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‘भारतीय रेलवे’ का अहम फैसला, दिव्यांग यात्रियों के लिए आई अच्छी खबर…

Indian Railway: अब दिव्यांग यात्री के रियायती टिकट पर अटेंडर का नाम रेलवे यात्री (नाम परिवर्तन) नियम, 1990 के तहत बदला जा सकेगा।

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Indian Railways

Indian Railways प्रतिकात्मक फोटो (Photo Source- freepik)

Indian Railway: भारतीय रेलवे ने दिव्यांग यात्रियों के लिए ट्रेन यात्रा को आसान बनाते हुए रियायती रिजर्वेशन टिकट व्यवस्था में अहम बदलाव किया है। रेलवे ने अब यह सुविधा दे दी है कि टेनों में सफर करने वाले दिव्यांग यात्री अपने साथ यात्रा करने वाले अटेंडर का नाम रियायती रिजर्वेशन टिकट में बिना टिकट कैंसिल किए बदल सकेंगे। इस संबंध में रेलवे बोर्ड ने विधिवत पत्र जारी कर दिया है। अब तक की व्यवस्था में दिव्यांग यात्रियों को रियायती टिकट बुक कराने के बाद अंटेंडर का नाम बदलने की अनुमति नहीं थी।

बदला जा सकेगा अटेंडर का नाम

यदि किसी कारणवश नामित अटेंडर यात्रा नहीं कर पाता था, तो दिव्यांग यात्री को पूरा टिकट रद्द कर नया टिकट बनवाना पड़ता था। इस प्रक्रिया में न केवल टिकट कैंसिलेशन चार्ज देना पड़ता था, बल्कि कई बार दोबारा रिजर्वेशन न मिलने से यात्रा ही बाधित हो जाती थी। विशेषकर लंबी दूरी की यात्राओं के दौरान यह समस्या और गंभीर हो जाती थी। रेलवे बोर्ड द्वारा जारी पत्र के अनुसार, अब दिव्यांग यात्री के रियायती टिकट पर अटेंडर का नाम रेलवे यात्री (नाम परिवर्तन) नियम, 1990 के तहत बदला जा सकेगा।

शर्त यह रहेगी कि नाम परिवर्तन के कारण किराए में किसी भी प्रकार का अंतर, रिफंड या अतिरिक्त भुगतान नहीं किया जाएगा। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, यह निर्णय दिव्यांग यात्रियों की वास्तविक समस्याओं को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। सभी जोनल रेलवे और आईआरसीटीसी को इस सुविधा के प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश दिए हैं।

दिव्यांगों को सफर में होगी आसानी

मप्र दृष्टिहीन कल्याण संघ के महासचिव रूपेश मानेकर बताया रेलवे के इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा यह दिव्यांग यात्रियों के हित में व्यावहारिक फैसला है। उन्होंने बताया कि कई बार अटेंडर का रिजर्वेशन कराने के बाद किसी व्यक्तिगत या पारिवारिक कारण से वह यात्रा करने से मना कर देता था। ऐसी स्थिति में दिव्यांग यात्री को दोबारा रिजर्वेशन कराना पड़ता था, जिससे समय, पैसा और मानसिक तनाव तीनों बढ़ जाते थे। कैंसिलेशन चार्ज अलग से लगता था और सीट न मिलने की आशंका बनी रहती थी।