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फर्जी वसीयत, असली नामांतरण

पीडि़त ममता ने लल्लूसिंह द्वारा नगर निगम में प्रस्तुत की गई वसीयत की जानकारी निकाली तो स्व. लक्ष्मण सिंह के हस्ताक्षर निकले, जिसमें उन्होंने अपने घर को लल्लूसिंह के नाम कर दिया है। 

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Subhash Sharma

Feb 04, 2016


इंदौर@ लवीन ओव्हाल. नगर निगम के संपत्तिकर विभाग में फर्जी वसीयत पर असली नामांतरण कर दिया है। इस पूरे खेल में सहायक संपत्ति अधिकारी शंका के घेरे में है। इसके खुलासे के बाद अब जांच बैठा दी गई है, वहीं जिम्मेदार अधिकारी ने नामांतरण की बात स्वीकार करते हुए कहा, यह गलती से हो गया होगा।

नगर निगम के सहायक राजस्व अधिकारी विपिन वैद्य ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर अचल संपत्ति का नामांतरण कर दिया। जब पीडि़त पक्ष को इसका पता चला तो उन्होंने न्यायालय की शरण ली और इस पूरे गोरखधंधे का खुलासा हुआ है।

न्यायालय ने फर्जी दस्तावेज बनाने वाले के खिलाफ प्रकरण दर्ज करने के आदेश दिए है, साथ ही नगर निगम को भी मामले की जांच के लिए कहा है। रजिस्ट्रार कार्यालय परिसर में हुए उक्त नामांतरण को लेकर संपत्ति कर शाखा के सहायक राजस्व अधिकारी विपिन वैद्य के खिलाफ जांच शुरू हो चुकी है। मामले में उपायुक्त, राजस्व ने हाल ही में वैद्य को नोटिस जारी कर मामले में जवाब देने के आदेश दिए है। वहीं, जब पत्रिका ने विपिन से पूरे मामले में चर्चा की तो उन्होंने चूक होने से इनकार कर दिया।


परदेसीपुरा निवासी ममता पति राजेश राजावत को इनके बड़े पिता लक्ष्मणसिंह गुलाबसिंह के 59-1 सर्वहारा नगर का घर वसीयत के आधार पर मिला था। लक्ष्मणसिंह की मौत के बाद ममता को पता चला उनके दूर के रिश्तेदार राजू पिता लल्लूसिंह निवासी 3-4 कालानी नगर ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नामांतरण करवा लिया। ममता राजावत ने मामले में न्यायालय की शरण ली तो इस पूरे गोरखधंधे का खुलासा हुआ।

ऐसे किया नामांतरण
लल्लूसिंह ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर रजिस्ट्रार कार्यालय स्थित नगर निगम की संपत्ति कर शाखा में नामांतरण आवेदन प्रस्तुत किया। निगम के संपत्ति अधिकारी ने बगैर पड़ताल किए ही आवेदन में प्रस्तुत दस्तावेजों के आधार पर नामांतरण कर दिया।

मामला दर्ज करने के आदेश
पीडि़त महिला ने न्यायालय में परिवाद दायर किया। न्यायालय के समक्ष बैंक मैनेजर ने गवाही देकर बताया कि लक्ष्मणसिंह को लिखते नहीं आता था और वे पेंशन हासिल करने के लिए हमेशा अंगूठा ही लगाते थे। इस बयान के अलावा अन्य सबूतों के आधार पर न्यायालय ने राजू के खिलाफ धारा-420 में मामला दर्ज करने के आदेश दिए।