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मराठी नाटक‘यादों की बारात’ ने दिखाया रंगमंच का रोमांच

शुरुआत शानदार, क्लाइमेक्स रोचक, शनिवार को सानंद न्यास द्वारा मराठी नाटक ‘यादों की बारात’ का मंचन किया

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इंदौर

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Amit Mandloi

Mar 11, 2018

Theatrical thriller shown by Marathi drama 'Bandh Ki Bandat'

इंदौर.शनिवार को सानंद न्यास की ओर से मराठी नाटक ‘यादों की बारात’ का मंचन किया। नाटक को निखिल रत्नपारखी ने लिखा है। दिग्दर्शन भी उन्हीं का है। यही नहीं नाटक में केंद्रीय भूमिका भी निखिल ने ही निभाई है। उनकी आकूत प्रतिभा के दर्शन नाटक के माध्यम से होते हैं। दरअसल, परिस्थितिजन्य हास्य, यानी सिचुएशनल कॉमेडी, प्रतियुत्पन्न मति, अप्रत्याशित घटनाक्रम और शरीर की भंगिमाओं से हंसाने को फार्सिकल कॉमेडी कहते हैं।

निखिल और भक्ति के अलावा संकर्षण कर्हाडे, तारका पेडणेकर, तुषार गवारे, विनायक कदम ने भी अभिनय किया है।

कहानी- घनश्याम गायकेवारी यानी निखिल रत्नपारखे की पत्नी एक माह से लापता है। उसे घर में न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. बैरंग का विजिटिंग कार्ड मिलता है। उस आधार पर वह उनके क्लिनिक पहुंचकर धमकी देता है कि उसकी पत्नी का पता बताएं अन्यथा पुलिस थाने में शिकायत दर्ज होगी। डॉ. बैरंग उसे अपनी नई खोज एक मशीन के बारे में बताते हैं, जिसके जरिए कोई भी व्यक्ति अतीत की अपनी दु:खद और पीड़ा दायी घटनाओं का स्मृति पटल से मिटा सकता है। घनश्याम समझ जाता है कि उसकी पत्नी ने भी इसी तरह अपनी खराब यादों को मिटाया होगा। डॉक्टर उससे भी कहता है कि तुम भी कुछ सावधानियों के साथ ऐसा कर सकते हो। निखिल जब अतीत में जाता है, तो उसे अपनी पत्नी मेघा के साथ बिताए पल दिखते हैं। इनमें कुछ मीठे होते हैं तो कुछ खट्टे या कड़वे। इस दौरान घनश्याम डॉक्टर की बताई सावधानियों पर ध्यान नहीं देता और कोमा में चला जाता है। क्लाईमेक्स बेहद रोचक है। पूरे समय मंच पर निखिल और उनकी पत्नी मेघा नोंक-झोंक करते रहते हैं। उनके संवादों और प्रहसनों से उत्पन्न हास्य की फुलझडिय़ां दर्शकों को हंसा हंसाकर लोटपोट कर देती है। निखिल और भक्ति के अलावा संकर्षण कर्हाडे, तारका पेडणेकर, तुषार गवारे, विनायक कदम ने भी जबर्दस्त अभिनय किया है। रत्नपारखे दम्पती के अलावा सभी कलाकारों ने दो या तीन भूमिकाएं अभिनीत की हैं। लेखक, निर्देशक और अभिनेता निखिल रत्नपारखे के अलावा नैपथ्य विशारद कहे जाने वाले प्रदीप मुले ने भी कमाल किया है। पाश्र्व संगीत गंधार संगोराम ने दिया है, जो प्रभाव छोडऩे में सफल है।

आज भी मुजूमदार समूह की प्रस्तुति
11 मार्च को नाटक यादों की बारात का मंचन प्रात: 10 बजे मामा मुजूमदार समूह के लिए दोपहर 4 बजे वसंत समूह के लिए एवं सायं 7.30 बजे बाहर समूह के लिए मंचन होगा।