
Shwetambar Jain Dr Vasant Vijay discourse
इंदौर। जिसकी इच्छा खत्म हो जाती है, उसकी उन्नति भी खत्म हो जाती है। भगवान महावीर की इच्छा ने ही उन्हें भगवान बनाया। पर्सनालिटी डेवलपमेंट के कोर्स से समृद्धि नहीं आती। समृद्धि संतों से आती है।
शनिवार को उक्त विचार श्री कृष्णगिरी शक्ति पीठाधिपति यतिवर्य डॉ वसंत विजय महाराज ने अखिल भारतीय श्वेतांबर जैन महिला संघ ने रवींद्र नाट्य गृह में अभा श्वेतांबर जैन महिला संघ केंद्रीय इकाइ के थॉट योगा विचार समृद्धि का पावर फुल वर्क शॉप में व्यक्त किए। बरसों की साधना और तपस्या से मिले अनुभवों को गुरुवर ने इंदौर ही नहीं वरन प्रदेश में पहली बार हो रहे इस थॉट योगा में बताया। वर्कशॉप की शुरुआत शीतल डागरिया द्वारा मंगलाचरण से हुई। उसके बाद मंच पर जयसिंह टीना जैन, ललित अनीता जैन, मोना कटारिया, वीरेंद्र जैन और महिला संघ की सभी पदाधिकारियों ने दीप प्रज्वलन किया। उन्होंने कहा कि हमेशा हमारा शरीर नहीं मन काम करता है। इसलिए हमेशा मन की शक्ति पर विश्वास करो। उन्होंने इसके कई उदाहरण भी दिए। उन्होंने बताया कि हमारे अंदर बर्निंग डिजायर होना चाहिए, यानी कि हमें तब तक नींद नहीं आनी चाहिए। जब तक हमारा काम ना हो और ऐसे लोग ही कामयाबी के रास्ते छूते हैं। उन्होंने जलालुद्दीन रूमी की एक बात भी यहां कही। उन्होंने लिखा है प्यासे ही कुएं को नहीं ढूंढ रहे, कुछ कुएं भी सही प्यासे को ढूंढ रहे होते हैं। उन्होंने आगे बताया कि हमारे शरीर के पांच और पांच तत्वों को खींचते है। उन्होंने इन पांचों तत्वों की ऊर्जा को अपने अंदर समेटने के लिए कई मुद्राएं भी बताई और उसका अभ्यास भी करवाया। उन्होंने लीवर तत्व और उसके काम को मां के गर्भ में पल रहे बच्चे से जोड़ा। उन्होंने यह भी बताया कि जो इस संसार में दूसरों के हित की कामना करेगा। वह विश्व में हित की बात पहुंचाएगा। कार्यक्रम में अखिल भारतीय श्वेतांबर जैन महिला संघ की अध्यक्ष विजया जैन, संस्थापक अध्यक्ष रेखा वीरेंद्र जैन, निर्वतमान अध्यक्ष ज्योति छाजेड़, सचिव अनिता जैन, सचिव कोमल बंबोरिया, कोषाध्यक्ष छाया देवरा, कार्याध्यक्ष कौशल्या जैन सहित बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित थे। सभी ने थॉट योग का लाभ लेकर और गुरुवर से आशीर्वाद लिया।
हर एक्टिविटी का पृथ्वी पर असर
उन्होंने कहा कि आपकी हर एक्टिविटी का पृथ्वी पर असर हो रहा हैं। इसीलिए यह जानना जरूरी है कि आप अपनी उर्जा का सही इस्तेमाल कहां करें। अगर आपने इस चुंबकीय ऊर्जा को खींचना और इसका इस्तेमाल करना जान लिया, तो जिंदगी जीना बेहतर हो जाएगा। अगर संत युवाओं को खुद से जोडऩा चाहते हैं, तो युवाओं की भाषा बोलना होगी ताकि वह आज के आधुनिक युग से बाहर आकर संतों की बात को सुनें। इसके लिए जरूरी होगा कि संत अपनी भाषा को कठिन से थोड़ा सरल बनाएं।
Published on:
23 Jun 2019 08:08 am
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