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फेस्टिव सीजन पर सेल पड़ेगी भारी, जानिए क्यों

खासकर ज्वेलरी, कपड़े और फुटवियर जैसे सबसे अधिक खपत वाले सामानों की बिक्रि घटने की चिंता अब व्यपारियों को सता रही है।

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नई दिल्ली। फेस्टिव सीजन अब बस आने ही वाला है, ऐसे में बाजारों मे हर साल की तरह रौनक आने वाली है। लेकिन हो सकता है कि इस बार ये रौनक थोड़ा फीका पड़ जाए। ऐसा इसलिए क्योंकि पिछले एक साल मे हो रहे टैक्सेशन और ट्रांजैक्शन के नियमों में कई अहम बदलाव देखने को मिले है। इसको लेकर करोबारियों मे इस फेस्टिव सीजन थोड़ी चिंता दिखाई दे रही है। खासकर ज्वेलरी, कपड़े और फुटवियर जैसे सबसे अधिक खपत वाले सामानों की बिक्रि घटने की चिंता अब व्यपारियों को सता रही है।


बदलते नियमों से कारोबारियोंं मे उलझनें

नोटबंदी और फिर जीएसटी के लागू होने के बाद से ही करोबारियों को आए दिन बदलते नियमों का लगातार सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में सबसे ज्यादा मायूसी ज्वेलर्स को हो सकती है। सोने पर 3 फीसदी टैक्स के साथ मेकिंग चार्जेज पर 18 फीसदी जीएसटी के साथ केवाईसी जैसी नए नियमों से बिक्रि मे गिरावट देखी जा रही है। एक जानकार के मुताबिक, दो लाख से ज्यादा की सेल्स पर केवाईसी को लेकर पहले से ही चिंता जताया जा रहा था लेकिन अब 50 हजार रुपए से ऊपर की बिक्रि को मनी लॉन्ड्रिंग कानून के दायरें मे लाते हुए केवाईसी को अनिवार्य कर दिया गया है। इसके बाद से अब सभी छोटे ग्राहको को भी कागजी कार्रवाई के लिए बाध्य होंगे और इससे डिमांड और सेल्स दोनो प्रभाव पड़ेगा।


ज्वेलरी मेकिंग चार्जेज से होगा बाजार पर असर

करोबारियों का कहना है कि , सोने पर लगने वाला 3 फीसदी जीएसटी तो फिर भी अब्जॉर्ब किया जा सकता है लेकिन मेकिंग चार्जेज पर लगने वाला 18 फीसदी जीएसटी पर लगेगा। इसके पहले मेकिंग चार्जेज पर कोई टैक्स नहीं लगता था। ऐसे में इसका असर खरीदारों पर पड़ सकता है। वहीं दूसरी तरफ कपड़ा व्यापारियों के लिए आने वाले फेस्टिव सीजन ठंडा साबित हो सकता है। कपड़ा व्यापारियों को इस बात की आशंका है कि इस बार जीएसटी से ज्यादा ट्रांजिशनल रूल्स की मार उन्हे ज्यादा झेलना पड़ सकता है।


30 जून तक पूराने स्टॉक्स न निकल पाने के वजह से कई व्यापारियों के पास अभी भी पूराने स्टॉक्स पड़े हुए है। अब इसे 5 फीसदी फ्लैट टैक्स पर निकाला जाएगा और व्यापारियों को इसपर कोई भी इनपुट क्रेडिट टैक्स नहीं मिलेगा। जीएसटीएन पोर्टल की तकनीकी खामियों के चलते कई टे्रडर्स का रजिस्ट्रेशन भी अभी तक पूरी नहीं हो पाया है और उन्हे बिलिंग और रिटर्न को लेकर कई आशंकाएं है।