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जीडीपी में सुधार, जानिए अर्थव्यवस्था के लिए अच्छे दिन आए क्या

क्या जीडीपी में सुधार अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने में कामयाब हो पाएगा? खासकर तब जब नोटबंदी और जीएसटी की मार से अर्थव्यवस्था अभी तक उबर नहीं पाया है।

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Arun Jaitley

नई दिल्ली। हाल ही में जीडीपी में सुधार भारतीय अर्थव्यस्था के लिए अच्छी खबर है। बुधवार को जीडीपी के आंकड़े जारी हुए जिसमें तीसरी तिमही मेेंं अर्थव्यवस्था की रफ्तार में 7.2 फीसदी हो गई है। आर्थिक विशेषज्ञों के अनुमान के हिसाब से ये थोड़ा बेहतर आंकड़ा है। ऐसे में एक बड़ा सबके मन में है कि, क्या जीडीपी में ये सुधार भारतीय अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने में कामयाब हो पाएगा? खासकर तब जब नोटबंदी और जीएसटी की मार से अर्थव्यवस्था अभी तक उबर नहीं पाया है। सवाल ये भी है कि क्या भारतीय जीडीपी आंकड़े बेहतर होने से भारत चीन को पछाड़कर सबसे तेज अर्थव्यवस्था वाला देश बन जाएगा? लेकिन इन सब के बीच एक बात तो साफ दिखाई पड़ रही की देश में आर्थिक सुधार के लिए उठाए गए कदमों के असर अब दिखने लगा है। ऐसे में ये भी देखना दिलचस्प होगा की भारतीय अर्थव्यवस्था वैश्विक निवेशकों को लुभाने में कितन कामयाब हो पा रहा है। और इससे देश में युवाओं को नौकरी के कितने अवसर मिलते हैं।


पिछली तिमाहियों में कैसा रहा है जीडीपी

देश में जीएसटी लागू होने से पहले कई गतिविधियों के चलते वित्त वर्ष 2017-18 के अप्रैल-जून वाली पहली तिमाही में जीडीपी दर 5.7 फीसदी था। वहीं जुलाई-सितंबर के बीच दूसरी तिमाही में जीडीपी दर 6.3 फीसदी हुआ था। ये आंकड़े सरकार के लिए थोड़े राहत वाले थे क्योंकि इसके पहले वाले तिमाही के आंकेड़े पिछले 13 तिमाही के सबसे निचले स्तर पर था। हालांकि विशेषज्ञों का मानना था कि ये सरकार द्वारा उठाए गए कई कड़ेे आर्थिक कदमों के वतह से था। अब तिसरी तिमाही में भी लगातार दूसरी बार जीडीपी दर में सुधार और 7 के बार जाने से इस बात की उम्मीद लगाया जा सकता है कि मौजूदा वित्त वर्ष सरकार के लिए साकारात्मक संकेत वाला होगा।


आगे आने वाली तिमाहियों के लिए क्या है संकेत

तिसरी तिमाही में सुधरे ग्रोथ रेट भारतीय अर्थव्यवस्था कि लिए अच्छेे दिनों के संकेत तो दे दिया है। इन आंकड़ों का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि पिछले वित्त वर्ष की अंतिम तिमाही में एक तरफ नोटबंदी का दबाव रहा तो वहीं दूसरी तरफ जीएसटी लागू होने के बाद अर्थव्यवस्था को दूसरा झटका लगा। ऐसे में जीडीपी का 7 फीसदी के पार जाना इस बात का संकेत हो सकता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था अब सुस्ती से बाहर निकलकर रफ्तार पकड़ रहा है। इसके साथ ही देश में निवेश का रास्ता भी साफ हो रहा है जिससे की आने वाली तिमाहियों में यह आंकड़ा और रफ्तार पकड़ सकता है।