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नई दिल्ली। कोरोना वायरस का असर अब हर तरीके उद्योग में देखने को मिल रहा है। कुछ दिन पहले खबर आई थी कि हुंदई ने अपने सबसे प्लांट को ताला लगा दिया है, जो 14 लाख गाडिय़ों का उत्पादन करता था। वहीं अब खबरें विमान निर्माण उद्योग को लेकर भी आ रही है। विमान निर्माण उद्योग की सबसे बड़ी कंपनियों में से बोइंग ने अनुमान लगाया है कि कोरोना वायरस के असर से इस साल का कारोबार 14 महीने निचले स्तर पर जा सकता है। आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर बोइंग की ओर से किस तरह की संभावनाए जताई हैं...
प्रमुख विमान निमार्ण कंपनी बोइंग को जनवरी में एक भी नए विमान का ठेका नहीं मिला है। बोइंग के उपाध्यक्ष रैंडी टिनसेथ के अनुसार कंपनी अपने उपभोक्ताओं की तरह इस वायरस और इसके असर का आकलन करने में जुटे हैं। उनके अनुसार इस बात में कोई शक नहीं है कि कारोबार में कोरोना वायरस का असर देखने को मिलेगा। टिनसेथ का मानना है कि इस साल विमानन कार्गो कारोबार में वृद्धि स्थिर रहने का अनुमान है।
विमानों की बिक्री की वृद्धि 2.5-2.7 फीसदी के पूर्वानुमान से कम रहने के संकेत मिल रहे हैं। उनके अनुसार माल की ढुलाई ही नहीं होगी, विमान नहीं उड़ेंगे, तो इस साल कार्गो बाजार में कोई वृद्धि हो पाना मुश्किल होगा। कंपनी को इस कारोबार में 14 महीने का निचला स्तर देखने को मिल रहा है।
कोरोनावायरस के संक्रमण के कारण कई देशों और विमानन कंपनियों ने चीन से हवाई संपर्क स्थगित कर दिया है। बोइंग के अनुसार अनुमान है कि साउथ ईस्ट एशिया को अगले 20 साल में 710 अरब डॉलर के 4,500 नए विमानों की जरूरत होगी। उसने वियतनाम, थाईलैंड और इंडोनेशिया को 10 सबसे बड़े बाजारों में से एक बताया। कंपनी को अगले 20 साल में वैश्विक स्तर पर 6,800 करोड़ डॉलर के 44,040 नए वाणिज्यिक विमानों की मांग आने का अनुमान है।
Updated on:
12 Feb 2020 03:00 pm
Published on:
12 Feb 2020 02:59 pm
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