
टोटके ने पकड़ा तूल: जिस पर आरोप, उसने कहा-गलत तरीके से भुगतान का था दबाव
इंदौर. निगमायुक्त हर्षिका सिंह की कार के सामने नीबू काटकर फेंकने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। जिस निगमकर्मी पर टोटका करने का आरोप है, अब उन्होंने पत्र लिखकर मामले की जांच की मांग करते हुए आरोप लगाया है कि उन पर गलत तरीके से पेमेंट भुगतान का दबाव बनाया जा रहा था। जिस भिक्षुक केंद्र पर गंभीर आरोपों में जांच चल रही है, उसकी जांच समिति ने 28 बिंदुओं पर सात माह में भी रिपोर्ट नहीं दी है। मालूम हो, निगमायुक्त की गाड़ी के सामने नीबू काटकर फेंकने के मामले में 6 गार्ड और ड्राइवर के पुलिस को दिए संयुक्त आवेदन में आरोप लगाया गया था कि यह काम निगमकर्मी निखिल कुल्मी ने किया है। इसके बाद निगमायुक्त ने निखिल को कंट्रोल रूम अटैच कर दिया।नीबू कांड को लेकर निखिल ने नगरीय प्रशासन के प्रमुख सचिव को पत्र लिखा है। पत्र में निखिल ने आरोप लगाया कि अपर आयुक्त अभय राजनगांवकर ने भिक्षुक मामले के भुगतान के लिए मुझ पर दबाव बनाया। मैंने उन्हें बता दिया था कि इसमें केंद्र, राज्य, जनप्रतिनिधियों की शिकायतों की जांच हो रही है। इसके अलावा अन्य छोटे प्रोजेक्ट के भुगतान के लिए दबाव बनाया जाता रहा। अन्य प्रोजेक्ट में वित्तीय अनियमितताओं का उल्लेख अफसरों के समक्ष किया था, इसलिए मुझे प्रताड़ित किया गया। दबाव बनाकर भुगतान करने के जानकारी एमआइसी सदस्य मनीष शर्मा को दी थी।
पिटाई की, मोबाइल छीना
पत्र में निखिल ने जिक्र किया है कि मैं निगमायुक्त को ये बातें बताने गया था, लेकिन वहां संबंधित अफसर मौजूद होने से लौट गया। बाद में इन्होंने मुझे सिटी ऑफिस बुलाकर बंद कमरे में डराया-धमकाया और मेरा मोबाइल छीन लिया। मुझ पर जादू-टोने का आरोप लगाकर सुरक्षाकर्मियों ने पिटाई की और काफी देर तक नजरबंद रखा।
गठित की थी कमेटी
भिक्षुक केंद्र को लेकर एमआइसी सदस्यों की जांच कमेटी बनाई थी। इसमें मनीष शर्मा अध्यक्ष तो अश्विनी शुक्ल और राजेश उदावत सदस्य थे। मार्च में कमेटी से जानकारी मांगी थी, लेकिन जानकारी नहीं मिली। इसका भुगतान करने के लिए निखिल ने नोटशीट पर इस समिति की जानकारी अंकित कर दी थी। पहले वे महापौर के ओएसडी थे। आचार संहिता के चलते जैसे ही मूल विभाग में भेजा गया तो अफसरों पर प्रताड़ित करने का आरोप लगाया।
पुलिस ने कराया मेडिकल
सूत्रों के अनुसार, निखिल के साथ मारपीट और लगभग छह घंटे तक बंधक बनाने की जानकारी निगमायुक्त को नहीं थी। इस दौरान परिवार निखिल को तलाशता रहा। अंत में उन्हें पुलिस के हवाले किया। पुलिस भी रात 9 बजकर 21 मिनट पर एमवाय हॉस्पिटल लेकर पहुंची और मेडिकल करवाकर छोड़ दिया। पुलिस ने एमवाय हॉस्पिटल में जो मेडिकल करवाया, उस पर 16 तारीख अंकित है। वहीं, गार्ड और ड्राइवर की ओर से दिया आवेदन संयोगितागंज थाना पुलिस ने 17 तारीख में प्राप्त किया है।
भुगतान के दबाव की जानकारी थी
निखिल ने मुझे जानकारी दी थी कि नियम विरुद्ध भुगतान का दबाव बनाया जा रहा है। मैं बाहर था और मैंने आकर बात करने को कहा था, इसी बीच यह घटना हुई। भिक्षुक केंद्र से संबंधित जांच समिति का मैं अध्यक्ष हूं। अफसरों ने जानकारी उपलब्ध नहीं करवाई। कई शिकायतों का निपटारा भी कर दिया। इस मामले की फिर जानकारी मैंने मांगी है।
मनीष शर्मा, एमआइसी सदस्य
किसी ने मारपीट नहीं की
हम लोगों ने मारपीट नहीं की। हमने तत्काल पुलिस को सूचना दी थी। उसके आगे कुछ पता नहीं। निगमायुक्त ही इस प्रकरण को देख रही हैं।
अभय राजनगांवकर, अपर आयुक्त
मेरा स्वास्थ्य ठीक नहींमैं उच्च शिक्षित हूं और तंत्र क्रिया में भरोसा नहीं करता। मैंने कुछ नहीं किया, इससे अधिक कुछ नहीं बता सकता। मेरा स्वास्थ्य ठीक नहीं है।
निखिल कुल्मी, निगमकर्मी
चोरी की करवा दी रिपोर्टमैं भिक्षुक केंद्र में प्रोजेक्ट मैनेजर था। ऐसे भिक्षुक के दस्तावेजों पर साइन करवाए जाते थे, जो वहां नहीं थे। कुछ माह से पेमेंट नहीं मिला तो मैंने नौकरी छोड़ दी। इसके एक माह बाद मेरे सहित अन्य कुछ लोगों पर चोरी का प्रकरण दर्ज करवा दिया गया। आरोप था कि हम लोगों ने भिक्षुकों का डाटा सहित अन्य सामान चोरी किया है।
रोहित हिरवे, भिक्षुक केंद्र के तत्कालीन प्रोजेक्ट मैनेजर
Published on:
20 Oct 2023 05:57 pm
बड़ी खबरें
View Allइंदौर
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
