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Baleno और Swift के रिकॉल के बीच मारुति को मिली बड़ी राहत

दिल्ली हाई कोर्ट ने मारुति सुजुकी के खिलाफ सीसीआई की जबरन कार्रवाई पर लगाई गई रोक के अपने अंतरिम आदेश को मामले में अंतिम निर्णय आने तक बढ़ा दिया।

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Saurabh Sharma

May 09, 2018

Maruti

नई दिल्‍ली।मारुति सुजुकी के लिए बुरी खबरों के बीच एक राहत खबर आई है। दिल्‍ली हाईकोर्ट ने सीसीआई की कार्रवाई पर रोक लगाते हुए अंतिम आदेश ना आने तक मामले को आगे बढ़ा दिया है। सीसीआई ने मारुति पर स्‍पेयर पाट्र्स को लेकर दुरुपयोग के मामले में 450 करोड़ रुपए से अधिक का आरोप लगाया था। आपको बता दें कि मारुति सुजुकि को बलीनो और स्‍वीफ्ट गाडि़यों में तकनीकि खराबी आने के चलते करीब 52 हजार गाडि़यों को रिकॉल करना पड़ा है। मारुति सुजुकी के लिए दोनों ही गाडि़यां काफी प्रॉफिटेबल साबित हो रही थी।

मारुति को कोर्ट से राहत
दिल्ली हाई कोर्ट ने मारुति सुजुकी के खिलाफ सीसीआई की जबरन कार्रवाई पर लगाई गई रोक के अपने अंतरिम आदेश को मामले में अंतिम निर्णय आने तक बढ़ा दिया। भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) ने स्‍पेयर पाट्र्स मार्केट में अपनी मजबूत स्थिति के दुरुपयोग के आरोप में मारुति सुजुकी पर 471 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया था। न्यायमूर्ति राजीव शकधर ने मारुति का पक्ष सुनने के बाद यह आदेश जारी किया है। कंपनी ने न्यायालय को बताया कि इसी तरह के मामले की सुनवाई उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ में भी चल रही है, जिसमें सीसीआई द्वारा अन्य वाहन निर्माताओं पर लगाए गये जुर्माने के आदेश पर रोक लगाई है।

तीन साल पहले लगाया जुर्माना
न्यायालय ने कहा कि जब तक इस मामले में खंडपीठ का निर्णय नहीं आता तब तक मारुति की याचिका पर 15 मार्च 2016 का उसका अंतरिम आदेश सही है। सीसीआई ने कलपुर्जे बाजार में व्यापार नियमों के उल्लंघन का दोषी पाए जाने के बाद 25 अगस्त 2014 को 14 कार कंपनियों पर कुल 2,545.64 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था।

रिकॉल की 52 हजार गाडि़यां
मारुति सुजुकी ने तकनीकी खामी के कारण अपनी 52,686 कारों को वापस मंगा लिया है। कंपनी की ओर से स्‍वीफ्ट और बलीनो हैचबैक गाडि़यों को वापस मंगाया है। इसके लिए कंपनी 14 मई से कंपनी अपने ग्राहकों से संपर्क करेगी। बताया जा रहा है कि इन कारों के ब्रेक में कोई दिक्कत है। जिन मॉडल्स में तकनीकी खराबी की शिकायत है उन्हें 1 दिसंबर 2017 से लेकर 16 मार्च 2018 के बीच तैयार किया गया है।