
Rajasthan Board Exam - स्टूडेंट्स को रखना होगा इनका ध्यान,नहीं तो हो जाएंगे परीक्षा से बाहर
जबलपुर. सर, भगवान का नाम लेकर परीक्षा देने आए थे, उनका नाम भी लिख दिया है। अब आपकी ही कृपा से हमारा भला हो सकता है। गरीबी के कारण पढ़ाई नहीं कर पाए। देख लीजिएगा आपका भी भगवान भला करेगा। यह अजीबोगरीब दरख्वास्त दसवीं और बारहवीं की बोर्ड परीक्षाओं की उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्याकंन में शिक्षकों को देखने और पढऩे के लिए मिल रही है। कई परीक्षार्थियों ने भगवान के नाम की दुहाई देते हुए मूल्याकंनकर्ताओं पर इमोशनल दांव चलने की कोशिश है।
पास होने के लिए अजब-गजब पैंतरे
गरीबी का भी दिया हवाला, दसवीं और बारहवीं की कॉपियों के मूल्याकंन में लिखे मिले भगवान के नाम
परीक्षार्थियों ने चला ‘इमोशनल’ दांव
माध्यमिक शिक्षा मंडल की दसवीं और बारहवीं बोर्ड परीक्षा की एक लाख कॉपियां जबलपुर को आवंटित की गईं हैं। इनका मूल्याकंन शासकीय महारानी लक्ष्मीबाई कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में चल रहा है। मूल्याकंनकर्ताओं को कुछ ऐसे परीक्षार्थियों की कॉपियां मिल रही हैं, जिन्होंने उत्तर की जगह भगवान शिव, राम, हनुमान और मां सरस्वती व दुर्गा की दुहाई लिखी हुई है। उन्हें लग रहा है कि ऐसा करने से उनपर कृपा बरस जाएगी या उन्हें नंबर मिल जाएंगे। कुछ विषयों की उत्तरपुस्तिकाओं में उदाहरण के तौर पर किसी व्यक्ति के नाम की जगह भगवान के पात्रों का जिक्र किया गया।
अंग्रेजी के एक शिक्षक ने बताया कि प्रश्न पर छात्र ने राम और हनुमान की उपमा देकर उत्तर लिखा है। शिक्षक का यह भी कहना है कि उत्तर सही है, लेकिन उसने संज्ञा बदल दी। उनका यह नवाचार है, जब रामायण काल की कथाओं को नए वैज्ञानिक आधार पर अपने प्रश्न के हल में इस्तेमाल किया है।
आर्थिक स्थिति का हवाला
दसवीं कक्षा की छात्रा ने आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए लिखा है कि लॉकडाउन के बाद से परिवार संकट के दौर में है। वह पिता के सब्जी के धंधे में हाथ बंटाती है, इससे पढ़ाई का वक्त नहीं मिलता। उससे पिता को बहुत आशाएं हैं। वह फेल हो गई तो पिता को धक्का लगेगा, शादी करवा देंगे। शिक्षक राजेश कुमार कहते हैं कि परीक्षा की तैयारी न कर पाने के कारण परीक्षार्थी जांचकर्ता को प्रभावित कर सहानुभूति हासिल करने की कोशिश करते हैं।
30 हजार कॉपियों का मूल्याकंन
माशिमं ने शासकीय महारानी लक्ष्मी बाई कन्या उमावि को मूल्यांकन केंद्र बनाया गया है। जिले में 21 मार्च से मूल्यांकन शुरू हुआ है। अब तक 30 हजार कॉपियों का मूल्याकंन हो चुका है।
कुछ छात्र स्कूल से अनुपस्थित रहते हैं, जिसके कारण उनकी पढाई ठीक से नहीं हो पाती। ऐसे चंद छात्र होते हैं, जो इस तरह का प्रयास करते हैं। हालांकि, शिक्षक का दायित्व होता है कि वह ईमानदारी के साथ कॉपी जांचें।
घनश्याम सोनी, जिला शिक्षा अधिकारी, जबलपुर
Published on:
31 Mar 2023 12:39 pm
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