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केरल के कथकली नृत्य की ये रोचक बातें नहीं जानते होंगे आप

कथकली में 60 वेश धारण किए जाते हैं

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इंदौर

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Amit Mandloi

Aug 18, 2018

kathkali

केरल के कथकली नृत्य की ये रोचक बातें नहीं जानते होंगे आप

इंदौर. केरल की प्राकृतिक सुंदरता, वहां के व्यंजन, हरियाली व आकर्षक नजारों से केरल के दूर-दूर तक फैले असीम सागर से तो हर कोई परिचित है। केरल का नृत्य वहां की लोक कलाओं को प्रदर्शित करता है। कलाकारों द्वारा आंखों से बयां होती कहानियां, रौद्र रूप व हाथों की अलग-अलग मुद्राओं को केरल के ही कलाकारों ने केरल टूरिज्म द्वारा आयोजित प्रोग्राम में साझा किया है। पत्रिका प्लस रिपोर्टर ने बैक स्टेज जाकर कलाकारों का मेकअप आर्ट देखा और कथकली व तय्यम नृत्य शैलियों की जानकारी कलाकारों की ही जुबानी। वह बोले, कथकली में 60 वेश धारण किए जाते हैं।

कथकली केरला की संस्कृति : गिरीश

नर्तक गिरिश ने बताया, वे आठवीं कक्षा में थे, तब से कथकली सीख रहे हैं। उन्होंने कहा, केरल का सबसे प्रसिद्ध नृत्य कथकली है, इसलिए जब-जब केरल का ट्रेडिशन शो करने का मौका मिलता है, खुशी होती है। गिरीश ने कलामंडल में तीन साल का डिग्री कोर्स किया है। वहां सिलेक्टेड लोगों को ही रखा जाता है और बेच वाइस सिलेक्शन होता है। इसलिए बहुत स्ट्रगल करने के बाद वे एक अच्छे कलाकार बन पाए हैं। गिरीश को अपने परिवार से काफी सपोर्ट मिला है।


कथकली में होते हैं 64 नोट्स
कथकली डांस के लिए उनकी 14 लोगों की टीम थी। गिरीश ने लेडीज आर्टिस्ट का लुक बनाया था। उनका ड्रेसअप और जूलरी की कीमत करीब पौने दो लाख रुपए है और इसका वजन करीब 30 किलो है। गिरीश को तैयार होने में ढाई घंटे का समय लगा। उन्होंने कहा, कथकली में 60 अलग-अलग वेश और 64 नोट्स (शरीर पर धारण करने वाली जूलरी) होते हैं।

500 से ज्यादा किए स्टेज शो : अनंतु

आठवीं कक्षा से अनंतु नृत्य सीख रहे हैं। वे कहते हैं हाल ही में पीजी पूरा किया है। दसवीं में था जब पहला स्टेज शो किया था। अनंतु ने बताया तय्यम में सत्तगुड़म, तेजगुड़म और रजगुड़म यह तीन गुड़ होते हैं। इसी तरह अनन्तु ने कथकली में सत्तगुड़म में पच्चा यानी ग्रीन लुक धारण किया है। इसमें कृष्ण, अर्जुन और भीम सभी का रूप आता है। तय्यम कथकली नृत्य में अलग-अलग स्टोरी फॉर्म को आंखों और हाथों से बयां किया जाता है। वह अब तक ५०० से ज्यादा स्टेज शो कर चुके हैं।

न्योरी ड्रेसअप

उत्तरियम लुक में न्योरी ड्रेसअप किया है। सिर पर तीन किग्रा की लकड़ी का गेटअप और बाल के रूप में चामर यानी पेड़ों की छालों को कलर कर बनाया है। पूरा वेशम कच्चा, कत्थी, करी, ताड़ी और मिनिक में है। अनंतु ने पच्चा लुक किया है। तैयार होने में तीन घंटे लगते हंै और करीब 30 किलो वजनी पूरा गेटअप है।

सीखने में ही लग गए 15 साल -निखिल

तय्यम लुक में भगवती वेशम् लुक करने वाले निखिल पीके ने मनाओला मेकअप किया है। इनकी जूलरी और सिर से पैर तक का लुक पेड़ों की लकडिय़ों को काटकर उन्हें अलग-अलग तरह से जोडक़र बनाया है। यह पूरा वजन सिर के ऊपर दस किलो का और सिर से नीचे का वजन करीब ६ किलो यानी १६ किलो का है। निखिल के लुक में दांतों को बाहर की ओर सिंबोलिक बनाते हुए मुंह से बांधकर रखा हुआ है। निखिल ने कहा, यह हमारी पारंपरिक कला है। दो दादा-परदादा ने भी इसे किया। इसे सीखने में मुझे भी करीब १५ साल लग गए।
तय्यम में होते हैं १२ वेश : तय्यम नृत्य चेंडा इंस्टूमेंट से हाथों और आंखों से एक्सप्रेस होता है। तय्यम एक पारंपरिक आर्ट है। इसे मंदिर आर्ट भी कहते हैं। तय्यम में करीब १२ अलग-अलग वेश होते हैं। तय्यम का वजन २० किलो तक का भी होता है और ड्रेसअप की कॉस्ट १ लाख रुपए होती है। इस लुक में आने में करीब तीन घंटे से ज्यादा का समय लगता है।

जूलरी भी खास
कादिला (कान के), वड़ा (कंगन)
हस्तगडग़म (बाजूबंद), तोलपुट्ट (शोल्डर), पडिहरियाणम (कमर)
मलकुल्लारम (गले), कोंडा (सिर), मशी (आंखों का मेकअप), उरुमाल (सिर से नीचे तक बंधा होता है), कुरुनिरा (टीका), चमेयम (ड्रेस का नाम), चामर (हेयर)


केरल टूरिज्म ने इंदौर से की पार्टनरशिप
ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में केरला टूरिज्म डिपार्टमेंट के डिप्टी डायरेक्टर केएस शाइन ने कहा, घरेलू बाजार तक पहुंचने के लिए जुलाई से अक्टूबर २०१८ तक इंदौर के बाद अब भुवनेश्वर, विजयवाड़ा, अहमदाबाद, वड़ोदरा, सूरत, लखनऊ, नागपुर और मुंबई में अगले कुछ महीनों में पार्टनरशिप आयोजित की जाएगी।