जीवनशैली में बदलाव व नियमित ब्लडप्रेशर की करें जांच
इंदौर. शरीर की ग्रंथियों को प्रभावित करने वाली जटिल बीमारी है थायराॅइड। गुरुवार को विश्व थायरॉइड डे है। इस बार इसकी थीम अपने रक्तचाप को सही तरीके से मापें, इसे नियंत्रित करें, लंबे समय तक जीवित रहें रखी गई है। एंडोक्राइनोलॉजिस्ट डॉ. जितेंद्र चौहान से जानते हैं, वह सब, जिससे आप थायराॅइड की परेशानी से बचे रहें।
महिलाओं को ज्यादा खतरा
थायरॉइड ग्रंथि गर्दन में श्वास नली के ऊपर व स्वर यंत्र के दोनों भागों में तितली के आकार की होती है। यह थायरोक्सिन नामक हार्मोन बनाती है। बच्चों को थायराॅइड होता है तो उनकी हाइट कम रह जाती है। बड़ों में ब्लड प्रेशर में उतार-चढ़ाव इसका प्राथमिक लक्षण है। नमक का बढ़ता इस्तेमाल भी बीमारी का कारण बन सकता है। 30 वर्ष से अधिक की उम्र में नमक की सही मात्रा और ब्लडप्रेशर की नियमित जांच जरूरी है। हाइपोथायराॅडिज्म पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में ज्यादा होता है। यह अव्यवस्थित जीवनशैली, आयोडीन की कमी, वंशानुगत आदि कारणों से होता है। परिवार में किसी सदस्य को थायराॅइड है तो बच्चों पर ध्यान दें। रोग का पता जल्दी चलने से समय पर इलाज हो जाता है।
इसलिए होता है थायरॉइड रोग
थायराॅइड ग्रंथि से निकलने वाले हार्मोन के कारण ही शरीर का मेटाबॉलिज्म, तापमान, मस्तिष्क के कार्य करने की क्षमता और हार्ट की गतिविधियां प्रभावित होती हैं। थायरॉयड ग्रंथि दो महत्वपूर्ण हार्मोन थायरोक्सिन (टी4) और ट्राइआयोडोथायरोनिन (टी3) उत्सर्जित करती है। दोनों की हार्मोन शरीर में सही तरीके से नहीं बनते हैं तो इसे थायराॅइड रोग कहा जाता है।
एक तिहाई को बीमारी का पता नहीं
एमजीएम मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डॉ. धर्मेंद्र झंवर का कहना है कि थायराइड रोग दो तरह का होता है- हाइपोथायरायडिज्म और हाइपोथायरायडिज्म। जिन्हें यह बीमारी है, उनमें से एक तिहाई को इसका पता नहीं चलता है। थायराॅइड की समस्या 44.3 प्रतिशत गर्भवतियों में और प्रसव के बाद पहले 3 महीनों के दौरान होती है। थायराॅइड ग्रंथि आवश्यक हार्मोन का उत्पादन करने में असमर्थ होती है तो इसे हाइपोथायरायडिज्म कहा जाता है।
थायराइड के लक्षण
- वजन बढ़ना।- चेहरे और पैरों में सूजन।
- कमजोरी, सुस्ती।- भूख न लगना।
- ज्यादा नींद आना।- अत्यधिक ठंड लगना।
- मासिक धर्म में बदलाव।- बालों का झड़ना।
- गर्भधारण में समस्या।