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ई-लर्निंग चुनौतियों पर हुई चर्चा, देशभर से जुटे 252 विशेषज्ञ

100 महाविद्यालय, वेबीनार पर, रादुविवि के साथ प्रदेश के बाहर के जिलों से भी शामिल हुए प्रोफेसर, ई-लर्निंग की चुनौतियों पर हुए लाईव व्याख्यान  

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घर पर ही रहकर भी उच्च शिक्षा

घर पर ही रहकर भी उच्च शिक्षा

जबलपुर।
रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के निर्देश पर आयोजित हुए वेबीनार में देश के विभिन्न हिस्सों से 252 विशेषज्ञों ने ऑनलाइन व्याख्यान में सहभागिता की। पहली बार इस तरह का व्यापक स्तर पर ऑनलाइन कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह राष्ट्रीय ऑनलाइन वेबीनार ‘ ई-लर्निंग की चुनौतियां व अवसर ’ पर केंद्रित था जिसकी रुपरेखा मेकलसुता महाविद्यालय डिंडौरी को दी गई। वेबीनार के संयोजक प्रो. विकास जैन ने बताया कि वर्तमान में लॉकडाउन के चलते लोग घर पर ही है और महानगरों की तर्ज पर लाईव वेबीनार का आयोजन देश के प्राध्यापक, वैज्ञानिक, रिसर्च स्कॉलर व विद्यार्थियों के लिये लाभप्रद होगा। इस वेबीनार में भारत से 252 लोगों ने लाईव इंटरनेट के माध्यम से रजिस्ट्रेशन करवाकर अपनी उपस्थिति दी। जिसमें 100 से अधिक विभिन्न महाविद्यालयों के प्रोफेसर भी सम्मिलित हुये। मुख्य अतिथि कुलपति प्रो. कपिलदेव मिश्र ने कहा कि परिस्थितियों ने हमे सिखाया है कि हम किस तरह से ज्यादा से ज्यादा छात्रों प्राध्यापकों के बीच एक जगह बैठकर अपनी बात पहुंचा सकते हैं। विवि द्वारा सभी विभागों में इसकी शुरुआत कर दी गई है।
विशिष्ट अतिथि कुलसचिव प्रो. कमलेश मिश्रा, उपकुलसचिव पूजा तिवारी इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजाति विवि विशिष्ट अतिथि रहे। मुख्यवक्ता भावना अग्रवाल संस्थापक ब्राईट क्लब अचीव मुम्बई, डॉ. विवेक मिश्रा साईफा कॉलेज भोपाल, डॉ. सुशील दुबे साइंस कॉलेज जबलपुर, इंजी.अनुराग बिलैया डॉ.प्रदीप द्विवेदी, अभिषेक सिंह एसोसिऐट कन्सलटेंट टॉटा कोलकाता से व डॉ. संजय तिवारी, डॉ. राजेश चौरसिया प्राचार्य मण्डला लाईव स्पीकर के रूप में उपस्थित रहे।

घर पर ही रहकर भी उच्च शिक्षा :
प्राचार्य डॉ.बीएल द्विवेदी ने कहा कि ई-शिक्षा का अर्थ इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और डिजिटल मीडिया के माध्यम ये शिक्षा लेना है। किस प्रकार हम आज की तकनीकों के माध्यम ये अपने घर पर ही रहकर भी उच्च शिक्षा ग्रहण कर सकते है। प्रो. विकास जैन ने बताया कि वास्तव मे ई-शिक्षा को सभी प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक समर्थित शिक्षा और अध्यापन के रूप में परिभाषित किया जा सकता है। यह शिक्षा क्रियात्मक होती है जिसका उद्देश्य विद्यार्थी एवं शिक्षक के व्यक्तिगत अनुभव, अभ्यास और ज्ञान के संदर्भ में ज्ञान का निर्माण को प्रभावित करना होता है।