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एक साल के लिए 36 गोदाम ब्लैक लिस्टेड, किराया भी रोका

धान के भंडारण में अनियमितता पर मप्र वेयरहाउसिंग कारपोरेशन की कार्रवाई    

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जबलपुर। धान भंडारण में अनियमितता पर 36 गोदामों को मप्र वेयरहाउसिंग एंड लॉजिस्टिक्स कारपोरेशन ने एक साल के लिए ब्लैक लिस्टेड कर दिया है। इस सम्बंध में क्षेत्रीय प्रबंधन ने आदेश जारी कर दिए हैं। इस अवधि में इन गोदामों में रबी सीजन का गेहूं और मूंग के अलावा अगले साल का धान का भंडारण भी मुश्किल हो सकेगा।

जिले में धान के भंडारण और खरीदी में भारी अनियमितताएं मिली थीं। अभी तक इस मामले में कार्रवाई चल रही है। 42 गोदामों में बिना अनुमति के धान का भंडारण कर किया गया था। किसानों को झांसा दिया गया था कि जल्द ही यहां धान खरीदी केंद्र बन जाएगा। इस झांसे में आकर दो हजार किसानों ने चार लाख मीट्रिक टन धान यहां रख दिया था। हालांकि, इसमें किसानों की गड़बड़ी मिली थी। उन्होंने नजदीकी केंद्र के चक्कर में धान यहां रख दिया था।
धान उपार्जन नीति का उल्लंघन

वेयरहाउस संचालकों ने धान खरीदी नीति का उल्लंघन किया था। ज्वाइंट वेंचर स्कीम के अंतर्गत किए गए अनुबंध का भी पालन नहीं किया गया था। ब्लैक लिस्टेड सम्बंधी आदेश में कहा गया है कि इससे पहले एक पत्र जारी कर अनियमितताओं के सम्बंध में स्पष्टीकरण मांगा गया था। लेकिन, उसका सही जवाब नहीं दिया गया। इसलिए अगले एक साल के लिए उनके गोदाम को ब्लैकलिस्टेड किया जाता है। इससे पहले कार्रवाई में इन गोदामों को ब्लॉक किया गया था। जांच पूरी हो गई तो इसमें अनाज के भंडारण पर रोक लगा दी गई है।

अधिकारी हुए थे निलम्बित
इस मामले में शासन ने मप्र वेयरहाउसिंग कारपोरेशन के क्षेत्रीय प्रबंधक, जिला खाद्य नियंत्रक, जिला विपणन अधिकारी और वेयरहाउसिंग कारपोरेशन के क्षेत्रीय प्रबंधकों को निलम्बित किया था। कुछ समितियों के प्रबंधक और ऑपरेटर्स के खिलाफ एफआइआर दर्ज की जा चुकी है।

ओपन कैप में रखवाया धान

इन गोदामों के अंदर एवं बाहर रखे धान में कुछ मात्रा ही बची थी। बाकी किसानों ने उठा लिया था। केवल 11500 मीट्रिक टन धान बचा था, उसे ओपन कैप में रखवाया गया। अब उसका उठाव कराया जा रहा है। इस धान को मिलर्स को दिया जा रहा है। वह इसका चावल बनाकर मध्यप्रदेश सिविल सप्लाई कारपोरेशन को भेज रहे हैं।

जिले के 36 गोदामों में बिना अनुमति धान का भंडारण किया गया था। यह धान खरीदी नीति एवं ज्वाइंट वेंचर स्कीम का उल्लंघन था। इस मामले में उनसे संचालकों से स्पष्टीकरण मांगा गया था, संतोषजनक उत्तर नहीं मिलने से एक वर्ष के लिए ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है।
संतोष सोलंकी, क्षेत्रीय प्रबंधक, मप्र वेयरहाउसिंग एवं लॉजिस्टिक कारपोरेशन लिमिटेड