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खुशखबर : देश में सुगम जीवन के लिए रैंकिंग जारी, टॉप-10 में MP के ये दो शहर

सुगम जीवन को देखते हुए केंद्र सरकार ने देश की पहली रैंकिंग जारी की है। टॉप-10 शहरों में मध्यप्रदेश के दो शहरों को शामिल किया गया है।

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इंदौर

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Amit Mandloi

Aug 14, 2018

indore

खुशखबर : देश में सुगम जीवन के लिए रैंकिंग जारी, टॉप-10 में MP के ये दो शहर

इंदौर. सुगम जीवन को देखते हुए केंद्र सरकार ने देश की पहली रैंकिंग जारी की है। टॉप-10 शहरों में मध्यप्रदेश के दो शहरों को शामिल किया गया है। आठवें नंबर पर प्रदेश की व्यावसायिक राजधानी कहे जाने वाला इंदौर और राजधानी भोपाल दसवें स्थान पर रहा। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर सातवेें स्थान पर रही। पुणे को देश का सबसे बेहतरीन शहर पाया गया है। केंद्र सरकार के आवास एवं शहरी विकास मंत्रालय ने पूरे देश के 111 शहरों को इस सर्वे में शामिल किया था, जिसमें संस्थागत, आर्थिक, सामाजिक और भौतिक आधार पर शहरों की स्थिति को देखा गया था। केंद्र सरकार ने शहरों के चयन के लिए 50 हजार नंबर का सर्वे शहरों की व्यवस्थाओं की कागजी तैयारियों, 14 हजार जगहों की भौतिक जांच और 60 हजार शहरवासियों से इस पर बात की।

इन बातों पर परखा गया इंदौर

शासन - इंदौर में शासन की स्थिति और केंद्र, राज्य शासन सहित जनहितैषी योजनाओं के काम के स्तर पर शहर की परख की गई। इसमें शहर में सराहनिय काम किया गया है। इसमें इंदौर पूरे देश में 13वें नंबर है।

संस्कृति और पहचान - इंदौर की समृद्ध सांस्कृतिक जीवनशैली को केंद्र सरकार ने भी सराहा है। शहर को दूनियाभर में पहचान और सांस्कृतिक स्तर पर पूरे देश में 5वें नंबर पर रखा गया है।

शिक्षा - शिक्षा के बड़े हब के रूप में उभर रहे इंदौर को शिक्षा के क्षेत्र में भी देश के अग्रणी शहरों में रखा गया है। शहर में मौजूद शैक्षणिक संस्थाओं और शैक्षणिक व्यवस्थाओं के चलते इंदौर शिक्षा के मामले में देश का 20वां शहर है।

स्वास्थ्य- स्वास्थ्यगत सुविधाओं की सुविधाएं जिनमें कई बड़े अस्पतालों और शहर में मुहैया सभी तरह की बीमारियों के इलाज की व्यवस्था के चलते शहर को स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी देश के ८वें शहर के रूप में रखा गया है।

इन खूबियों ने इंदौर को एक बार फिर पहुंचाया शीर्ष स्थान पर

बचाव और सुरक्षा- सुरक्षा के मामले में इंदौर काफी पिछड़ा शहर साबित हुआ है। देश के कुल 111 शहरों में इंदौर में सुरक्षा व्यवस्था को काफी कमजोर माना है। इंदौर में सुरक्षा और बचाव के संसाधनों की कमी केंद्र सरकार ने मानी है। इंदौर को सुरक्षा के लिहाज से देश के 111 शहरों में सबसे कमतर 20 शहरों में शामिल किया गया है। शहर की स्थिति 94वें नंबर पर है।

सघनता ओर भूमि का दोहरा उपयोग - तेजी से बढऩे के बाद भी शहर में अभी भी जमीन के उपयोग को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई दे रही है। जमीन के ज्यादा से ज्यादा उपयोग और कम जगह में ज्यादा बसाहट की प्लानिंग (हाईराइज) में शहर अभी भी काफी पीछे है। जमीन के मिक्स उपयोग और सघनता के मामले में 77वें नंबर पर है।

