
लंदन में लाखों की नौकरी छोड़ इस शख्स ने भारत में शुरु किया अपना मिल्क स्टार्ट-अप, अब कर रहा करोड़ो की कमार्इ
नर्इ दिल्ली। पिछले कुछ सालों से भारत समेत दुनियाभर के कर्इ देशों में नए बिजनेस को लेकर एक वर्ड बड़े तेजी से पाॅपुलर हुआ है। ये वर्ड है 'स्टार्ट अप'। स्टार्ट अप उन युवआें के बीच काफी तेजी से पाॅपुलर हो रहा जो 8 घंटे की नोकरी नहीं करना चाहते या फिर वो ये सोचते हैं कि वो किसी कपंनी के आधीन होकर काम नहीं करना चाहते हैं। इसी तरह के स्टार्टअप से अपने बिजनेस में सफलता का मिसाल है श्रीकुमार मिश्रा। श्रीकुमार मिश्रा शुरुआत में तो कर्इ युवाआें की तरह लंदन में मोटी सैलरी पर काम करते थे लेकिन इसके कुछ दिन बाद ही उनका मन विदेश में रहकर काम करने से भर गया। इसके साथ ही शुरु हुर्इ खुद के बिजनेस में सफलता हासिल करने की उनकी खुद की कहानी। देखते ही देखते श्रीकुमा ने खुद का स्टार्ट अप शुरु कर लिया जिससे की उन्हें अब एक तरफ मोटी कमार्इ तो हो ही रही है। साथ ही वो अपने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के स्टार्ट अप इंडिया योजना की भी लाभी उठाकर सफलता की एक नर्इ इबारत लिख रहे हैं।
शुरु किया खुद का डेयरी व्यवसाय
जब श्रीकुमार मिश्रा 2010 में लंदन से एक दूध कंपनी लॉन्च करने के लिए पूर्वी भारतीय शहर में वापस आये तो ये सिलिकॉन वैली से बहुत दूर था। आज सोशल मीडिया, स्मार्टफोन ऐप और बड़े डेटा एनालिटिक्स के साथ मिश्रा का डेयरी व्यवसाय 'मिल्क मंत्रा' सैकड़ों स्टार्टअप कंपनियों में से एक है जो भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट के जरिये लोगों तक पहुँच रही है। इससे पहले मिश्रा टाटा समूह के पूर्व कर्मचारी भी रह चुके हैं। भारत दुनिया के सबसे बड़े डेयरी उद्योग में से एक है जो 300 मिलियन भैंस और गायों का दावा करता है। आंकड़ों के अनुसार ये सालाना 165 मिलियन मीट्रिक टन दूध पैदा करते हैं, फिर भी औसत किसान के पास केवल दो मवेशी हैं, और अधिकांश सड़कों और बिजली के बिना कम जगह या परिवार के साथ खेतों में रहते हैं। अमेरिका दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक, जहां औसत डेयरी फार्म में लगभग 150 गायें हैं। भारत में दूध लाखों छोटे स्टोर , सड़क के किनारे स्टालों और घरेलू डिलीवरी पुरुषों के माध्यम से वितरित किया जाता है।
दूध उबालने से बचने के लिए इजाद किया नया तरीका
इस व्यवसाय में मिश्रा और उनकी पत्नी रशिमा, एक मार्केटिंग कार्यकारी भागीदार है। इन्होने एक ब्रांड के बारे में जो कल्पना की थी उसके हिसाब से उन्होंने भारत में दूध को स्टोर करने के नए तरीकों को विकसित किया, जिसमे उन्होंने बताया कि दूध उबालने की कोई ज़रूरत नहीं है। उनका मानना था कि भारत का मध्यम वर्ग उच्च गुणवत्ता वाले, स्वस्थ उत्पाद पर अधिक खर्च करेगी।
तैयार किया खास तरह का दूध सप्लार्इ नेटवर्क
इससे पहले उनकी कंपनी दूध मंत्रा को एक कारखाने और सप्लाई नेटवर्क की आवश्यकता थी, जिनमें से दोनों को पूंजी की आवश्यकता थी। मिश्रा ने भारतीय कृषि स्टार्टअप, उद्यम पूंजी के लिए धन उभरते हुए स्रोत को खोजा जो कि 2009 में कोई आसान काम नहीं था। वेंचर पूंजीपति भारत में तेजी से सक्रिय रहे हैं। ओडिशा भारत के ऐसे राज्यों में शामिल है जहां देश के डेयरी निवेशकों की नजर है। मिल्क मंत्र अनौपचारिक कलेक्टरों की तुलना में किसानों को दूध के लिए अधिक भुगतान करता है। वह किसानों को यह जानकारी भी देते हैं कि उनका दूध किस लायक है। मिल्क मंत्र भी किसानों को फीड के बारे में पशु चिकित्सा सहायता और जानकारी प्रदान करता है।
Updated on:
08 Jul 2018 02:58 pm
Published on:
08 Jul 2018 02:54 pm
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