
परियट नदी के दस किमी क्षेत्र के आमानाला, सोनपुर, मटामर, रिठौरी, मोहनिया गांव बारिश आते ही खतरे में आ गए हैं।
जबलपुर. परियट नदी के दस किमी क्षेत्र के आमानाला, सोनपुर, मटामर, रिठौरी, मोहनिया गांव बारिश आते ही खतरे में आ गए हैं। इन गांवों में मगरमच्छ घुसते हैं। नदी से आने वाले इन जलीय जीवों को रोकने की कोई विकल्प नहीं है। वन विभाग की दलील है कि वे रेस्क्यू करते हैं और इन्हें खंदारी और परियट में छोड़ देते हैं।
शहर से लगी परियट नदी से लगे 05 गांवों में बारिश आते ही मगरमच्छ लोगों के घरों तक पहुंच जाते हैं। इससे किसी भी हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता है। पहले कई मामले हो चुके हैं, जिसमें वन विभाग ने गांव में पहुंचकर रेस्क्यू किया है। उधर, गांव के लोगों ने भी मगरमच्छ पकड़े हैं। वन विभाग का कहना है कि खंदारी और परियट में करीब दो सौ मगरमच्छ हैं। साल भर में करीब 25 रेस्क्यू हो जाते हैं।
परियट नदी के दस किमी क्षेत्र के आमानाला, सोनपुर, मटामर, रिठौरी, मोहनिया गांव बारिश आते ही खतरे में आ गए हैं। इन गांवों में मगरमच्छ घुसते हैं। नदी से आने वाले इन जलीय जीवों को रोकने की कोई विकल्प नहीं है। वन विभाग की दलील है कि वे रेस्क्यू करते हैं और इन्हें खंदारी और परियट में छोड़ देते हैं।
शहर से लगी परियट नदी से लगे 05 गांवों में बारिश आते ही मगरमच्छ लोगों के घरों तक पहुंच जाते हैं। इससे किसी भी हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता है। पहले कई मामले हो चुके हैं, जिसमें वन विभाग ने गांव में पहुंचकर रेस्क्यू किया है। उधर, गांव के लोगों ने भी मगरमच्छ पकड़े हैं। वन विभाग का कहना है कि खंदारी और परियट में करीब दो सौ मगरमच्छ हैं। साल भर में करीब 25 रेस्क्यू हो जाते हैं।
लोहे की जाली गायब
परियट में मगरमच्छ के सम्भावित क्षेत्रों में जाली लगाई गई थी लेकिन समय गुजरने के साथ ये गायब हो गई हैं। इससे होता यह है कि बारिश में पानी की अधिकता होते ही मगरमच्छ सहित उनके बच्चे गांव के घरों तक पहुंच जाते हैं।
नहीं बना पार्क
परियट में मगरमच्छ का प्राकृतिक आवास को देखते हुए यहां पार्क विकसित करने की योजना कुछ ही समय में सिमट गई। यूएनडीपी ने वन विभाग की नीरसता को देखते हुए 65 लाख के बाद आगे राशि स्वीकृत नहीं की। वन विभाग ने भी इस पार्क की फाइल बंद कर दी।
खंदारी के ओवरफ्लो होते ही दिखते हैं मगरमच्छ
परियट नदी के खंदारी जलाशय के ओवरफ्लो होते ही मगरमच्छ दिखाई देने लगते हैं। जानकारों का कहना है कि मगरमच्छ पानी के बाहर अंडे देते हैं। अंडों के निषेचन होने के बाद इनके बच्चे पानी के प्रवाह में इधर-उधर हो जाते हैं, जिससे कई बच्चे गांव की ओर चले जाते हैं।
क्रोकोडाइल पार्क के तहत लगाई थी जाली
शहर के मटामर, खमरिया, उमरिया, सोनपुर, रिठौरी, घाना, डुमना और खंदारी जलाशय के क्षेत्रों में परियट नदी के किनारे लोहे की जाली लगाई गई थी। मगरमच्छ को प्राकृतिक रूप से संरक्षण देने के लिए क्रोकोडाइल पार्क और सेंचुरी विकसित करने की योजना बनाई थी, जिसमें यूनाइटेड नेशन डेव्लपमेंट प्रोजेक्ट (यूएनडीपी) ने दो करोड़ की राशि स्वीकृत की थी। इस राशि में से 65 लाख की लागत से नदी की फैंसिंग की थी।
- क्रोकोडाइल प्रोजेक्ट यूएलडीपी के द्वारा बंद कर दिया गया है। लोगों को सुरक्षित रखने के लिए पानी से बाहर आने वाले मगरमच्छ का हम रेस्क्यू करते हैं।
अंजना सुचिता तिर्की, डीएफओ
Published on:
21 Jun 2022 11:31 am
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