
नई दिल्ली। रेल मंत्री पीयूष गोयल ( Piyush Goyal ) ने राज्यसभा में शुक्रवार को कहा कि रेल किराया ( railway fare ) बढ़ाने का कोई प्रस्ताव नहीं है, जबकि उत्पाद शुल्क व सेस में बढ़ोतरी के परिणामस्वरूप डीजल की कीमत में बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने कहा, "वर्तमान में डीजल की कीमत में बढ़ोतरी के कारण किराए में बदलाव का कोई प्रस्ताव नहीं है।" पीयूष गोयल ने यह भी कहा कि रेलवे द्वारा डीजल की खपत में सालों से कमी आ रही है क्योंकि यह इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन की तरफ बढ़ रहा है और 2022 तक 100 फीसदी विद्युतीकरण की योजना है।
प्रश्नकाल के समय कांग्रेस नेता बीके हरिप्रसाद ने रेल मंत्री से जवाब मांगा कि पेट्रोलियम उत्पादों की अस्थिरता का असर यात्री व माल भाड़ा पर होगा या नहीं। इस महीने की शुरुआत में बजट पेश करते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पेट्रोल व डीजल पर प्रति लीटर एक रुपये उत्पाद शुल्क व सेस बढ़ाने का प्रस्ताव दिया था।
तेजी से ग्रीन एनर्जी की तरफ बढ़ रहा रेलवे
रेलवे देश में डीजल का तीसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता है, लेकिन यह तेजी से ग्रीन एनर्जी की तरफ बढ़ रहा है। गोयल ने इससे पहले कहा था कि सार्वजनिक ट्रांसपोर्टर अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए देश के कुल बिजली खपत का करीब 1.27 फीसदी व डीजल का तीन फीसदी उपयोग करता है।
बजट में रेलवे के नीजिकरण की बात
बता दें कि गत 5 जुलाई को पेश किये गये बजट में वित्त मंत्री सीतारमण ने बताया कि रेलवे के ढांचे को बदलने के लिए सरकार ' ट्रिपल क्क ' मॉडल ( क्कक्कक्क द्वशस्रद्गद्य ) पर काम किया जायेगा। मतलब भारतीय रेल का अब निजीकरण होगा, तभी उसकी तस्वीर और तकदीर बदल सकती है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रेल बजट में साफ, सुरक्षित और समयबद्ध रेल यात्रा पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय रेल और मेट्रो प्रोजेक्ट में पीपीपी ( पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप ) मॉडल के जरिए निजी भागीदारी को बढ़ावा दिया जाएगा। बजट में सीतारमण ने रेलवे ट्रैक के लिए पीपीपी मॉडल को मंजूरी दी है। उनका कहना था कि पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल से रेलवे के विकास में तेजी आएगी।
50 लाख करोड़ के निवेश की जरूरत
निर्मला सीतारमण ने अपने भाषण के दौरान कहा कि 2018 से 2030 के बीच रेलवे ढांचे को बदलने के लिए 50 लाख करोड़ रुपए के निवेश की आवश्यकता होगी। वित्त मंत्री के मुताबिक रेलवे का पूंजी परिव्यय प्रति वर्ष 1.5 से 1.6 लाख करोड़ रुपये है। उन्होंने कहा कि मंजूर परियोजनाओं को पूरा करने में कई दशक लग जाएंगे। इसलिए, तीव्र विकास, पटरियां बिछाने, यात्री मालाभाड़ा सेवाओं की सुपुर्दगी के लिए पीपीपी मॉडल का इस्तेमाल किया जाएगा।
Updated on:
26 Jul 2019 05:03 pm
Published on:
26 Jul 2019 05:02 pm
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