
अजब-गजब : इंसानी भाषा के 250 शब्द बोल सकते हैं ये तोते, कीमत 50 से 65 हजार
इंदौर. शहर में एग्जोटिक बर्ड का मार्केट पिछले पांच सालों में 40 प्रतिशत बढ़ा है। सर्फ टेम्पड एग्जोटिक बड्र्स को ही पाला जा सकता है। टेम्पड बर्ड वे होते हैं जिनको बचपन से हाथ से खाना खिलाया जाता हो और जो ह्यूमन फ्रेंडली हों। अगर आप किसी एग्जोटिक टेम्पड बर्ड का रखरखाव नहीं कर पाने के कारण आजाद कर देते हैं तो ये भी उनकी हत्या के समान है, क्योंकि एग्जोटिक बर्ड को दाना-पानी नहीं मिल पाएगा। ये बात बर्ड कीपिंग, फर एंड फेदर होम और एक्जोटिक कंसर्वेशन एंड वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट के तहत इंदौर प्राणी संग्रहालय में आयोजित एक वर्कशॉप में एक्सपर्ट मुफद्दल अमझेरावाला ने कही। उन्होंने बताया कि अगर आप रखरखाव नहीं कर पा रहे हैं तो उड़ाने के बजाय एआरपीएफ को डोनेट कर दें। इंदौर में पांच एग्जोटिक बर्ड ज्यादा खरीदे जाते हैं।
अमेजन ऑरेंज विंग पैरेट : ये ग्रे पैरेट से भी ज्यादा जल्दी बोलना सीखता है और साफ बोलता है। ये 250 से ज्यादा शब्दों को सीख सकता है। इसकी कीमत 55 से 65 हजार है।
अफ्रीकन ग्रे पैरेट : यह बर्ड मानव भाषा के 200 शब्द पकडऩे की क्षमता रखता है और इंसानों की भाषा बोलता है। इसकी मार्केट में 45 से 50 हजार कीमत है।
ब्ल्यू एंड गोल्ड मकाऊ : ये दिखने में खूबसूरत और साइज में बड़ा होता है। ये एक स्लो लर्नर है। कोई भी भाषा सीखने में काफी समय लगाता है। इसकी कीमत 1.25 लाख से शुरू होती है।
पाइनेपल कनूर : ये भूूरा रंग का होता है। छाती पर लाल पैच होता है और पूंछ महरून रंग की होती है। इसकी कीमत १० हजार रुपए होती है।
सनकनूर पैरेट : यह दिखने में सुंदर होता है। हरे रंग के पक्षी के ऊपर पीले रंग के छींटे होते हैं। इसकी कीमत २ हजार रुपए होती है।
100 करोड़ से ज्यादा का काला बाजार
एआरपीएफ के निहार परुलेकर ने महंगे विदेशी पक्षियों को रखने के नियमों की जानकारी दी। उन्होंने बताया, जब भी आप एग्जोटिक बर्ड लें तो उसके पैरों में डाली रिंग पर ध्यान दें। भारत में ही ब्रीड किए गए पक्षियों के पैरों में क्लोज रिंग होती है, जो उस पक्षी के पैदा होने के एक सप्ताह के अंदर ही ब्रीडर उसे पहना देता है। इस रिंग में ब्रीडर से संबंधित जानकारियां होती हैं। देश में तीन तरह के लोग विदेशी पक्षी पाल रहे हैं। पहले ब्रीडर, दूसरे शौकिया और तीसरे हैं स्टेटस सिम्बल के तौर पर पालने वाले। इन तीसरे प्रकार के लोगों के कारण ही भारत में विदेशी पक्षियों का काला बाजार 100 करोड़ रुपए से ज्यादा तक जा पहुंचा है।
बर्ड एक्सपर्ट नंदकिशोर रेड्डी ने सामान्य पक्षी पालकों को यह सुझाव दिए
- पक्षी का पिंजरा उसकी कुल ऊंचाई और लंबाई से तीन गुना बड़ा होना चाहिए, ताकि खुलकर उड़ सके।
- पक्षी को पैक्ड फूडजरूर दें, जिससे उसकी विटामिन और मिनरल्स की कमी दूर होगी। एग्जोटिक बर्ड सिर्फ फल और सब्जियों पर जीवित नहीं रह सकते हैं।
- पक्षियों को अगर जोड़े से नहीं रख सकते हैं, तो खुद उसका जोड़ीदार बनने के लिए तैयार रहें। उसे पर्याप्त समय दें।
पक्षियों को उनके भौगोलिक क्षेत्र के अनुसार साथ में रखा जा सकता है, जिससे उन्हें साथी मिल पाए, परंतु भिन्न भौगोलिक क्षेत्र के पक्षी एक-दूसरे के साथ नहीं रहेंगे।
कभी भी एवाकोडो, प्याज, चॉकलेट, कॉफी और चाय नहीं देनी चाहिए।
साढ़े तीन लाख रुपए तक है कीमत
ग्रीन विंग मकाऊ : ये साउथ अमरीका, पेरूऔर अर्जेंटीना में पाया जाता है। टेम्पड मकाऊ की कीमत 3.5 लाख रुपए होती है। ये हेम्पसीड्स, सन फ्लॉवर और हर प्रकार के ड्राय फ्रूट्स खा सकता है। ये किसी भी भौगोलिक क्षेत्र में रह सकता है।
मूलन कोकाटो : ये इंडोनेशिया में पाया जाता है और सबसे बड़ा कोकाटो होता है। ये काफी ज्यादा फ्रेंडली होता है। इसक ी आवाज काफी तेज होती है। ये पैक्ड फूड के अलावा गेंदे, गुड़हल और गुलाब का फूल खाता है। इसकी कीमत 2.25 लाख होती है।
कनूर ग्रीन चिक : ये ब्लू, पाइनेपल, येलो कई तरह के होते हैं। ये साउथ अफ्रीका में पाए जाते हैं और वेजिटेबल खाते हैं।
Published on:
25 Feb 2019 03:14 pm
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