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विवि में बढ़ गए डिग्री वेरिफिकेशन के मामले

- रोजाना आ रहे हैं 25 से ज्यादा आवेदन

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इंदौर

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Manish Yadav

Aug 02, 2023

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विवि में बढ़ गए डिग्री वेरिफिकेशन के मामले

इंदौर। फर्जी डिग्री बनाने वाला गिरोह पकडऩे के बाद देवी अहिल्या विश्वविद्यालय में डिग्री वेरिफिकेशन के लिए आवेदन अचानक बढ़ गए हैं। देश के अलग-अलग राज्यों, शहरों से यूनिवर्सिटी, कंपनियां डिग्री वेरिफिकेशन के लिए संपर्क कर रही हैं। डिग्री वेरिफिकेशन के आवेदन विदेशों से भी आ रहे हैं।
इंदौर सहित देश के कई इलाकों में फर्जी डिग्री के मामले सामने आ चुके हैं। इसी चलते कंपनियां अब अपने यहां पर कर्मचारी की नियुक्त करने के साथ ही ही उसकी डिग्री की भी जांच करवा लेेते हैं। कहीं उसने फर्जी डिग्री या मार्कशीट दिखाकर नौकरी तो नहीं पाई है। वह ई-मेल या फिर अन्य जरियों से अपने यहां के कर्मचारियों की डिग्री के वेरिफिकेशन के लिए विश्वविद्यालय को आवेदन करते हैं। इस आवेदन के आधार पर डीएवीवी सत्यापन कर बताता है कि डिग्री सही है कि नहीं। पहले एक दिन में आठ से दस आवेदन आते थे, अब इनकी संख्या 25 से ज्यादा हो गई। इसके चलते विश्वविद्यालय का काम भी बढ़ गया है।
यह है प्रक्रिया
विश्वविद्यालय के पास में रिकॉर्ड रहता है। कोई भी आवेदन करता है तो विश्वविद्यालय उससे करीब पांच सौ रुपए का चार्ज लेता है। इसके बाद संबंधित विभाग के पास में मामला भेजा जाता है। वह अपने रिकॉर्ड के आधार पर इसे चेक करता है। इसके बाद सील बंद लिफाफे से या फिर उसकी कापी को स्कैन करने ई-मेल पर संबंधित को भेज दी जाती है।
सबसे ज्यादा फर्जी डिग्री नॉर्थ ईस्ट से
देवी अहिल्या विवि से मिली जानकारी के मुताबिक सबसे ज्यादा डिग्री वेरिफिकेशन के मामले नॉर्थ ईस्ट राज्यों व ओडिशा से आ रहे हैं। वहां कई लोगों के पास डीएवीवी की डिग्री मिली है। इसके चलते डीएवीवी के निर्धारित मापदंडों के आधार पर डिग्री का वेरिफिकेशन कर जानकारी संबंधित यूनिवर्सिटी या कंपनियों को भेजी जा रही है। नॉर्थ ईस्ट के कई मामले में डिग्री फर्जी निकलती है। उन मामलों को पुलिस को सौंप दिया जाता है।
इंदौर पुलिस ने पकड़ा है गिरोह
हाल ही में इंदौर पुलिस ने फर्जी मार्कशीट बनाने वाले बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया है। यह गिरोह 30 हजार से 1 लाख रुपए में डॉक्टर सहित अन्य कोर्स की फर्जी डिग्री बनाकर बेचते थे। अब तक गिरोह के सदस्य 10वीं, 12वी, डी फार्मा, बी फार्मा, डॉक्टर सहित अन्य कोर्स की डिग्रियां बनाकर दे चुके हैं। इसमें मध्य प्रदेश, बिहार, दिल्ली, पंजाब, राजस्थान सहित कई राज्यों के शिक्षा बोर्ड और यूनिवर्सिटी के नाम से एक हजार से ज्यादा मार्कशीट हैं।
विवि ने अपनाए सिक्यूरिटी फीचर
फर्जी डिग्री के कुछ मामले सामने आने के बाद डीएवीवी ने अपनी जारी की जाने वाली डिग्रियों में कई सिक्यूरिटी फीचर जोड़े हैं। डिग्री अलग प्रकार के विशेष कागज पर ङ्क्षप्रट होने के साथ ही उस पर बार कोड है। यूनिवर्सिटी या कंपनियां बार कोड के माध्यम से भी डिग्री सत्यापन कर सकती हैं। डीएवीवी की डिग्री को कॉपी नहीं किया जा सकता है। इसके लिए डिग्री पर एक ऐसा स्पेशल कोड डाला गया है, जिससे डिग्री की कलर कॉपी करने पर उस पर फोटोकॉपी लिखा हुआ प्रदर्शित हो जाता है। इसके अलावा डिग्रियों पर कुलपति के डिजिटल सिग्नेचर होते हैं।