
दिग्गज मुक्केबाज मैरी कॉम ने सुमित्रा महाजन से कुछ ऐसा कहा कि दोनों खिलखिला उठें... आखिक कहा क्या...
इंदौर. दुनिया में डॉक्टर दूसरे भगवान के रूप में मौजूद हैं। वे रोज हजारों जिंदगियां बचाते हैं। डॉक्टरों के कारण हम खुद को सुरक्षित महसूस करते हैं। आप लोग यहां मौजूद हैं तो लग रहा है कि मुझे कुछ नहीं होगा। मेरे बेटे को दिल की परेशानी थी और वह बहुत गंभीर स्थिति में पहुंच गया था। तब डॉक्टरों ने उसे जीवनदान दिया और आज वह स्वस्थ जीवन जी रहा है। मैं और मेरे जैसे खिलाड़ी देश के लिए मेडल तो ला सकते हैं, लेकिन किसी को जीवनदान देना डॉक्टरों के ही हाथ में है। यह कहना था पद्म विभूषण मुक्केबाज मैरी कॉम का। वे वीमेन इन कार्डियोलॉजी एंड रिलेटेड साइंसेस एसोसिएशन के 15वें राष्ट्रीय सम्मेलन में बतौर मुख्य अतिथि बोल रही थीं। दो दिवसीय सम्मेलन के पहले दिन शनिवार को देश-विदेश के डॉक्टरों ने कार्डियोवैस्कुलर के क्षेत्र में महिला डॉक्टरों की भूमिका के साथ महिलाओं में दिल से संबंधित बीमारियों के आधुनिक इलाज पर चर्चा की। लोकसभा की पूर्व अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने पुरुषों की तुलना में कार्डियोवैस्कुलर में महिला सर्जन की संख्या कम होने पर कहा कि आंकड़े मायने नहीं रखते। मैंने लोकसभा में भी देखा है। जहां केवल 5 महिला सदस्य होतीं तो उनमें से 3 बहुत अच्छा बोलने वाली मिलतीं। वे स्टडी कर पहुंचती थीं। जो महिलाएं घर में कांच के बर्तन और बच्चों की देखभाल नजाकत से करती हैं, वे दिल की देखभाल भी अच्छे से कर सकती हैं। महिला चिकित्सक कई महिलाओं की प्रेरणा हैं।
महिला सर्जन्स को आगे बढ़ाने का प्रयास
कार्यक्रम की ऑर्गेनाइजिंग सेक्रेटरी डॉ. सरिता राव ने बताया, इंटरनेशनल कार्डियोलॉजी के क्षेत्र में महिला डॉक्टरों की संख्या सिर्फ 4 फीसदी है। महिला सर्जन से उपचार कराने में लोग पहले घबराते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं रहा। हर वर्ष यह कार्यक्रम महिला दिवस पर कराया जाता है। इस साल महिला दिवस पर होली होने से पहले रखा गया है।
दुनिया ने अपनाई भारत की तकनीक
कोलकाता से आए डॉ. पीके हजारा ने कहा, तकनीक से इलाज आसान और सुलभ होता जा रहा है। पहले एक तकनीक को यहां आने में कई साल लग जाते थे, लेकिन अब ये हाथोंहाथ ट्रांसफर हो रही है। ऑनलाइन सर्जरी भी होने लगी है। ऐसा नहीं है कि भारत में सिर्फ विकसित देशों की तकनीक अपनाई जा रही है। भारत की तकनीक भी कई देश अपनाते हैं। यहां बनने वाले एवटिक वॉल्व और तावी स्टैंट नॉर्थ अमेरिका सहित कई देशों में उपयोग किए जा रहे हैं।
50 फीसदी हो सकती है मरीजों की संख्या
वेस्ट वर्जिनिया से आए डॉ. रमेश दग्गुबाती ने बताया कि बदलते खान-पान, व्यायाम से परहेज जैसी आदतों से हार्ट संबंधी समस्या बढ़ी है। इस पर नियंत्रण नहीं किया गया तो 2030 तक भारत में दिल के मरीजों की संख्या 50 फीसदी हो सकती है। अब कम उम्र में हार्ट अटैक की समस्या देखने को मिल रही है। इसके लिए गलत खान-पान, आधुनिक जीवनशैली और तनाव काफी हद तक जिम्मेदार है।
महिलाओं को भी बराबर का खतरा
एसोसिएशन की अध्यक्ष डॉ. ज्योत्सना मदुरै ने बताया, आम धारणा है कि मेनोपॉज के पहले तक महिलाओं में खतरा कम रहता है, लेकिन ऐसा नहीं है। प्री मेनोपॉज में भी ह्रदय रोगों का खतरा है। भारत में ज्यादातर महिलाएं मानती हैं कि घर के काम करने से उनका व्यायाम हो जाता है। मगर इतना काफी नहीं है। महिलाओं के लिए घर के काम के साथ साइक्लिंग, स्विमिंग या रनिंग में से कोई एक एक्टिविटी और अच्छा खान-पान जरूरी है। जरूरी नहीं कि आप ड्राइफ्रूट ही खाएं, सामान्य रूप से मिलने वाले फल और अन्य खाद्य पदार्थों से भी स्वस्थ रह सकते हैं।
पुरुषों से अलग होते हैं लक्षण
बताया गया कि महिलाओं और पुरुषों में समान रूप से हार्ट संबंधी समस्या देखने में आ रही है। पुरुषों की तुलना में महिलाओं के लक्षण अलग होते हैं, इसलिए ज्यादातर महिलाओं का इलाज समय पर शुरू नहीं हो पाता। ज्यादातर महिलाओं को सीने में दर्द की जगह घबराहट, पेट में जलन, एसीडीटी जैसी समस्या आती है। दिल का सबसे बड़ा दुश्मन कोलेस्ट्रॉल है। अगर दिल की बीमारियों से बचना है तो जीरो कोलेस्ट्रॉल कंसेप्ट पर काम करना जरूरी है।
Updated on:
05 Mar 2023 08:35 pm
Published on:
05 Mar 2023 08:21 pm
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