
इंदौर.
सभी तरह के कचरे के प्रबंधन का काम तेजी करेंगे। सभी तरह का कचरा जिसमें औद्योगिक, म्यूनिसिपल सॉलिड वेस्ट और घरेलू गंदे पानी का प्रबंधन इस तरह से करेंगे जिससे साफ जमीन, साफ पानी और साफ हवा जिससे ग्रीनहाउस गैसों को काम किया जा सके।
- सभी नगरीय निकाय अपने स्तर पर शहरों को साफ, सुरक्षित, स्मार्ट, स्थितिपरक, अत्याधुनिक संसाधनपूर्ण बनाएंगे ताकि थ्रीआर पॉलिसी को बढ़ावा दिया जा सके और अर्थव्यवस्था को भी जीरो वेस्ट सोसायटी की ओर ले जाया जा सके।
- इस तरह के शहरी विकास की प्लानिंग और प्रैक्टिस का पालन करेंगे जिससे ईको प्रोडक्ट, ग्रीन एनर्जी, रैनवाटर हार्वेस्टिंग, तालाबों के संरक्षण, कम्पोस्ट खाद से होने वाली खेती, एग्रिक्लचर वेस्ट का सुरक्षित निपटान, ग्रीन सिटी विकास, ग्रीन कंस्ट्रक्शन मटेरियल आदि वो सभी साधन जिनसे बायो डायवेरसिटी को बढ़ावा मिलता है।
- सभी लोगों को उनके कचरे का खुद निपटारा करने के लिए बढ़ावा देंगे। कचरे को जगह पर ही अलग-अलग करने, वहीं पर प्रोसेस करते हुए बायोडिग्रेडेबल कचरे में बदलेंगे। बाकी कचरे का सही तरह से निपटान करेंगे।
- इसमें शहरवासियों को, इंफारमल सेक्टर को विकेंद्रीकृत व्यवस्था के तहत कचरे के निपटान में शामिल करते हुए उनसे थ्रीआर पर काम करने के लिए कहेंगे। सभी को स्वास्थ्यगत और पर्यावरण पर होने वाले असर की जानकारी देते हुए उन्हें इससे बचने के लिए जोड़ा जाएगा।
- सभी प्लास्टिक के उपयोग को कम करने पर जोर देंगे।
- समुद्र और उसमें मौजूद जीवों के संरक्षण का ध्यान रखते हुए प्लास्टिक के कम से कम उपयोग पर ध्यान देंगे।
- गंदे पानी को ट्रिट कर उसे वापस इस्तेमाल करने का वादा करते हुए जलसुरक्षा, जलगुणवत्ता को बनाए रखेंगे। ताकि भविष्य में किसी भी हालत में पानी की क्वालिटी को लेकर दिक्कत न आए। थ्रीआर पॉलिसी के हिसाब से ही पानी को लेकर अपना इंफ्रास्ट्रक्चर विकसीत करेंगे।
- सभी इस पर फोकस करेंगे की भविष्य में माइक्रो प्लास्टिक, रासायनिक, खतरनाक कचरा, मेडिकल वेस्ट और ईवेस्ट का सही तरह से निपटारा हो।
- सभी कचरा प्रबंधन की तकनीकों को प्रमोट किया जाएगा। जिसमें सूचना और संवाद से जुड़ी तकनीकें भी शामिल होंगी।
- राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जो भी कचरा प्रबंधन की सबसे अच्छी तकनीक होगी उसका इस्तेमाल किया जाएगा।
२०३० के पहले इंदौर होगा सुरक्षित
किटाक्यूशू ने बदली अपनी पहचान
मेयर कांफ्रेस के दौरान जापान के शहर किटाक्यूशू में हुए बदलाव को लेकर जापान सरकार के पर्यावरण विभाग के डायरेक्टर टाकानारी अरीमा ने जानकारी दी। उन्होने जापानी शहर की पुरानी ओर वर्तमान स्थिति को प्रेजेंटेशन के जरिए सबके सामने रखते हुए कहा कि हमें अपने कचरे, पानी का ज्यादा से ज्यादा उपयोग करने के साथ ही कचरा प्रबंधन पर भी ध्यान देना होगा। यदि सभी शहर इस पर ध्यान देते हैं, तो वे भी एक साफ शहर बन सकते हैं। जिस तरह से 1900 सदी की शुरूआत में सबसे ज्यादा गंदे और प्रदूषित शहरों में शामिल किटाक्यूशू आज जनता को पर्यावरण की जानकारी देकर उस पर कामकरने से अपनी पहचान बदल चुका है।
शहरों को स्मार्ट करने के साथ ही मजबूत करना होगा
स्मार्ट सिटी के जरिए सतत शहरी विकास और व्यावसाय के अवसर हुई चर्चा में निकला निष्कर्ष
इंदौर.
8वीं रिजनल थ्रीआर फोरम इन एशिया एंड दी पेसिफिक कांफ्रेस के दूसरे दिन पूरे देश और विदेश से आए सभी महापौर के बीच पैनल डिस्कशन में भारत के स्मार्टसिटी सिस्टम में थ्रीआर तकनीक को इस्तेमाल करते हुए सतत विकास और व्यावसाय के अवसर को लेकर भी चर्चा हुई। जिसमें शहरी विकास के लिए आवश्यक संसाधन और व्यवस्था करने के लिए भी शहरों को आर्थिक तौर पर मजबूत करने की बात रखी गई।
इस दौरान कानपुर के निगमायुक्त अविनाश सिंह ने शहर में की गई व्यवस्थाओं की जानकारी दी, उन्होने कचरे को रियूज करते हुए उससे फर्नीचर बनाने की जानकारी दी। इसके साथ ही गंगा बेसिन के इस शहर में मौजूद उद्योगों से निकलने वाले गंदे पानी को साफ करने और उसका उपयोग करने की बात कही। वहीं सूरत की महापौर अस्मिता शिरौया ने बताया की उनके यहां वेस्ट वाटर का उपयोग उद्योगों में किया जा रहा है। अभी हम 40 एमएलडी पानी साफ कर उन्हें दिया जा रहा है, कोशिश की जा रही है कि 150 एमएलडी पानी साफ कर उद्योगों को दिया जाए। वहीं इंडोनेशिया के बेनडूंग सिटी इंडोनेशिया के डायरेक्टर डेनी नूरदयान हदिमीनी ने अपने यहां किए जा रहे कामों को जिसमें वाटर सेविंग के कामों की जानकारी सबके बीच रखी। इस दौरान ये बात निकलकर आई की शहरों में विकास के लिए उन्हें आर्थिक तौर पर मजबूत करना होगा, ताकि वे नई तकनीक का सहारा ले सकें।
Published on:
12 Apr 2018 04:16 am
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