
जो लोग बहू को बेटी का दर्जा नहीं देते उनके घर के होता है ये हाल
इंदौर. नानीबाई के मायरे की कथा उन लोगों के लिए बहुत बड़ा सबक है, जो बहू को बेटी का दर्जा देने के लिए तैयार नहीं होते हैं। बेटियां भले ही पराया धन मानी जाती हों, उनका रिश्ता अपने पैतृक परिवार से कभी नहीं छूटता। बेटियां ही हैं जो दो परिवार और दो संस्कृतियों को जोड़ सकती हैं। भगवान भक्तों को प्रताडऩा से बचाने के लिए स्वयं पहुंच जाते हैं। भक्त का अपमान भगवान को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं होता।
शुक्रवार को भागवताचार्य पं. शिव पुरोहित ने एरोड्रम मार्ग स्थित श्री श्रीविद्याधाम पर भगवती उपासना महिला मंडल की मेजबानी में चल रही नानी बाई रो मायरो कथा में उपस्थित भक्तों को संबोधित करते हुए उक्त विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा नानी बाई की कथा में पिता और पुत्री के बीच करूणा और स्नेह का अदभुत समन्वय है। यह कथा आज के संदर्भों में भी समाज को बेटियों के सम्मान के लिए प्रेरित करती हैं। भगवान ने नानी बाई की प्रतिष्ठा बचाने के माध्यम से बेटियों के निर्मल मन की महत्ता भी बताई है। कथा में प्रतिदिन प्रसंगों के अनुकूल दृश्यों का जीवंत मंचन भी हो रहा है जो आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। प्रारंभ में विधायक सुदर्शन गुप्ता, पार्षद शोभा गर्ग, हरि अग्रवाल तथा महिला मंडल की ओर से तारा मालू, कीर्ति शर्मा, वीणा सोमानी ने व्यासपीठ पूजन किया।
सुखी घर-परिवार का आधार है मधुर रिश्ते . पर कुछ रिश्ते ऐसे होते हैं, जिनका नाम लेते ही, मन में एक अजीब सा एहसास आने लगता है। ऐसा ही एक रिश्ता है सास- बहु का रिश्ता। बहुत कम परिवार होते हैं, जहां सास -बहू के बीच के रिश्ते अच्छे और मधुर होते हैं। पर यदि सच्चे मन से कोशिश की जाये और कुछ छोटी-छोटी बातों का खय़ाल रखा जाये, तो इस रिश्ते को भी मधुर बनाया जा सकता है।
आज हम आपको ऐसे ही कुछ टिप्स देने जा रहे हैं जिससे सास- बहु के रिश्ते को भी मां -बेटी के रिश्ते की तरह स्नेहमयी बनाया जा सके...
1. सास और बहू दोनों ही भिन्न परिवेश से आती हैं। इस बात का हमेशा ध्यान रखे, और एक दूसरे को समझने की कोशिश करें।
2. बहू को कभी भी सास की तुलना अपनी मां से नहीं करनी चाहिए और न ही सास को बहु की तुलना अपनी बेटी से करनी चाहिए।
3. बहु को इस बात का ख्याल रखना चाहिए कि उसकी पहली प्राथमिकता उसका ससुराल ही रहे मायका नहीं।
4. सास को शादी के बाद बेटे को हर वक्त अपने नियंत्रण में रखने की बजाय उसे उसकी स्पेस देनी चाहिए, छोटी मोटी बातों पे उसकी जि़न्दगी में दखल न देकर उसे अपने निर्णय स्वयं लेने दे और इस बात का भी ध्यान रखें कि उसकी पत्नी का भी उसपे उतना ही अधिकार है जितना कि उसकी मां का।
5. सास को चाहिए कि वो बहु की छोटी मोटी गलती को नजऱंदाज़ करे। वहीं बहु को भी एक ही गलती बार बार दोहराने से बचना चाहिए।
6. हर सास चाहती है कि बहु ससुराल के रीती रिवाजों को सीखे और उनका ही पालन करे। जितना अधिक बहु ससुराल के रीती रिवाजों को अहमियत देगी उतना ही उसका ससुराल में मान बढेगा।
7. अपने सास के अनुभवों को सुने और उनसे प्रेरणा लेने की कोशिश करें। इससे न केवल आपका उनके साथ रिश्ता मज़बूत होगा बल्कि आप बहुत कुछ नया भी सिख पाएंगी।
8. कुछ बातों में सास बहु एक दूसरे को स्वतन्त्र छोड़ दें। एक दुसरे पे अपने विचार न थोपें।
9. बहू को चाहिए जो सास सिखाने की कोशिश कर रही है, उसे मन से सीखे। उनकी डांट को मां की डांट समझ कर हलके में ले। दिल से लगाके न बैठ जाएं।
10. कुछ बातों में सास बहु यदि एक दूसरे से असहमत हों तो उनपे बैठकर शान्ति से बात कर लें और आपसी समझ से सुलझाने की कोशिश करें।
इन छोटी छोटी बातों का पालन कर न केवल आप एक आदर्श सास-बहु की जोड़ी बन सकती हैं, बल्कि अपने घर परिवार को भी खुशहाल रख सकती हैं।
Published on:
26 May 2018 04:18 pm
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