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एग्रीकल्चर कॉलेज में दूसरे दिन भी चलती रही होस्टल खाली करने की नौटंकी

- रैगिंग के दोषी छात्रों का ट्रांसफर निरस्त कराने की मांग पर अड़े सीनियर  

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इंदौर

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Amit Mandloi

Sep 16, 2018

file photo

एग्रीकल्चर कॉलेज में दूसरे दिन भी चलती रही होस्टल खाली करने की नौटंकी

इंदौर.
शहर के एग्रीकल्चर कॉलेज के होस्टल में रहने वाले सीनियरों ने कॉलेज प्रबंधन के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। शनिवार को लगातार दूसरे दिन होस्टलर्स ने अपना सामान कमरों से बाहर निकाल कर रख दिया। उनकी मांग है कि बैच के जिन छात्रों के ट्रांसफर अन्य शहरों के कॉलेज में किए हैं, उन्हें निरस्त किया जाएं। देर शाम तक प्रबंधन और छात्रों के बीच चर्चा चलती रही।

अप्रैल २०१८ में रैगिंग की शिकायत यूजीसी तक पहुंचने के बाद कॉलेज प्रबंधन ने सेकंड इयर के चार छात्रों को दोषी मानते हुए कॉलेज से ट्रांसफर कर दिया है। इन्हें ग्वालियर, सीहोर और खंडवा के एग्रीकल्चर कॉलेज भेजा गया। बीच सत्र में हुई कार्रवाई के बाद परीक्षा के बाद चारों को कॉलेज और होस्टल खाली करना है। लेकिन, इससे पहले जूनियर और सीनियर छात्रों के बीच एक और विवाद हो गया। रैगिंग रोकने के लिए कई वर्षों से फस्र्ट इयर के छात्रों को कॉलेज होस्टल में नहीं रखा जाता। पिछले साल शिकायत करने वाली बैच के छात्र इस साल सेकंड इयर में आ गए है। प्रबंधन ने बीते दिनों सेकंड इयर वालों को होस्टल अलॉट किया, तब भी थर्ड इयर वालों के साथ मार-पीट हुई थी। इसकी शिकायत पुलिस को भी हुई। इसके बाद से ही थर्ड इयर वाले सेकंड इयर वालों को होस्टल में ठहराने का विरोध कर रहे है। प्रबंधन द्वारा मांग नहीं माने जाने पर शुक्रवार सुबह थर्ड इयर के छात्रों ने इंडक्शन प्रोग्राम का विरोध करते हुए अपना सामान होस्टल से बाहर निकाल लिया था। देर शाम को फैकल्टी की समझाइश के बाद उन्होंने फिर सामान होस्टल में रखा। शुक्रवार रात को होस्टलर ने बैठक में ट्रांसफर निरस्त नहीं करने तक दबाव बनाए रखने की सहमति बनी। इस पर शनिवार सुबह सभी सीनियर अपना सामान कमरों से बाहर निकालकर बैठ गए। मालूम हो, चारों छात्र का कॉलेज ट्रांसफर करने का फैसला एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी ने किया था।

सेकंड इयर और थर्ड इयर के बच्चों के बीच कुछ विवाद है। हम दोनों पक्षों को पहले भी समझा चुके है। शनिवार को सीनियरों ने अपना सामान निकालकर होस्टल खाली किया था। हमने उन्हें समझाइश देकर दोबारा कमरों में भिजवाया। शनिवार को फिर उन्होंने सामान निकाल लिया। हम तो यही कोशिश कर रहे है कि सभी छात्र मिल-जुलकर रहे।

- डॉ.यूआर खांडेकर, डीन