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जबलपुर. मप्र हाईकोर्ट से बारह साल की मासूम रेप पीडि़त को राहत मिली है। जस्टिस सुबोध अभ्यंकर की सिंगल बेंच ने कहा कि बारह साल की उम्र में पीडि़त शारीरिक संबंध के लिए अपनी सहमति नहीं दे सकती है। लिहाजा उसे गर्भपात की अनुमति दी जाती है। कोर्ट ने जबलपुर के नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज के डीन से आग्रह किया कि वे पीडि़त बालिका का चिकित्सकीय गर्भपात सुनिश्चित कराएं। भ्रूण को डीएनए जांच के लिए भेजने का निर्देश दिया गया।
हनुमानताल थाना क्षेत्र निवासी महिला की ओर से याचिका दायर कर कहा गया कि उसकी 12 साल की बच्ची 26 सितंबर 2019 को रेप का शिकार हो गई थी। 4 फरवरी 2020 को जब उसने पुत्री का मेडिकल चेकअप कराया तो उसे जानकारी हुई कि पुत्री को 18 सप्ताह 4 दिन का गर्भ है। इस पर एफआईआर दर्ज कराने के साथ ही पुत्री का गर्भपात कराने के लिए उसने यह याचिका दायर की। कोर्ट के निर्देश पर पीडि़ता की जांच मेडिकल कॉलेज के तीन डॉक्टरों की टीम ने की।
रिपोर्ट में बताया गया कि पीडि़त को 19 सप्ताह 6 दिन का गर्भ है, जो मेडिक ल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी एक्ट की सीमाओं के अंतर्गत आता है। इसलिए गर्भपात की अनुमति दी जा सकती है। रिपोर्ट के आधार पर कोर्ट ने मेडिकल कॉलेज डीन को पीडि़त का गर्भपात करने को कहा।
Published on:
15 Feb 2020 05:04 pm
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