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20 फीसदी  ही वाटर हार्वेस्टिंग पर काम

वाटर डाइजेस्ट अवॉर्ड मिलने पर निगम अब 2 लाख का लक्ष्य लेकर काम करेगा

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इंदौर

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Ramesh Vaidh

Mar 20, 2023

20 फीसदी  ही वाटर हार्वेस्टिंग पर काम

इंदौर. शहर की करीब 20 फीसदी बसाहट ही अभी रैन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम से जुड़ी है। 80 फीसदी वाटर हार्वेङ्क्षस्टग के लिए बड़े स्तर पर काम करने की जरूरत है। आंकड़ें देखें तो अभी शहर में करीब 6 लाख से अधिक मकान, भवन, हाइराइज हैं। इनमें करीब एक लाख में ही सिस्टम लगे हैं। ऐसे में नगर निगम को जागरुकता के साथ ही पेनल्टी जैसे कड़े नियम लागू करने होंगे, तभी स्वच्छता की तरह शत-प्रतिशत वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम में भी शहर नंबर-1 बना रहेगा। हालांकि, शहर में नए निर्माण कार्यों की परमिशन में सिस्टम लगाना अनिवार्य किया गया है। लेकिन, निगम के सामने चुनौती पुराने मकान, भवनों के साथ बन चुकीं हाइराइज बिङ्क्षल्डगों की है।
ध्यान रखें, दूषित जल हार्वेस्ट न हो
जल प्रबंधन विशेषज्ञ सुरेश एमजी ने बताया, वाटर हार्वेङ्क्षस्टग सिस्टम को लेकर अभी 80 फीसदी काम और करना है। विशेष रूप से यह ध्यान रखना है कि जमीन में कहीं दूषित जल न हार्वेस्ट हो। वैज्ञानिक तरीके से ही काम करने की जरूरत है। इसके लिए निगम के इंजीनियरों को भी ध्यान देना होगा। शहर की 35 लाख से अधिक आबादी है। 150 से 200 लीटर पानी की खपत एक परिवार की है। लगभग 650 एमएलडी पानी की जरूरत होने लगी है। 450 एमएलडी पानी नर्मदा व तालाबों से मिल रहा है। 200 एमएलडी के करीब भूमिगत जल से पूर्ति हो रही है।
2 लाख का लक्ष्य पूरा करेंगे
नगर निगम के जल समिति प्रभारी अभिषेक बबलू शर्मा ने बताया, अब हम 2 लाख घरों, बिङ्क्षल्डग, भवनों, हाइराइज में रैन वाटर हार्वेङ्क्षस्टग सिस्टम लगाने का लक्ष्य लेकर काम करेंगे। इस नवाचार में शहरवासियों का सहयोग मिलेगा। उम्मीद है, आने वाले सालों में शहर के भूमिगत जल के स्तर में सुधार होगा। इस नवाचार को बड़े स्तर पर ले जाने के लिए कार्य योजना बनाएंगे। खासकर पुराने मकानों में सिस्टम लगाने के लिए लोगों से अपील कर रहे हैं। निर्माण हो चुकी बिङ्क्षल्डगों, भवनों में जहां सिस्टम नहीं लगा है, वहां जागरुक अभियान चलाएंगे।
अभी यह स्थिति
इंदौर में वाटर वॉरियर्स के रूप में काम हो रहा है। अभी तक निगम द्वारा 1 लाख से अधिक घरों, भवनों में रैन वाटर हार्वेङ्क्षस्टग सिस्टम लगाकर जियो टैङ्क्षगग की गई है। 11 रिचार्ज जोन तैयार किए हैं। छोटे तालाबों पर काम हुआ है। 350 जल स्रोत कुएं, बावडिय़ों का जीर्णोद्धार हुआ है। 10 बड़े तालाबों से डिसिङ्क्षल्टग के साथ 110 एमएलडी वाटर रियूज किया जा रहा है।