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81 फीसदी इंदौरियों में विटामिन डी कम, हड्डियां कमजोर

कितने स्वस्थ है हम: सर्वे में खुलासा, 33 प्रतिशत लोग ओवरवेट, डायबिटिज व हृदय रोग का खतरा  

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81 फीसदी इंदौरियों में विटामिन डी कम, हड्डियां कमजोर

81 फीसदी इंदौरियों में विटामिन डी कम, हड्डियां कमजोर

प्रमोद मिश्रा
इंदौर. प्रिवेंटिव हेल्थ केयर के तहत हुए सर्वे ने शहरवासियों की अनियमित लाइफ स्टाइल के गंभीर खतरे को सामने लाकर खड़ा कर दिया है। ताजा सर्वे में स्पष्ट हुआ है कि इंंदौर के करीब 81 प्रतिशत लोगों मे ंविटामिन डी की कमी है। यह वे लोग है जो सीधे सूर्य की किरणों का सामना करने से बचते है, धूप इनके शरीर में नहीं पड़ती। इन लोगों में हड्डियां संबंधित बीमारी होने का खतरा ज्यादा है।

शासन के साथ हेल्थ केयर के सर्वेक्षण के बाद अब पिछले पांच महीने में एक नया सर्वे किया गया, इसकी रिपोर्ट में चौंकाने वाली है।
प्रशासन व रेडक्रास की मदद से पहले सर्वे कर चुके सेंट्रल लैब की टीम ने जनवरी से मई 2023 के बीच नया सर्वे किया है। करीब 35 हजार लोगों पर किए गए सर्वे से साफ हुआ है कि करीब 81 प्रतिशत लोगों में विटामिन डी की कमी है, साथ ही 15 प्रतिशत में विटामिन बी 12 कम पाया गया, शोध में बात आइ सामने। साथ ही टीएसएच (थायराइड स्टिमुलेटिंग हार्मोन) हाई टेस्ट 12.02 प्रतिशत एबनार्मल मिला है।

यह है परेशानी- विटामिन डी की कमी होने से हाइपोकैल्सीमिया रोग हो सकता है, जिसमें कैल्शियम की कमी हो जाती है। इसससे ऑस्टियोपोरोसिस या हड्डियों में दर्द हो सकता है।
- वर्तमान दौर में इस तरह की शिकायतें भी सामने आ रही है और सर्वे से यह बात साफ हुई है। विटामिन बी 12 की कमी नर्वस सिस्टम पर असर डालती है, खान पान की अस्थिरता से यह बीमारी होती है। - टीएसएच हाई के पीछे प्रदूषण व तनाव भी एक कारण होता है, इससे थायराइड होने का खतरा बढ़ जाता है।

इस तरह का निदान
- विशेषज्ञों के मुताबिक, विटामिन डी की कमी दूर करने का सबसे सरल उपाय है, धूप में रहना। मेडिसिन लेने के बजाए सीधे धूप में रहने से कमी दूर हो जाती है। - लोग चेहरे के साथ ही शरीर, हाथ भी ढंक लेते है जिससे सीधे धूप के संपर्क में नहीं आते है, चेहरे पर परेशानी है तो हाथ खुले रख धूप के संपर्क में रह सकते है।

- अनियंत्रित खान पान, फैट वाले खाद्य पदार्थों का सेवन करने से बचे।
सर्वे के परिणामटेस्ट पैरामीटर एबनार्मलिटी

विटामिन डी (लो) 81.02 प्रतिशत
विटाबिन बी 12 (लो) 15.25 प्रतिशतटीएसएच (हाइ) 12.02 प्रतिशत

बीएमआइ टेस्ट, 33 प्रतिशत ओवर वेट तो 16 प्रतिशत मोटापे से ग्रसित
व्यस्कों में मोटापे की जांच करने के तरीके को बीएमआई यानी बॉडी मास इंडेक्स निकालना है। यह किसी व्यक्ति की ऊंचाई के आधार पर स्वस्थ शरीर के वजऩ का आंकलन करता है। दरअसल, बॉडी मास इंडैक्स अर्थात शरीर द्रव्यमान सूचकांक, ये बताता है कि शरीर का भार उसकी लंबाई के अनुपात में ठीक है या नहीं। रिसर्च से साफ हुआ कि 35 हजार लोगों में से 42.58 प्रतिशत लोगों का ही बीएमआइ नॉर्मल है। 33 प्रतिशत लोग ऐसे है जिनका वजन उनकी ऊंचाई के हिसाब से ठीक नहीं है, यानी वजन ज्यादा है। ऐसी स्थिति में उस व्यक्ति को हृदय संबंधि बीमारी, डायबिटिज का शिकार होने की आशंका बढ़ जाती है।

- 16.82 प्रतिशत लोग ऐसे है जिनको बीएमआइ ओवसेंस के दायरे में रखा जा सकता है, यानी मोटापे का शिकार है। ओवर वेट व मोटापा दोनों ही डायबिटिज व हृदय संबंधि गंभीर बीमारी का कारण बन सकते है।
बीएमआइ नार्मल 42.58बीएमआइ लो 7.60

बीएमआइ (ओवर वेट) 33बीएमआइ (ओब्यूज) 16.82 प्रतिशत


टॉपिक एक्सपर्ट

हम सन रिच कंट्री में रहते है, इसके बाद भी करीब 81 लोग विटामिन डी की कमी से जूझ रहे है। विटामिन डी की कमी होने से कई तरह की बीमारी से ग्रसित हो सकते है। जागरुकता का कमी नहीं होने से लोगों में विटामिन डी की कमी सामने आ रही है। साथ ही खान पान में अनियमितता, संतुलन नहीं बनने भी बीमारी का एक बड़ा कारण है। जागरुकता के जरिए इस तरह की कमी से बचा जा सकता है।

डॉ. विनीता कोठारी, फाउंडर सेंट्रल लैब।