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#BuddhaPurnima2023 बांधवगढ़ की वादियों में झांकने लगा बुलंद अतीत, मिले दो बौद्ध स्तूप

बुद्ध पूर्णिमा पर विशेष: पुरातात्विक सर्वेक्षण में 11 नई गुफाएं, 4 वाटर बॉडी और एक चित्रित गुफा भी आई सामने, एक स्तूप 15 फीट तो दूसरा 18 फीट ऊंचा, ऐतिहासिकता को लेकर अध्ययन जारी, यह क्षेत्र साबित हो सकता है बौद्ध सर्किट का अहम

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#BuddhaPurnima2023

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गोविंद ठाकरे

patrika.com

इंदौर. बांधवगढ़ की वादियों से सुनहरे अतीत की बुलंदियां झांकने लगी हैं। एक अप्रेल से शुरू हुए पुरातात्विक सर्वेक्षण में टीम को कई ऐतिहासिक स्ट्रक्चर मिले हैं। इनमें दो बड़े बेलनाकार स्तूप, 11 गुफाएं, उनसे जुड़ी 4 वाटर बॉडी और एक चित्रित गुफा शामिल है। इस खोज से बांधवगढ़ भी बौद्ध परिपथ के स्थल के रूप में उभर सकता है। पुरातत्वविदों का कहना है कि अध्ययन के बाद ऐतिहासिकता के संबंध में स्थिति साफ होगी। एक स्तूप की ऊंचाई 15 और दूसरे की 18 फीट है। ये छठी से आठवीं शताब्दी के बताए गए हैं। बेलनाकार स्तूप का आधार और ऊपरी भाग हर्निका सहित संपूर्ण स्वरूप में मौजूद हैं। संभव है, इनमें भगवान बुद्ध की प्रतिमा रही हो। विशेषज्ञों का कहना है कि यहां बौद्ध भिक्षुओं का आना-जाना होगा। उनके लिए गुफाएं बनाई होंगी। मप्र से गुजरने वाले बौद्ध सर्किट में इसके अहम पड़ाव के रूप में उभरने की संभावना है।

व्यापारिक रूट से भी लिंक

गुफाओं और जल संरचनाओं से स्पष्ट है कि प्राचीन काल में यह क्षेत्र उत्तर से दक्षिण को जोड़ने वाले व्यावसायिक रूट के रूप में अहमियत रखता था। समानांतर मार्ग कौशांबी में जाकर मेन रूट से जुड़ता था। यहां टूटी छत वाली एक गुफा भी मिली है।

बौद्ध स्तूप: स्तूप एक गोल टीले के आकार की संरचना है, जिसका उपयोग पवित्र बौद्ध अवशेषों को रखने में किया जाता है। यह बौद्ध प्रार्थना स्थल भी होते थे।

मप्र में बौद्ध परिपथ: सांची से सतना और रीवा के साथ मंदसौर व धार का पर्यटन विकास बौद्ध सर्किट के रूप में किया जा रहा है। इसकी लागत 74 करोड़ रुपए तय की गई है।

अप्रेल में शुरू हुए सर्वे में बौद्ध स्तूप और गुफाओं सहित अहम स्ट्रक्चर मिले हैं,अन्य धरोहरें मिलने की संभावना है।

डॉ. शिवाकांत वाजपेयी, अधीक्षण पुराविद, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग