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मजदूरी करने गया आदिवासी… जमीन पर बस गई कॉलोनी

कŽब्जे की पीडि़त ने दर्ज कराई शिकायत

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मजदूरी करने गया आदिवासी... जमीन पर बस गई कॉलोनी

मजदूरी करने गया आदिवासी... जमीन पर बस गई कॉलोनी

इंदौर। एक आदिवासी परिवार मजदूरी करने के लिए दूसरे शहर गया। कुछ वर्षों बाद लौटा तो उसकी जमीन पर मकान बने हुए थे, जिन्हें देखकर चौंक गया। पूछताछ की तो पता चला कि पूर्व सरपंच पति व सचिव ने अवैध कॉलोनी काटकर प्लॉट बेचे। मामले की शिकायत प्रशासन से की गई।

मामला तेजाजी नगर से राऊ बायपास के बीच माचला गांव का है, जहां कुछ समय बाद आधुनिक मंडी आने वाली है। यहां के आदिवासी समाज से ताल्लुक रखने वाले मुन्नालाल पिता रामा गलिया ने एक गंभीर शिकायत जिला प्रशासन से की है। कहना है कि माचला के सर्वे नंबर 121.1.3 की जमीन उसके मालिकाना हक की है। सरकार ने ये जमीन उसे खाने-कमाने के लिए दी थी। उस पर वह खेती करता था। मजदूरी करने परिवार के साथ बाहर गया। आठ-दस साल बाद लौटा तो उसकी जमीन खिसक चुकी थी। मकान बने हुए थे।


इस पर उसने पूछताछ की। मकान वालों से मिलकर पूछा कि मकान कैसे और कब बनाया, जमीन के कागज हैं €या? इस पर लोगों का कहना था कि हमें तो पूर्व सरपंच व सचिव से प्लॉट बेचे थे। इस पर उसने बताया कि जमीन तो हमारी है। प्लॉट कैसे कट गए। इस पर मु्न्नालाल ने सीधे पूर्व सरपंच पति और सचिव के यहां दस्तक दी। शिकायत की कि आप लोगों ने मेरी जमीन पर प्लॉट काटकर कैसे बेच दिए। कले€क्टर ऑफिस व कोर्ट में शिकायत करूंगा। इस पर सरपंच पति का कहना था कि जमीन तेरे पिताजी की नहीं है, सरकारी जमीन है और तेरे ये कागज कोई काम के नहीं हैं। उसकी रजिस्ट्री हो चुकी है।

नहीं बिक सकती जमीन
मुन्नालाल का कहना है कि जब उसने गांव छोड़ा था तब पावती नहीं मिल रही थी। अच्छे संबंध होने की वजह से पावती बनाने के लिए दो-तीन जगह हस्ताक्षर कराए थे। बाद में पता चला कि हस्ताक्षर से रजिस्ट्री करा ली गई है। मुन्नालाल का कहना है कि आदिवासी की जमीन की रजिस्ट्री कैसे हो गई? उस पर दोनों पक्षों में विवाद हो गया। पीडि़त ने जिला प्रशासन को शिकायत की, जिसके चलते सभी प्लॉटधारियों को नोटिस थमाए हैं। गौरतलब है कि आदिवासी की जमीन खरीदने से पहले कलेक्टर से अनुमति लेना होती है।