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इंदौर/भोपाल। पांच दिवसीय रंगों के त्योहार में रविवार को रंगपंचमी की धूम रहेगी। मालवा-निमाड़ के इंदौर, उज्जैन, रतलाम, खंडवा में परंपरिक गेर खुशियों के रंग भी बिखरेंगे। भोपाल में भी छह दशक से चली आ रही परंपरा में इस बार खास अंदाज दिखेगा। अशोकनगर में करीला धाम में आयोजित मेले में दो लाख से ज्यादा लोग हिस्सा लेकर राई नृत्य लेंगे।
इंदौर 60 हजार किलो रंग से सरोबार होगा
रंगपंचमी पर निकलने वाली गेरों में 60 हजार किलो रंग का इस्तेमाल लोगों को सरोबार कर देगा। 4 से 5 घंटे तक चलने वाले इस रंगारंग आयोजन में नए और पुराने इंदौर की झलक भी देखने को मिलेगी। पारंपरिक रनगाड़ों, बग्घी से लेकर ई-रिक्शा भी गैर के काफिले में शामिल होंगे। 200 फीट ऊंचाई तक पानी की बौछार करने वाली मिसाइलों के साथ ही राधाकृष्ण फाग यात्रा में तिरूपति बालाजी मंदिर की झांकी भी शामिल रहेगी। इस यात्रा में छह लाख लोगों के साथ रशिया, इटालिया, पोलैंड, जॉर्डन, इजराइल से विदेशी मेहमान भी यात्रा में शामिल होंगे।
छह दशक से अधिक पुरानी है भोपाल में रंगपंचमी की परम्परा
शहर में होली से ज्यादा धूमधाम से रंगपंचमी मनाया जाता है। इस मौके पर नए और पुराने शहर में आकर्षक चल समारोह निकाले जाते हैं। हिन्दू उत्सव समिति की ओर से पुराने भोपाल में काफी धूमधाम से चल समारोह निकलता है, जिसमें हजारों लोग शामिल होते हैं। शहर में रंगपंचमी पर चल समारोह निकालने की परम्परा छह दशक से अधिक पुरानी है।
दरअसल सुभाष चौक के सराफा व्यापारी 1957-58 में इंदौर में होली के बाद रंगपंचमी पर निकलने वाली गेर में शामिल हुए थे। वहां से आने के बाद सराफा एसोसिएशन के सदस्यों ने भी अगले साल रंगपंचमी पर चल समारोह निकाला। एसोसिएशन की ओर से तीन साल तक चल समारोह निकाला गया, उसके बाद हिन्दू उत्सव समिति का गठन हुआ और 1961-62 से हिन्दू उत्सव समिति की ओर से लगातार यह चल समारोह निकाला जा रहा है। हिंउस के वरिष्ठ आजीवन सदस्य ईशदयाल शर्मा ने बताया कि हर साल रंगपंचमी का जुलूस काफी धूमधाम से निकाला जाता है। यह परम्परा छह दशक से अधिक सालों से चल रही है।
मन्नत पूरी होने पर लेंगे मां जानकी का आशीर्वाद
रंग पंचमी पर लगने वाला विश्व प्रसिद्ध अशोकनगर का करीला मेला शनिवार से शुरू हो गया। इस बार मेले में 30 लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है। मान्यता है कि रामजानकी मंदिर में ही माता सीता ने लव-कुश को जन्म दिया था। यहां मांगी जाने वाली हर मुराद पूरी होती है। रंगपंचमी पर सुबह से ही श्रद्धालुओं का करीला धाम आना प्रारंभ हो जाता है। इस दिन व रात में लाखों श्रद्धालु मां जानकी के मंदिर में शीश नवाते हैं और दर्शन लाभ लेकर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। मन्नतें पूरी होने पर हजारों श्रद्धालु मंदिर परिसर के बाहर राई नृत्य करवाते हैं।
Published on:
12 Mar 2023 12:00 am
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