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Britannia के सौ साल पूरे – सेना के जवान से लेकर हर घर की ऐसे बना पहली पसंद

भारत के बच्चों से लेकर बूढ़ों के जुबान पर आज जिस ब्रिटानिया का नाम सुनने को मिलता है, उस कंपनी ने साल 1892 में महज 295 रुपए के निवेश से खड़ी हुई थी।

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Britannia

100 साल का हुआ आपका मनपसंदीदा बिस्किट ब्रिटानिया, ऐसा रहा सफर

नई दिल्ली। भारत में बात जब किसी बिस्किट की आती हे तो लोगों के जुबान पर एक नाम हमेशा रहता है- ब्रिटानिया। देश की ये प्रमुख बिस्किट निर्माता कंपनी ने कोलकाता में 100 साल पूरे होने का जश्न मनाया। भारत के बच्चों से लेकर बूढ़ों के जुबान पर आज जिस ब्रिटानिया का नाम सुनने को मिलता है, उस कंपनी ने साल 1892 में कोलकाता के एक कमरे में महज 295 रुपए के निवेश से खड़ी हुई थी। इस कंपनी ने भारत की आजादी के पहले से लेकर आज तक बदलते भारत के कई रंग देखें हैं। साल 1918 में एक अंग्रेजी व्यापारी इस फर्म में साझेदार बना और इस कंपनी को वो नाम मिला जो आज के जुबान पर है।

दूसरे विश्व युद्घ में ब्रिटानिया को मिला पहला बड़ा आॅर्डर
वैसे जो ब्रिटानिया ने अपने कारोबार में कई छोटे-बड़े पड़ाव को हासिल किया लेकिन दूसरा विश्व युद्ध इस कंपनी के लिए एक बड़ा कारोबारी अवसर प्रदान किया। 11 दशक से भारतीय बाजार में ब्रिटानिया ने अपने कारोबार में कई उतार चढ़ाव देखे। दूसरे विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटानिया को भारत के मित्र देशों से फौजों को सप्लाई करने के उस वक्त का सबसे बड़ा आॅर्डर मिला। इस आॅर्डर के बाद कंपनी की सालाना बिक्री को 8 फीसदी को बढ़ाकर 1.36 करोड़ पर पहुंचा दिया। साल 1979 में कंपनी का नाम ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज लिमिटेड रखा गया।

1982- अमरीकी कंपनी नबिस्को ब्रांड्स ने इस कंपनी के कंट्रोलिंग शेयर खरीदा। लेकिन इसके कुछ साल बाद केरल के मशहूर कारोबारी राजन पिल्लई ने इसका अधिग्रहण कर लिया। इस अधिग्रहण के बाद ब्रिटानिया 100 करोड़ रुपए की कंपनी बन गई लेकिन बाद में बिस्किट किंग के नाम से मशहूर राजन पिल्लई को वित्तीय घोटाले ने सलाखों के पीछे भेज दिया।

1995- गिरफतारी के चार दिन बाद राजन पिल्लई का जेल में ही निधन हो गया। इसी समय नुस्ली वाडिया और एक और विदेशी कंपनी डालोने ने ब्रिटानिया को खरीद लिया।

2009- इस साल इन दोनों साझेदारों के बीच एक बोर्डरूम बैठक हुआ जिसके बाद इस कंपनी पर वाडिया परिवार का पूरा कब्जा हो गया।

1989 से 2003 - इस दौरान सुनील अलघ कंपनी के एमडी व सीईओ रहे। अपने दम पर कंपनी को नई उचाइंयों पर पहुंचाने वाले सुनील अलघ को वित्तीय अनियमितता के कारण अपना पद छोड़ना पड़ा। जिसके एक साल बाद तक कंपनी को बिना सीईओ के ही काम करना पड़ा।

2004- इस साल नुस्ली वाडिया ने विनीता बाली को जवाबदारी सौंप दी। विनीता बाली इससे पहले कैडबरी इंडिया और कोका-कोला इंडिया जैसी कंपनियों में वरिष्ठ पद पर रह चुके थे।

एक साल में 60 अरब रुपए का बिस्किट बेचने का बनाया रिकाॅर्ड


कर्नाटक के बेंगलुरु में डेली ब्रांड के अधिग्रहण के बाद कंपनी ने दो और देशों में अपना बेकरी स्थापित किया। दुबई की स्ट्रैटेजिक फूडस इंटरनेशन और ओमान की एएल सुल्तान फूड इंडस्ट्रीज ने ब्रिटानिया में कंट्रोलिंग इक्विटी खरीदी। विनीता बाली ने कंपनी को सामाजिक सरोकार से जोड़ा और नंदी फाउंडेशन और ग्लोबल एलांयंस फाॅर इम्प्रुव्ड न्यूट्रिशन की मदद से लाखों स्कूली बच्चों को मध्याह्न भाेजन के तहत रोजाना फोर्टिफाइड बिस्किट का वितरण किया। आगे भी ब्रिटानिया ने ऐसे कई पहल किए जिसके बाद कंपनी को मोस्ट रेस्पेक्टेड ब्रांड, बेस्ट इन क्लास व बेस्ट बेकरी जैसे अवार्ड से नवाजा किया गया। विनीता के अगुवाई में ही कंपनी ने एक साल में 60 अरब के बिस्किट बेचन को वल्र्ड रिकाॅर्ड बनाया।

टोटल फूड कंपनी बनने की तैयारी

सौ साल पूरा होने पर कंपनी के एमडी Varun Berry ने बताया कि ब्रिटानिया अब टोटल फूड कंपनी बनने की तैयारी में है। Berry के मुताबिक कंपनी का फोकस अब बिस्किट के साथ साथ फूड के अलग सेगमेंट में भी होगा। वहीं ब्रिटानिया के वाइस प्रेसीडेंट (सेल्स) गुंजन साह ने बताया कि कंपनी का फोकस राजस्थान, एमपी, यूपी समेत छोटे शहरों पर रहेगा। शाह के मुताबिक कंपनी ने टियर 2 टिअर 3 शहरों में 22 फीसदी ग्रोथ दर्ज की है और जल्द ही ये ग्रोथ 32 फीसदी तक जाएगी।