
घरों के बाहर बार कोड लगाकर भूली नपा, कई इलाकों में अब भी नहीं पहुंच रही कचरा गाड़ी
इटारसी. स्वच्छता सर्वेक्षण में अव्वल आने की कवायद के तहत नपा ने शहर के सभी 34 वार्डों में स्थित घरों के बाहर बार कोड लगाने का निर्णय लिया था। न्यास कॉलोनी, महर्षि नगर सहित अन्य कुछ इलाकों में बार कोड लगाए भी गए, लेकिन इसके बाद कोई कार्रवाई नहीं हुई। जिसकी वजह से अब घरों के बाहर लगे बार कोड भी खराब हो चुके हैं। हालात यह हैं कि शहर के कई रिहायशी इलाकों में अब भी समय पर कचरा गाडिय़ां कलेक्शन के लिए नहीं पहुंच पा रही है। जिससे लोगों को परेशानी हो रही है। घरों के बाहर बार कोड लगाने का उद्देश्य था कि इसकी मदद से यह पता चलेगा कि कचरा गाड़ी कब और कितने बजे आई। इतना ही नहीं यह भी पता चलता कि किस-किस घर से कचरा लिया और किससे नहीं। नगरपालिका ने फिलहाल प्रायोगिक तौर पर यह बार कोड न्यास कॉलोनी, महर्षि नगर सहित अन्य कुछ इलाकों में लगाए थे। नपा के मुताबिक कचरा गाड़ी लेकर कॉलोनियों में जाने वाले वाहन चालक कचरा एकत्र करने के दौरान बार कोड को स्कैन करते। जिससे इसकी एंट्री एप में होगी। इसके जरिए ही मॉनीटरिंग भी हो जाती।
34 वार्ड में कचरा कलेक्शन के लिए सिर्फ 23 गाडिय़ां-
नगरपालिका शहर में डोर टू डोर कचरा कलेक्शन करवा रही है। जिसके लिए नपा के पास 23 गाड़ी है, जबकि शहर 34 वार्डों में बंटा हुआ है। इसके अलावा लगातार नई कॉलोनियां और रिहायशी इलाके विकसित हो रहे हैं। ऐसे में कचरा कलेक्शन प्रोपर तरीके से नहीं होने की वजह से लोग परेशान हो रहे हैं। खेड़ा क्षेत्र में जाने वाली गाड़ी पिछले एक सप्ताह से खराब है। जिसकी वजह से यहां कचरा कलेक्शन नहीं हो रहा है। न्यास कॉलोनी निवासी प्रतिभा दुबे, रंजीत ठाकुर ने कहा कि पिछले दस दिनों में सिर्फ एक दिन कचरा लेने गाड़ी आई थी। सोनासांवरी नाका क्षेत्र में मुख्य सडक़ किनारे रहने वालों ने बताया कि यहां भी कचरा गाड़ी नहीं रुकती।
30 से बढ़ाकर 50 रुपए किया शुल्क-नगरपालिका परिषद का साधारण व्यापक सम्मेलन 21 फरवरी को हुआ था। नपा ने अपनी आय बढाने के लिए घर से कचरा गाडी द्वारा कचरा कलेक्शन का शुल्क बढा दिया है। यह शुल्क प्रति वर्ष 600 रुपये यानी प्रतिमाह 50 रुपये लगेगा। जबकि इससे पहले शुल्क 30 रुपए लिया जाता था।
कचरा घर में तब्दील हो गई पक्की सडक़ें-
शहर की कई सडक़ें अधूरी और कच्ची हैं। जबकि घरों के पीछे नगरपालिका ने पक्की सीमेंट सडक़ों का निर्माण करवाया है। जिनका उपयोग चलने के लिए नहीं बल्कि सिर्फ कचरा डालने के लिए किया जा रहा है। हालात यह हैं कि इन सडक़ों पर जगह-जगह कचरे के ढेर लगे हैं। आवारा मवेशी और जानवर धमाचौकड़ी मचाते रहते हैं। जिसकी वजह से इन रास्तों से न तो कोई आता है और जाता है। लाखों रुपए खर्च करके बनाई गई सीमेंट सडक़ों की सफाई तक नहीं होती।
स्वच्छता सर्वे में रेड और येलो स्पॉट शामिल-स्वच्छता सर्वे में रेड और येलो स्पॉट शामिल है। यानी पान-गुटखा खाकर थूकने या यूरीन से बनने वाले निशान शामिल हैं। ऐसे में यदि नपा को अपनी रैंकिंग सुधारनी है तो न केवल लोगों को बल्कि खुद नपा के कर्मचारियों को भी यहां-वहां थूकने की आदत बदलनी होगी। पहले स्वच्छ सर्वेक्षण में यलो स्पॉट्स को शामिल किया गया था। जिसके बाद रेड स्पॉट्स भी सर्वे में शामिल किया गया है।
Published on:
27 Jul 2024 08:25 pm
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