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मालवा-निमाड़  : भाजपा और कांग्रेस मेें जिताऊ चेहरों का है संकट!

दोनों पार्टियों के पास बड़े नेता की कमी, कई पुराने नेता, लेकिन प्रभाव कम

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इंदौर

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Ramesh Vaidh

Aug 27, 2023

मालवा-निमाड़  : भाजपा और कांग्रेस मेें जिताऊ चेहरों का है संकट!

मालवा-निमाड़  : भाजपा और कांग्रेस मेें जिताऊ चेहरों का है संकट!

इंदौर. मालवा-निमाड़ में भाजपा-कांग्रेस के पास बड़े चेहरे का संकट है। ऐसा नहीं की यहां पार्टी के क्षत्रप नहीं रहे, लेकिन अब जनता और कार्यकर्ताओं के बीच उनकी वाइस कमजोर हो गई है। उन्होंने भी खुद को समेट लिया है। यह स्थिति पिछले कुछ वर्षों में बनी है।
मप्र को राजनीतिक दृष्टि से देखा जाए तो मालवा-निमाड़, चंबल और महाकौशल में बंटा हुआ है। 230 में से 66 सीट मालवा-निमाड़ में आती हैं, जो भाजपा का गढ़ भी माना जाता है। लेकिन, पार्टी के पास अब यहां जिताऊ चेहरे का संकट नजर आ रहा है। एक समय यहां से कई नामी चेहरे चुनाव में प्रभाव डालते थे। उनमें लोकसभा की पूर्व अध्यक्ष सुमित्रा महाजन, विक्रम वर्मा, कृष्णमुरारी मोघे, थावरचंद गेहलोत, सत्यनारायण जटिया पहली पक्ति के नेता रहे। दूसरी पंक्ति के नेता अब खुद कमजोर हो गए और संकट के दौर से गुजर रहे हैं। कुछ तो पिछले विधानसभा चुनाव में अपनी सीट भी गंवा चुके हैं। ऐसी ही स्थिति कांग्रेस की मालवा-निमाड़ में है। कांतिलाल भूरिया और अरुण यादव जैसे बड़े नेता जरूर हैं, लेकिन उनका वजूद संगठन ने ही कम कर दिया। उन्हें संगठनात्मक मजबूती या ऊंचाई नहीं मिल रही है। राऊ विधायक जीतू पटवारी ने अपनी जगह बनाने की कोशिश की, लेकिन वे सर्वमान्य होने के लिए मशक्कत कर रहे हैं। राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा में उन्हें जरूर प्रदेश स्तर पर मजबूत होने का मौका मिला, लेकिन दायरा पार्टी स्तर तक ही रहा।
खाली हाथ मालवा-निमाड़
भाजपा की दृष्टि से देखा जाए तो मालवा खाली हाथ है। मप्र कोटे से केंद्र सरकार में मंत्री चंबल और महाकौशल के हैं। चंबल में नरेंद्रसिंह तोमर व ज्योतिरादित्य सिंधिया के होने से फायदा मिल रहा है तो महाकौशल में प्रहलाद पटेल और फग्गनसिंह कुलस्ते की पकड़ मजबूत है। मालवा में सत्ता-संगठन के नाम पर महासचिव का पद है, जिनके भरोसे 66 सीट नहीं छोड़ी जा सकती। 2018 के विधानसभा चुनाव में प्रभारी बनाया गया था, लेकिन पार्टी को लाभ नहीं मिला।
कांग्रेस: दूसरी पंक्ति मजबूत
भाजपा के बजाए कांग्रेस की दूसरी पंक्ति यहां पर मजबूत नजर आ रही है। जीतू पटवारी के अलावा सज्जनसिंह वर्मा, कमलेश्वर पटेल, बाला बच्चन, उमंग सिंगार, विजय लक्ष्मी साधौ जैसे मजबूत नाम हैं। अपनी सीट के अलावा आसपास की सीटों पर भी इनका प्रभाव अच्छा खासा है।