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पूरे 32 साल बाद मजदूरोंं को मिलेंगे 425 करोड़, मनेगी दीपावली

32 साल से बंंद हुकमचंद मिल को लेकर हाई कोर्ट ने शुक्रवार को बड़ा फैसला दिया। मुआवजा वितरण को लेकर निर्वाचन आयोग से अनापत्ति मिलने के बाद हुई सुनवाई में जस्टिस सुबोध अभ्यंकर ने हाउसिंग बोर्ड को निर्देशित किया है कि वे तीन दिन में मजदूरों के मुआवजे के 218 करोड़ के साथ अन्य देनदारियों के कुल 425.89 करोड़ रुपए भारतीय स्टेट बैंक, भोपाल के नो लियन खाते में जमा करें।

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हाई कोर्ट ने शुक्रवार को बड़ा फैसला दिया

इंदौर. 32 साल से बंंद हुकमचंद मिल को लेकर हाई कोर्ट ने शुक्रवार को बड़ा फैसला दिया। मुआवजा वितरण को लेकर निर्वाचन आयोग से अनापत्ति मिलने के बाद हुई सुनवाई में जस्टिस सुबोध अभ्यंकर ने हाउसिंग बोर्ड को निर्देशित किया है कि वे तीन दिन में मजदूरों के मुआवजे के 218 करोड़ के साथ अन्य देनदारियों के कुल 425.89 करोड़ रुपए भारतीय स्टेट बैंक, भोपाल के नो लियन खाते में जमा करें।

शुक्रवार को हुई सुनवाई के बाद मुआवजे के लिए 32 साल से संघर्ष कर रहे मिल मजदूरों-कर्मचारियों की दीपावली मनने के आसार बन गए हैं। मालूम हो, 9 नवंबर को हाई कोर्ट ने मुआवजे के लिए चुनाव आयोग से अनुमति लेकर प्रक्रिया पूरी करने को कहा था। इसके 13 दिन बाद गृह निर्माण मंडल के प्रमुख सचिव नीरज मंडलोई ने चुनाव आयोग को पत्र लिखा था। हाई कोर्ट ने पिछले सुनवाई में इस पर कड़ी नाराजगी जताते हुए अवमानना की कार्रवाई करने की चेतावनी दी थी। बुधवार को चुनाव आयोग से मुआवजे की प्रक्रिया पर अनापत्ति मिल गई थी।

कैबिनेट को देंगे जानकारी
कोर्ट में सुनवाई के दौरान मजदूरों के वकील गिरीश पटवर्धन, धीरजसिंह पंवार ने चुनाव आयोग की अनुमति मिलने की जानकारी दी। हाउसिंग बोर्ड की ओर से अभिभाषक सुनील जैन ने बताया कि कोर्ट के निर्देश पर हाउसिंग बोर्ड की बोर्ड मीटिंग शुक्रवार को ही होने जा रही है। शासन की ओर से अभिभाषक वैभव भगत ने बताया कि बोर्ड द्वारा लिए गए फैसले की जानकारी कैबिनेट की बैठक में दी जाएगी। इसमें थोड़ा समय लगेगा। कोर्ट को बताया गया कि हाउसिंग बोर्ड पहले ही मजदूरों के मुआवजे व देनदारियाें के लिए 425.89 करोड़ रुपए का भुगतान करने पर सहमत हो चुका है। राशि अलग रखी है। कोर्ट ने शुक्रवार से तीन दिन के भीतर राशि बैंक खाते में जमा करने के निर्देश दिए। अगली सुनवाई 11 दिसंबर को होगी। सुनवाई के दौरान मिल संघर्ष समिति के अध्यक्ष नरेंद्र श्रीवंश, मिल मजदूर संघ के सचिव हरनामसिंह धारीवाल व किशनसिंह बोकरे मौजूद रहे। श्रीवंश व धारीवाल के मुताबिक, अब उम्मीद है कि मजदूरों को राशि जल्द मिल जाएगी।

- 12 दिसंबर 1991 को बंद हुई थी मिल।
- 5895 मजदूर-कर्मचारी कार्यरत थे तब।
- 2200 से ज्यादा का हो चुका निधन, 69 ने आत्महत्या की।
- 800 वारिसों (मजदूरों के) का भी हो चुका निधन।

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