
cantboard office
डाॅ. आंबेडकरनगर महू. छावनी परिषद में आठों पार्षदों के छह साल के कार्यकाल का बुधवार को अंतिम दिन रहा। वार्ड में उनके प्रतिनिधित्व में क्या मिला व क्या अधूरा रह गया, इस पर अब चर्चाएं शुरू होंगी। उधर, पार्षदों के कैंटबोर्ड से खट्टे-मिट्ठे अनुभव रहे। अपने कार्यकाल को लेकर एक पार्षद ने कहा कैंटबोर्ड के अफसरों की मनमानी चली तो कोई बोला वार्ड के महत्वपूर्ण काम अधूरे रहे गए। पक्षपातपूर्ण रवैये के भी आरोप लगे। एक पार्षद ने तो कैंटबोर्ड पर जिम्मेदारी डालने के बजाए कहा मैं अपने ही काम से संतुष्ट नहीं हूं,। एक-दो पार्षद अंतिम दिन यानी गुरूवार को भी अपने वार्ड में विभिन्न कार्यों के भूमि पूजन में व्यस्त रहे। खास बात है कि गुरूवार से कैंटबोर्ड में वेरिड बोर्ड होगा, जिसमें कैंटबोर्ड अध्यक्ष यानी स्टेशन कमांडर व सीइओ सदस्य रहेंगे व अशासकीय सदस्य की नियुक्ति रक्षा मंत्रालय से बाद में होगी।
कहीं कैंटबोर्ड प्रबंधन से नाराजगी तो कहीं खुद से हीः ये कहा पूर्व पार्षदों
वार्ड क्रमांक 1ः मेरे वार्ड में एक से डेढ़ करोड़ के काम हुए। इस बोर्ड में नवीन अस्पताल बनकर तैयार हुआ व चालू भी हो गया। लेकिन कुछ बड़े प्रोजेक्ट रहे, जिन पर काम शुरू नहीं हो पाया। छह साल के कार्यकाल का अच्छा अनुभव रहा। सिविल एरिया का विस्तार के लिए मैंने आखिरी दिन यानी गुरूवार को डीइओ से चर्चा की ताकि इसकी फाइल आगे बढ़े व बड़ी आबादी को लाभ मिले।-कांता सोढानी
-वार्ड क्रमांक 2ः शहरभर में मवेशियों के कारण हो रही परेशानी को लेकर कई बार बोर्ड में आवाज उठाई लेकिन इंदौर की तर्ज पर यहां काम नहीं हुआ। सिविल एरिया का विस्तार शहर का सबसे महत्वपूर्ण विषय था, हमारे प्रयास व मंशा थी कि उसका निराकरण हमारे कार्यकाल में हो लेकिन नहीं हुआ, इसकी मन में टीस रहेगी बाकि वार्ड में काम तो बहुत हुए।-जितेंद्र शर्मा,
-वार्ड क्रमांक 3ः वार्ड में जनभागीदारी से तो बहुत काम हुए लेकिन कैंटबोर्ड से मैं काम करवा नहीं पाया। मैं अपने ही काम से संतुष्ट नहीं हुूं। वार्ड में नर्मदा की लाइन का काम 2010 से पेंडिंग था और यह काम मैं पूरा नहीं करवा पाया। ये काम सबसे महत्वपूर्ण था जो मौजूदा कार्यकाल में नहीं हुआ। इसका मुझे दुःख रहेगा।-बंटी खंडेलवाल
-वार्ड क्रमांक 4ः पांच साल वाइस प्रेसीडेंट रही तो सारे काम बेहतर हुए। लेकिन एक साल का जो कार्यकाल बढ़ा, उसमें कैंटबोर्ड अफसरों व इंजीनियरों की मनमानी चली। जिससे काफी कार्य अवरूद्ध हुए। 12 माह का समय बहुत था, जिसमें काफी काम हो सकते थे और कैंटबोर्ड के पास बजट भी पर्याप्त था लेकिन काम करने के बजाए अफसरों ने मानमानी की।-रचना विजयवर्गीय
-वार्ड क्रमांक 5ः रूटीन के काम तो सभी वार्डों में बहुत अच्छे तरीके से हुए। लेकिन शहर को किसी बड़ प्रोजेक्ट की सौगात नहीं मिल पाई। कहीं हमारी इच्छा शक्ति ही कमजोर रही होगी इसलिए सिविल एरिया के विस्तार, अंडरग्राउंड सीवरेज प्रोजेक्ट व नवीन पेयजल लाइन बिछाने के प्रोजेक्ट पर कुछ नहीं हो पाया।-मुजीब कुरैशी
-वार्ड क्रमांक 6ः उपाध्यक्ष बनने के बाद वार्डों में पेयजल की समस्या दूर करने के काफी काम हुआ, लगभग पूरे शहर में सड़कों पर डामरीकरण हुआ व पैबर्स ब्लाॅक्स लगे। सिविल एरिया के विस्तार व टाउन हाॅल फिर से आबाद करने की प्रक्रिया प्रोसेस में तो आई लेकिन मंशा अनुसार उस पर प्रगति नहीं हो पाई। अरूणदत्त पांडे, वार्ड क्रमांक
-वार्ड क्रमांक 7ः वार्ड में हुए कामों की सूची बहुत लंबी है। अभी भी काफी काम स्वीकृत हैं, जिसे लेकर कैंटबोर्ड सीइओ ने कहा है कि हमारा कार्यकाल खत्म होने के बाद भी उन्हें पूरा किया जाएगा। वार्ड में नर्मदा का मीठा पानी लाने के लिए बहुत संघर्ष किया और यह काम स्वीकृत हो चुका है जो भविष्य में पूरा होगा-अशोक वर्मा
-वार्ड क्रमांक 8ः कार्यकाल बहुत सकारात्मक नहीं रहा। सत्ता के दबाव में अधिकारियों व कर्मचारियों का पक्षपातपूर्ण रवैया भी रहा। नवीन अस्पताल हमारे कार्यकाल में चालू तो हुआ लेकिन जिस स्वरूप में हम उसे चलाना चाहते थे ताकि शहरवासियों को रियायती दर पर बेहतर व तमाम चिकित्सा सुविधा मिले, वैसा हो नहीं पाया। गरीब व मध्यम तबके के लिए शादी मंडपम् प्रोजेक्ट पर भी सार्थक पहल नहीं हो पाई।-कैलाश पांडे, वार्ड क्रमांक आठ
Published on:
10 Feb 2021 09:16 pm
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