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Weather Update: इस बार फीका रह सकता है मानसून, अल नीनो के प्रभाव से बारिश की संभावना कम, 2023 जैसे बन रहे हालात

IMD Weather Alert: इस बार मानसून में बारिश की संभावना कम है। अल नीनो के प्रभाव के चलते भारत में मानसून के कमजोर रहने की संभावना जताई गई है। पढ़ें पूरी खबर...

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IMD Rain Alert

बारिश का अलर्ट। ( फोटो: पत्रिका)

IMD Weather Prediction: प्रशांत महासागर में नमक के प्रभाव से अल नीनो मजबूत हो सकता है और इसका प्रभाव भारत के आगामी मानसून पर पड़ सकता है। प्रशांत महासागर में नमक के पैटर्न पर किए गए नए शोध में भारत में मानसून के कमजोर रहने की संभावना जताई गई है। जियोफिजिकल रिसर्च लेटर्स जर्नल में प्रकाशित ड्यूक यूनिवर्सिटी के निकोलस स्कूल ऑफ द एनवायरनमेंट में बताया गया है कि प्रशांत महासागर में खारेपन का खास पैटर्न अल नीनो की तीव्रता को लगभग 20 प्रतिशत तक बढ़ा सकते हैं और अत्यधिक अल नीनो घटनाओं को दोगुना कर सकते हैं। इससे भारत में मानसून कमजोर हो सकता है, सूखा पड़ सकता है और जल संकट गहरा सकता है।

शोध में 65 वर्षों के महासागरीय डेटा और क्लाइमेट मॉडल्स का उपयोग किया गया है। शोधकर्ता शिनेंग हु ने कहा कि महासागरीय धाराएं नमकीन या मीठे पानी को इधर-उधर ले जाती हैं और नमक के वितरण को बदलती हैं। नमक की धाराएं अल नीनो जैसी जलवायु घटनाओं को प्रभावित कर सकती है।

भूमध्यरेखीय पश्चिमी प्रशांत में मीठा पानी और दूर-दूर नमकीन पानी गर्म सतही पानी को पूर्व की ओर धकेलता है, जिससे अल नीनो ट्रिगर और मजबूत होता है। वर्ष 2018 के बाद 2023 का अल नीनो रिकॉर्ड में सबसे मजबूत में से एक था। जिससे मानसून कमजोर रहा और फसलें प्रभावित हुईं। भारत पहले से ही अनियमित मौसम, लंबी गर्मी की लहरें, पानी की कमी और कृषि पर दबाव झेल रहा है। अल नीनो के संभावित ताजा संकेत से देश सामने नई चुनौती आ सकती है।

अल नीनों से बिगड़ता है मौसम पैटर्न

अल नीनो हर 2 से 7 साल में होता है, जब पूर्वी प्रशांत में पानी गर्म हो जाता है। इससे वैश्विक हवा के पैटर्न बिगड़ते हैं और दक्षिण एशिया से नमी घट जाती है। इससे भारत का मानसून कमजोर पड़ता है। मजबूत अल नीनो वर्षों में भारत में कहीं न कहीं सूखे की 60 प्रतिशत संभावना रहती है, साथ ही गर्मी बढ़ती है। अल नीनो वर्षों में सामान्य से कम बारिश होती है।

सर्दियां हो रही अनियमित

जलवायु परिवर्तन के ला-नीना व अल नीना के प्रभाव से सर्दी के ठंडे दिनों पर भी असर पड़ रहा है। ठंडे दिन अधिक अनियमित, फैले हुए और समय से बाहर हो रहे हैं। आइएमडी के 2022 से 2026 तक के डेटा के अनुसार शीतलहर मुख्य रूप से उत्तरी, उत्तर-पश्चिमी और मध्य भारत में रही, लेकिन कभी-कभी दक्षिण में भी प्रवेश हुआ जैसे 2023 में तेलंगाना व कर्नाटक, 2026 में कर्नाटक और ओडिशा में 7 दिन शीतलहर देखी गई। पहले सर्दियों में शीत लहर की 65-72 प्रतिशत घटनाएं होती थीं, लेकिन 2025 में 65 प्रतिशत घटनाएं पोस्ट-मॉनसून (नवंबर-दिसंबर) में आईं, जहां नवंबर में रिकॉर्ड 20 दिन ठंड पड़ी। 2026 में फरवरी में कोई शीत लहर नहीं रही। बीते पांच सालों में पहली बार सर्दी जल्दी खत्म हुई।

पहाड़ों पर बारिश, मैदानों में बढ़ेगा तापमान

दो नए कमजोर पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने से हिमालयी रेंज के जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के अलग-अलग भागों में 26 फरवरी से 3 मार्च तक हल्की बारिश और बर्फबारी की संभावना है। पंजाब व हिमाचल में 40 किमी प्रति घंटा तक तेज हवाएं, गरज-चमक के साथ ओलावृष्टि और घने कोहरे का मौसम हो सकता है। वहीं उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानी इलाकों के दिल्ली-एनसीआर, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, उत्तरप्रदेश में मौसम शुष्क रहेगा और अगले सात दिन तक क्रमिक रूप से 3 से 4 डिग्री तापमान बढ़ेगा। यहां अधिकतम तापमान 30-35 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है।