावी चर्चा का माहौल बनने लगा है। संसद के लिए अपने क्षेत्र से उम्मीदवार चुनकर भेजना है। हाल ही में पुलवामा की घटना के बाद से देश में एक अलग माहौल बना हुआ है।
आरक्षण व राम मंदिर के मुद्दे पहले से जनता के बीच हैं। 2014 से काबिज भाजपा की सरकार के काम सामने हैं।
इन सभी के साथ हमारा उम्मीदवार कैसा हो? पार्टियां मतदाता को आकर्षित करने के लिए कौन से मुद्दे ला सकती हैं? जैसे सवालों के जवाब तलाशने के लिए पत्रिका ने संडे पॉलिटिकल क्लब के माध्यम से लोगों के मन को टटोला तो अनेक बातें सामने आईं। लोगों ने उम्मीदवार की विशेषताओं पर प्रकाश डाला और स्थानीय विकास की कमियों पर ध्यान आकर्षित किया। रविवार को पत्रिका कार्यालय में आयोजित चर्चा में लोगों का कहना था, दुनिया बदल रही है। सरकार चलाने के तौर-तरीके बदल गए हैं। एेसे में हमारा उम्मीदवार स्थानीय मुद्दों के साथ ही देश-दुनिया के विकास से भी शहर को जोड़े और समन्वय करके ईमानदारी से काम करे। हमारे शहर में भी अभी अनेक काम जो जनप्रतिनिधि कर सकते थे, लेकिन नहीं हो सके। मुकेश यादव, मुकेश वर्मा, राजेंद्र दुबे, महेश वर्मा ने कमियां बताईं। शहर का पर्यावरण, कनेक्टिविटी सुविधाएं नहीं हैं, इन पर चुनाव होना चाहिए।
किसने क्या कहा
-सामाजिक कार्यकर्ता शिवाजी मोहिते ने कहा, इंदौर में लोग खुद विकास करने में विश्वास रखते हैं। जनप्रतिनिधि एेसा हो जो सही दिशा में मार्गदर्शन कर सके।
-अभिभाषक संजय मेहरा का कहना है, जजों के 150 पद मंजूर हैं, न्यायालय भवन के अभाव में ७५ ही काम कर रहे हैं। इन कामों पर सोचने वाला प्रतिनिधि हो।
-शशांक गोहिल ने कहा, उम्मीदवार समस्या के समाधान व सुविधाओं की उपयोगिता जानने वाला हो।
-जयप्रकाश गुगरी के मुताबिक, पत्रिका की स्वच्छ राजनीति के लिए पहल अच्छी है। सभी मसलों को समझने वाला उम्मीदवार हो। दीपेश शर्मा ने कहा, प्रत्याशी समाज के मुद्दे उठाने वाला हो। शिक्षा का सही मॉडल बनवाए, ताकि सस्ती व अच्छी शिक्षा मिले।
-अभिभाषक अभय जैन का कहना है, स्थानीय के साथ राष्ट्रहित के मुद्दों पर भी जो बात कर सके एेसे उम्मीदवार लाना चाहिए।
-सामाजिक कार्यकर्ता राजबीरसिंह होरा ने कहा, उम्मीदवार में नेतृत्व क्षमता, समस्या हल करवाने की समझ हो।
-प्रोफेशनल संदीप शुक्ला ने कहा, उम्मीदवार सरल भाषा में बात व सुलझे विचारों से काम करे।
-सामाजिक कार्यकर्ता सचिन जैन के अनुसार, जनता के मुद्दे संसद में दमदारी से रख सके।
Updated on:
11 Mar 2019 11:40 am
Published on:
11 Mar 2019 11:08 am
