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इटारसी (मध्यप्रदेश)। मध्यप्रदेश के सनखेड़ा गांव में किसी मकान की नींव की खुदाई कर रहा आम नागरिक हो या खेतों में काम कर रहे किसान, जमीन पर काम करते समय हर ग्रामीण चौकन्ना है कि कब उसकी कुदाल से किसी देवता की मूर्ति को खंडित करने का पाप न हो जाए। जी हां, इटारसी से महज पांच किलोमीटर दूरी पर बसे सनखेड़ा की मिट्टी प्राचीन मूर्तियां और मंदिर के अवशेष उगल रही हैं जिससे ग्रामीण खुश व गर्वित भी हैं। ग्रामीणों को लगता है कि उनके गांव के नीचे कभी कोई भव्य मंदिर हो सकता है।
ग्रामीणों के अनुसार अब तक भगवान गणेश, शिव और नृत्यांगनाओं की कई मूर्तियों सहित करीब 500 से अधिक कलाकृतियां व अवशेष मिल चुके हैं। इनमें मंदिरों में उपयोग होने वाले छत्र, विभिन्न आकृतियों के गुंबद, पत्थरों पर जटिल नक्काशी, सजावटी मेहराबनुमा आकृतियां, अमलका और शिखर के हिस्से, पैनलों पर शैलीबद्ध पत्तियां और पशु आकृतियां उकेरे पत्थर शामिल हैं। कई पत्थरों पर कीर्तिमुख भी बने हैं, जो हिंदू मंदिरों की विशिष्ट पहचान माने जाते हैं। जमीन से निकल रही प्राचीन प्रतिमाओं व अन्य अवशेषों काे देखने के लिए आसपास के क्षेत्रों से भी लोग पहुंचते हैं।
गांव में निकल रही प्राचीन धरोहर को फिलहाल ग्रामीण संजोकर रख रहे हैं लेकिन वे चाहते हैं कि प्रशासन संरक्षण का इंतजाम करे। खुदाई में निकली मूर्तियों को ग्रामीणों ने सार्वजनिक खेड़ापति मंदिर में सुरक्षित रखा है। खेत के पास स्थित मरई माई मंदिर में भी बड़े-बड़े नक्काशीदार पत्थर रखे हुए हैं। स्थानीय निवासी सतीश मलैया ने बताया कि उनके घर में नींव की खुदाई में नक्काशीदार बड़े पत्थर निकले थे, जिन्हें उन्होंने घर के पास सुरक्षित रखा है। पहले खेत में खुदाई के दौरान पार्श्वनाथ की एक खंडित मूर्ति मिली थी, जिसे पुरातत्व विभाग अपने साथ ले गया। मुकेश ठाकुर, मुकेश चौरे और महेंद्र राव का कहना है कि गहराई तक खुदाई करने पर खेतों और घरों के आसपास भी डिजाइनदार पत्थर निकलते हैं।
इतिहासकार हंसा व्यास के अनुसार, नर्मदांचल क्षेत्र में जैन और बौद्ध धर्म मौर्य काल से विद्यमान रहा है। नर्मदापुरम से 20 किलोमीटर दूर पान गुराडिया की सारू-मारू गुफा में अशोक का अभिलेख और स्तूपों के अवशेष मिले हैं। इटारसी के पास सनखेड़ा गांव में मिले 11वीं-12वीं शताब्दी के अवशेषों में जैन और हिंदू मंदिरों के चिन्ह हैं, जिनमें शिव और विष्णु मंदिरों के अवशेष शामिल हो सकते हैं। पार्श्वनाथ और जैन मंदिरों के कुछ अवशेष नर्मदापुरम संग्रहालय में सुरक्षित हैं।
Updated on:
04 Jan 2026 03:35 am
Published on:
04 Jan 2026 03:31 am
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