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एक वैश्या की सच्ची कहानी जो आपके रोंगटे खड़े कर दे…

एक तवायफ, जिसे उसके पिता ने ही बेचा, सैक्सस्लेव, वैश्या,  पुजारिन से लेकर हत्यारिन बनने तक की सच्ची दास्तां।

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Shruti Agrawal

Jan 03, 2017

best drama in indore

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इंदौर। मुन्नीबाई एक तवायफ जब वह अपने पिता की मुन्नी थी तब पिता ने उसे पैसे के लिए एक बुजुर्ग से शादी करवा दी। उसके बाद बुजुर्ग का मन भर गया तो उसने मुन्नी को कोठे पर बेच दिया। कोठे पर मुन्नी ने खूब नाम-दाम कमाया।

जब आंटी से मुक्त हुई तो पेशा छोड़ मंदिर की पुजारिन बन गई। वहां भी गंदी नजरों ने उसका पीछा ना छोड़ा अंत में उसने अस्मत लूटने की कोशिश करने वाले की जान ले ली। इस महिला की सच्ची कहानी पर आधरित विभु कुमार के लिखे नाटक मुन्नीबाई को सोमवार की शाम आनंद मोहन माथुर सभागार में पेश किया संदीप दुबे के निर्देशन में रंगमंच आर्ट ऑफ ड्रामा के कलाकारों ने।

मुन्नीबाई उस पुरुष प्रधान समाज की सच्चाई भी पेश करती है, जिसमें हर कदम पर स्त्री का शोषण करने के लिए लोग तैयार रहते हैं। गरीब पिता पैसों के लिए मुन्नीबाई को एक बुजुर्ग से ब्याह देते हैं या बेच देते हैं।


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बुजुर्ग मुन्नी को तवायफ बना देता है। सुंदर मुन्नीबाई इस पेशे में बहुत नाम कमाती है, लेकिन वह अपना पेशा छोडऩा चाहती है। वह जानती है कि उसे कोई अपने घर नहीं ले जाएगा। इसलिए वह एक उजाड़ पड़े मंदिर का जीर्णोद्धार करती है और उसकी पुजारिन बन जाती है। यहीं समाज के ठेकेदार उसके खिलाफ मोर्चा खोल देते हैं।

उस पर झूठे आरोप लगाए जाते हैं कि वह मंदिर की आड़ में धंधा कर रही है। कुछ गुंडे और नेता चाहते हैं कि वह पर्दे के पीछे उनके लिए अपना पेशा जारी रखे, लेकिन मुन्नी सबसे संघर्ष करती है।


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प्रशासन भी उसका साथ नहीं देता और एक दिन उसका सामान फेंकने आए भ्रष्ट नेताओं, गुंडों और पुलिस अधिकारी को त्रिशूल से मौत के घाट उतार देती है। निर्देशक ने मुन्नी बाई की व्यथा-कथा दिखाने के लिए दो अभिनेत्रियों का उपयोग किया। सागरिका दीक्षित ने युवा मुन्नी का रोल किया जो कोठे पर नाचती है और प्रीति किल्लेदार ने उस मुन्नी का जो मंदिर की पुजारिन है।



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यहां प्रीति कुछ कमजोर लगीे, लेकिन सागरिका सहज रहीं। भ्रष्ट नेता बने थे अनंत तिवारी और मुन्नी की सहयोगी तवायफ की भूमिका में अंजलि बिरथरे थीं।


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