अर्थव्यवस्था और रोजगार - प्रदेश की आर्थिक राजधानी का खिताब शुरू से ही अपने पास रखने वाले इंदौर की अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर भी देश में अग्रणी साबित हुआ है। उद्योगपतियों की पसंद और शहरवासियों के रोजगार के मामले और इंदौर में आने वाले नए उद्योगों के लिहाज से अनुकुल शहरों में देशभर में इंदौर को 4था स्थान दिया गया है।
यातायात और परिवहन व्यवस्था - पूरे देश में सडक़, रेल और हवाई मार्ग से वैसे तो इंदौर जुड़ा हुआ है। साथ ही शहर की लोक परिवहन के लिए भी साधन है, लेकिन अभी भी केंद्र सरकार इसमें और भी काम की गुंजाईश मान रही है। केंद्र सरकार ने इंदौर को इस मामले में देशभर के 29वें शहर के रूप में रखा है।

आवास और समावेशी - शहर में रहने के लिए जगह, शहर की सुदृढ़ आवास व्यवस्था, विकास प्राधिकरण और हाउसिंग बोर्ड के प्लान के मामले में इंदौर जरूर पिछड़े शहरों में है। पूरे देश में आवासीय व्यवस्था में इंदौर ६९वें नंबर आंका गया है।

जनता के लिए खुले स्थान - जनता के लिए खुले स्थानों के लिहाज से शहर काफी कमजोर साबित हुआ है। केंद्र सरकार ने इंदौर में जनता के लिए खुली जगहों की कमी पाई है। जनता के लिए खुले स्थानों में इंदौर अभी 33वें नंबर का शहर माना गया है।

सामाजिक परिदृश्य- आपसी भाईचारे और सौहार्द के साथ ही सभी का एक दूसरे से जुड़ाव हमेशा से इंदौर की पहचान रहा है। इसे केंद्र सरकार ने भी अव्वल माना है। हरधर्म के अनुयायियों के लिए यह एक सुरक्षित स्थान है। केंद्र ने सामाजिक स्थिति के मामले में इंदौर को देश के 9वें शहर के तौर पर रखा है।

प्रदूषण को कम करने के उपाय- व्यावसायिक और औद्योगिक राजधानी होने के बाद भी इंदौर में प्रदूषण नियंत्रण के उपाय को लेकर इंदौर में ओर गुंजाइश केंद्र सरकार मान रही है। प्रदूषण निपटाने के मामले में इंदौर पूरे देश में २८वें पायदान पर है।

दूषित जल प्रबंधन - जमीन को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाने का काम करने वाले दुषित जल के निपटान के मामले में इंदौर में लगे 300 एमएलडी पानी को साफ करने की क्षमता रखने वाले एसटीपी प्लांट के साथ ही औद्योगिक पानी को साफ करने के लिए बने ईटीपी प्लांट की उपलब्धता के चलते इंदौर काफी आगे हैं, लेकिन शहर में बहने वाले गंदे पानी के कारण इंदौर को 27वां नंबर इस मामले में दिया गया है।

बिजली आपूर्ति - 24 घंटे बिजली और आवश्यक्ता के हिसाब से बिजली सप्लाय के मामले में शहर की स्थिति पूरे देश के अग्रणी शहरों में शामिल है। इंदौर बिजली आपूर्ति की व्यवस्थाओं के लिहाज से देश का 7वां समृद्ध शहर है।

जलापूर्ति - शहर की आवश्यक्ता के हिसाब से नर्मदा और यशवंत सागर से जलापूर्ति ने शहर को पानी के मामले में समृद्ध रखा है। इंदौर की पेयजल व्यवस्था के चलते शहर देश में 18वें स्थान पर हैं।

कचरा प्रबंधन- स्वच्छता में नंबर वन आने के साथ ही पूरे देश ने ठोस अपशिष्ठ प्रबंधन के मामले में इंदौर का लोहा माना, लेकिन चार माह बाद इंदौर पिछड़ा है। इंदौर को केंद्र सरकार ने 3 पायदान पर रखा है।

भौतिक - केंद्र सरकार की टीमों ने शहर में व्यवस्थाओं के जो दावे किए गए थे, उसके आधार पर जो सर्वेक्षण किया उसमें भी इंदौर काफी हद तक खरा पाया गया। इंदौर को सर्वे के आधार पर 18वें नंबर पर रखा गया है।

संस्थागत संसाधन- सरकारी विभाग, मशीनरी और उनके काम करने की स्थिति के साथ ही हर तरह की सुविधा के लिहाज से इंदौर 13वे नंबर पर है।

आर्थिक- आर्थिक प्रगति, कर प्रदान करने वालों की स्थिति, आर्थिक उन्नती पूरे देश में सबसे आगे है। आर्थिक मोर्चे पर यह 4 नंबर पर है।