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वेदांता को दो दिन में तीसरा झटका, अब तमिलनाडु सरकार ने लिया ये बड़ा फैसला

राज्य सरकार ने मंगलवार को वेदांता विस्तार के लिए दूसरे चरण के लिए स्टारलाइट को आवंटित भूमि को रद्द कर दिया है।

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Vedanta

वेदांता को दो दिन में तीसरा झटका, अब तमिलनाडु सरकार ने लिया ये बड़ा फैसला

नर्इ दिल्ली। पिछले दिनों(सोमवार) ही तमिलनाडु सरकार ने वेदांता समूह की स्वामित्व वाली काॅपर को बंद करने के आदेश जारी किए थे। इस खबर के बाद से शेयर बाजार में वेदांता को आज मुंह की खानी पड़ी। आज के कारोबार के दौरान बाॅम्बे स्टाॅक एक्सचेंज (बीएसर्इ) पर वेदांता के शेयरों में 6 फीसदी की गिरावट दर्ज की गर्इ। जिसके बाद कंपनी को कुल 5600 करोड़ रुपए का घाटा हुआ। राज्य सरकार ने मंगलवार को वेदांता विस्तार के लिए दूसरे चरण के लिए स्टारलाइट को आवंटित भूमि को रद्द कर दिया है। अनिल अग्रवाल की स्वामित्व वाली वेदांता के लिए एक आैर झटका है। जो कि हालिया दिनों में प्रदूषण को लेकर होने वाले हिंसक आंदोलन के केन्द्र में है।


343 एकड़ की जमीन का किया गया था अावंटित

इंडस्ट्री प्रमोशन कॉर्प के तहत 343 एकड़ जमीन लैंड बैंक को स्टरलाइट को आवंटित किया गया था। संयंत्र को बंद करने को लेकर सरकार ने तमिलनाडु प्रदुषण नियंत्रण बोर्ड का समर्थन किया था। बोर्ड ने संवैधानिक प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा था कि 'पर्यावरण की रक्षा आैर सुधार' आैर 'बड़े सार्वजनिक हित में' में इस संयंत्र को बंद कर दिया जाना चाहिए। इसके आधे घंटे अंदर ही सोमवार को कलेक्टर संदीप नंदुरी की अध्यक्षता में तूतीकोरिन के जिला अधिकारी ने परिसर को सील करने पहुंचे थे।


प्रदूषण से पड़ रहा था लोगों पर बुरा प्रभाव

गौरतलब है कि स्थानीय आैर पर्यावरण कार्यकर्ताआें लंबे समय से इस बात की मांग कर रहे थे कि देश का सबसे बड़ा स्टरलाइट प्लांट से उत्सर्जन से हवा आैर पानी प्रदूषित कर रहा है। इससे लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ रहा हैं। 27 मार्च को इस प्लांट को रखखाव के लिए 15 दिनों तक बंद किया गया था आैर इसके बाद से ही इसपर ताला लगा हुआ है। । अप्रैल में, तमिलनाडु प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने योजनाबद्ध शटडाउन के तहत स्मेल्टर को संचालित करने के लिए लाइसेंस देने से इनकार कर दिया था।


40 फीसदी तक कम हो जाएगा देश में काॅपर प्रोडक्शन

तमिलनाडु सरकार ने सोमवार को तूतीकोरिन में वेदांता लिमिटेड के कॉपर प्लांट को बंद करने के आदेश दिए हैं। इस प्लांट के बंद होने के बाद माना जा रहा है कि इससे भारत के सालाना कॉपर प्रोडक्शन 10 लाख टन में 40 प्रतिशत की कमी आ सकती है. यही नहीं इसके बंद होने से बिजली क्षेत्र में लगभग 800 छोटी और मध्यम इकाइयों पर असर पड़ सकता है। इनमें केबल निर्माता, वाइंडिंग तार इकाइयों और ट्रांसफॉर्मर निर्माता शामिल हैं जिनका निर्माण तूतीकोरिन के इस स्टरलाइट कॉपर प्लांट से होता था।


भारत के काॅपर एक्सपोर्ट पर पड़ेगा असर

इस कॉपर प्लांट के बंद होने का असर भारत के कॉपर एक्सपोर्ट पर भी होगा क्योंकि तूतीकोरिन का यह प्लांट लगभग 1.6 लाख टन का एक्सपोर्ट करता है। रेटिंग एजेंसी आईसीआरए ने अप्रैल की एक रिपोर्ट में कहा है कि देश में कॉपर की खपत पिछले पांच वर्षों में तेजी से बढ़ रही है और मौजूदा स्थानीय मांग में प्रति वर्ष 7-8 फीसदी की वृद्धि हुई है।

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