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विश्व गठिया दिवस- विकलांगता से बचने के लिए समय पर लें इलाज

अनुमान है, वर्ष 2025 तक कुल 6 करोड़ मरीजों के साथ भारत आर्थराइटिस (संधिवात) राजधानी बन जाएगा।

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world arthritis day 2017

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इंदौर. एमजीएम मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग की र्यूमेटोलॉजी डिवीजन द्वारा विश्व ऑर्थराइटिस (गठिया) दिवस पर गुरुवार को एमवायएच ओपीडी में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। विशेषज्ञों ने बताया, समय रहते गठिया का इलाज कराकर स्थायी विकलांगता से बचा जा सकता है। सही इलाज से बीमारी पूरी तरह ठीक भी हो जाती है।मुख्य अतिथि एमजीएम मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. शरद थोरा थे। अध्यक्षता एमवाय अधीक्षक डॉ. वीएस पाल, एचओडी मेडिसिन डॉ. अनिल भराणी और सीनियर प्रोफेसर र्यूमेटोलॉजी डॉ. वीपी पांडे ने की।

डॉ. पांडे ने कहा, सही समय पर इलाज से ही गठिया के मरीज विकलांगता से बच सकते हैं और बीमारी पूरी तरह ठीक हो जाती है। आज भी अधिकतर मरीज रोग को छिपाते हैं। इनमें महिलाओं की संख्या ज्यादा होती है। मरीजों के मन में एलोपैथी की दवा को लेकर भय रहता है, जिसे दूर करना होगा।

देश की 15 फीसदी आबादी प्रभावित
डॉ. संजय दुबे (र्यूमेटोलॉजिस्ट) ने संबोधित करते हुए बताया, गठिया संबंधी विकारों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए 1996 में विश्व गठिया दिवस की स्थापना की गई थी। इस वर्ष का विषय है ‘देर न करें आज जुड़ें’। अनुमान है कि भारत में 15 फीसदी लोग संधिशोथ की समस्याओं से प्रभावित होते हैं, जिनमें र्यूमेटीयड गठिया, ऑस्टियोऑर्थराइटिस, गाउट, एंकिलॉजिंग स्पॉन्डिलाइटिस, एसएलईश आदि शामिल हैं। उन्होंने जनता को जागरूक
होने और नि:संकोच अस्पताल जाने की सलाह दी।

चिकनगुनिया भी गठिया का प्रकार
डॉ. मोहित नरेड़ी ने बताया, चिकनगुनिया भी गठिया का ही प्रकार है। उन्होंने लोगों से एडीस मच्छरों से खुद को बचाने और चिकनगुनिया के प्रसार को रोकने का आग्रह किया। डॉ. जय अरोड़ा ने वृद्धावस्था में ऑस्टियोऑर्थराइटिस के बारे में बात की। डॉ. रोहित मेहतानी ने र्यूमेटीय संधिशोथ और इसके प्रभावों के बारे में बताया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में डॉक्टरों, कर्मचारी, नर्सों, फिजियोथैरेपिस्ट ने भाग लिया।

फैंसी फुटवेयर दे रहे बीमारी को बढ़ावा

अनुमान है, वर्ष 2025 तक कुल 6 करोड़ मरीजों के साथ भारत आर्थराइटिस (संधिवात) राजधानी बन जाएगा। अनुवांशिक कारणों से होने वाले 100 से अधिक प्रकार की गठिया का दवाओं से बेहतर इलाज संभव है।

डॉ. अंकित थोरा, ज्वाइंट रिप्लेसमेंट सर्जन