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यशवंत क्लब सदस्यों के बच्चों की मेंबरशिप पर रोक

26 फरवरी को ईओजीएम में लिए फैसले को सदस्य पटवा ने दी है चुनौती

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इंदौर. शहर के प्रतिष्ठित यशवंत क्लब के सदस्यों की संतानों को नो एज लिमिट के तहत सदस्य बनाने को लेकर 26 फरवरी को विशेष साधारण सभा में लिए फैसले पर कोर्ट ने रोक लगा दी है। क्लब के सदस्य अनिल पटवा द्वारा जिला कोर्ट में पेश किए दावे पर सुनवाई के बाद बुधवार को प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी रश्मि मंडलोई ने सदस्यता देने पर रोक के आदेश दिए हैं। मंगलवार को दायर परिवाद में नोटिस जारी होने के बावजूद यशवंत क्लब की ओर से बुधवार को कोर्ट में न तो जवाब पेश किया और न उनकी ओर से कोई वकील आए थे। क्लब के एक अन्य सदस्य संजय गोरानी ने व्यक्तिगत आवेदन देकर परिवाद में पक्षकार बनने की मांग करते हुए सदस्यता देने पर रोक लगाने की मांग की थी, लेकिन कोर्ट ने उसे खारिज करते रोक लगा दी है।

पटवा की ओर से पैरवी कर रहे एडवोकेट अजय मिश्रा ने बताया, हमने ईओजीएम में लिए अन्य फैसलों को भी चुनौती दी है। उन्होंने बताया, क्लब की ओर से एक फरवरी 2018 को क्लब की विशेष साधारण सभा का नोटिस जारी कर एजेंडे तय किए थे। एजेंडे में क्लब सदस्य की संतान के 45 वर्ष से अधिक की उम्र में सदस्यता देने का कोई बिंदु नहीं था, लेकिन २६ फरवरी को एजेंडे से इतर जाते हुए नो एज लिमिट का प्रस्ताव पारित कर 45 से अधिक उम्र की संतान को भी सदस्यता देने पर सहमति बनाई गई जो गलत है। परिवाद में क्लब की मैनेजिंग कमेटी पर आरोप लगाया है कि क्लब में लोगों की बैक डोर एंट्री के लिए यह मनमर्जी का फैसला लिया है और क्लब को आर्थिक नुकसान पहुंचाया जा रहा है। मिश्रा का कहना है क्लब के संविधान के विपरित जाकर यह फैसला लिया है, जिसे चुनौती दी गई है।

एजेंडे के इतर जोड़ा
आरोप है, ईओजीएम में प्रस्ताव था कि क्लब सदस्य की संतान 25 से 35 साल की हो तो तीन लाख और 35 से 45 साल की है, तो 10 लाख रुपए देकर सदस्य बन सकती है। यह भी तय किया गया कि किसी भी उम्र की संतान सदस्य बन सकती है। सदस्यता शुल्क १० लाख से घटकार पांच लाख रुपए कर दिया है।

क्लब के इतिहास का काला दिन
नो एज लिमिट के फैसले को लेकर यशवंत क्लब के पूर्व चेयरमैन परमजीत सिंह छाबड़ा ने कहा, २६ फरवरी को हुई विशेष साधारण सभा क्लब के इतिहास का काला दिन है। इसमें नियमों की अनदेखी कर क्लब को आर्थिक नुकसान पहुंचाने की साजिश की गई है। क्लब की सदस्यता २५-२५ लाख रुपए में लेने के लिए सैकड़ों लोग तैयार हैं, लेकिन सदस्यों की संतानों को मेम्बरशिप देने में नो एज लिमिट का प्रस्ताव पास कर क्लब को भारी आर्थिक नुकसान पहुंचाने का षड्यंत्र है, इसे हर हाल में बदला जाना चाहिए।